- Friday World Oct 26,2026
आज 26 अक्टूबर 2026 को पूरे भारत में महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े श्रद्धा भाव से मनाई जा रही है। हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल एक जयंती नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का पहला कवि यानी आदिकवि कहा जाता है। कहा जाता है कि एक क्रौंच पक्षी के वध को देखकर उनके मुख से करुणा में पहला श्लोक निकला था, और उसी श्लोक से रामायण जैसे महाकाव्य की रचना हुई। 24,000 श्लोकों वाली रामायण आज भी हमें सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का पाठ पढ़ाती है।
भाजपा ने कैसे याद किया - कर्म से सम्मान तक
भारतीय जनता पार्टी ने इस दिन को सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता के रूप में मनाया।
दिल्ली से लेकर जिला स्तर तक भाजपा के SC मोर्चा ने कार्यक्रम आयोजित किए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वाल्मीकि जी तप, ज्ञान और करुणा के प्रतीक हैं, मानवता रामायण के लिए उनकी सदा ऋणी रहेगी। नितिन गडकरी सहित कई बड़े नेताओं ने आदिकवि को नमन किया।
झारखंड के रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने वाल्मीकि जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। मैसूर में भाजपा ने वाल्मीकि प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शोभायात्रा निकाली। भाजपा का संदेश स्पष्ट था - वाल्मीकि जी का जीवन परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो बताता है कि मनुष्य का मूल्य जन्म से नहीं कर्म से तय होता है।
कांग्रेस ने कैसे याद किया - न्याय और समानता की बात
कांग्रेस ने इस अवसर को सामाजिक न्याय के नजरिए से याद किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी।
खड़गे ने अपने संदेश में कहा कि महर्षि वाल्मीकि की अमर रचना रामायण ने मानवता को सत्य, प्रेम और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि हमें हर पीड़ित के साथ खड़ा होना चाहिए और अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। कांग्रेस ने वाल्मीकि जी को वंचित समाज की आवाज और समानता के प्रतीक के रूप में याद किया।
गुजरात में कांग्रेस का भव्य आयोजन - भाजपा रही
गुजरात में इस जयंती का मुख्य केंद्र अहमदाबाद रहा। कांकरिया ट्रांसस्टेडिया में गुजरात सरकार द्वारा महर्षि वाल्मीकि जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य मंत्री दर्शना बेन वाघेला ने विशेष रूप से भाग लिया। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि यहाँ केवल पूजा-पाठ नहीं हुआ, बल्कि वाल्मीकि समाज के तेजस्वी विद्यार्थियों और उच्च डिग्री हासिल करने वाले युवाओं का सार्वजनिक सम्मान किया गया।
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने समाज को तीन मंत्र दिए - परिवार में संस्कार, बच्चों को शिक्षा और जीवन को व्यसन मुक्त बनाना। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मूल्य उसके जन्म से नहीं, उसके कर्मों से तय होता है। संतों के जीवन से हमें परिवर्तन की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा समानता का भाव रखा है, पिछले दस वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, और वाल्मीकि समाज को भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आगे आना चाहिए।
इसके विपरीत गुजरात में कांग्रेस की ओर से आज कोई बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम, शोभायात्रा या महोत्सव की खबर सामने नहीं आई। गुजरात प्रदेश कांग्रेस का कार्यक्रम श्रद्धांजलि तक ही सीमित रहा। इस तरह गुजरात में जयंती का मंच पूरी तरह से भाजपा के नाम रहा।
निष्कर्ष यही है कि वाल्मीकि जयंती अब केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतना का भी पर्व बन गई है। एक तरफ भाजपा इसे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और कर्म से सम्मान जोड़कर मना रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक के रूप में देख रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 26,2026
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