-Friday World Oct 28,2026
ब्राजील में हाल ही में संपन्न राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में हार का सामना करने वाले फ्लावियो बोल्सोनारो देश छोड़कर अमेरिका चले गए हैं। मंगलवार और बुधवार को विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया। उनके प्रवक्ता या आधिकारिक टीम की तरफ से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
२५ अक्टूबर २०२६ को हुए रन-ऑफ में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने करीब ५१.८ प्रतिशत वोट हासिल कर चौथी बार राष्ट्रपति पद जीत लिया। फ्लावियो बोल्सोनारो को लगभग ४८.२ प्रतिशत वोट मिले। दोनों के बीच करीब ४४ लाख वोटों का अंतर रहा। पहले चरण में फ्लावियो आगे थे, लेकिन दूसरे चरण में लूला ने ऐतिहासिक वापसी की।
फ्लावियो ने हार स्वीकार नहीं की। उन्होंने मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं, खासकर मतदान समय बढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए चुनाव परिणाम रद्द करने और लूला व उपराष्ट्रपति गेराल्डो अल्कमिन की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की। बाद में उन्होंने कुछ हद तक रुख बदला और विपक्ष में रहने की बात कही, लेकिन कानूनी चुनौती जारी रखने का संकेत दिया।
सोमवार को अदालत ने उन्हें मंगलवार दोपहर तक अपना सामान्य और राजनयिक पासपोर्ट जमा कराने का आदेश दिया था। पासपोर्ट जमा कराने या न कराने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने आदेश की अवहेलना की और परिवार के साथ देश छोड़ दिया। रास्ता अर्जेंटीना और इक्वाडोर होते हुए निजी जेट से मियामी की ओर बताया जा रहा है। टेक्सास में रह रहे उनके भाई एडुआर्डो बोल्सोनारो से मुलाकात की संभावना जताई गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने वीजा जारी करने की पुष्टि की है।
फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के पुत्र हैं। जायर बोल्सोनारो २०२२ के चुनाव हारने के बाद कथित तख्तापलट के प्रयास के मामले में २७ साल की सजा काट रहे हैं और नजरबंद हैं। फ्लावियो खुद भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स से जुड़े मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बिना ठोस सबूत के ब्राजील चुनाव को “धांधली वाली” बताया था। लूला ट्रंप के आलोचक माने जाते हैं।
यह घटना ब्राजील की राजनीति में तनाव बढ़ा रही है। जांच एजेंसियां सक्रिय बताई जा रही हैं। फ्लावियो के अमेरिका पहुंचने के बाद आगे क्या रुख अपनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। ब्राजील की लोकतांत्रिक संस्थाएं और न्यायिक प्रक्रिया अब परीक्षा की घड़ी में हैं।
Sajjadali Nayani ✍
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