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Saturday, 31 October 2026

इजरायल में सत्ता का गणित बिगड़ा - नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग, पोस्टरों पर नारा - "अरब और यहूदी साथ होंगे, तभी जीतेंगे"

इजरायल में सत्ता का गणित बिगड़ा - नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग, पोस्टरों पर नारा - "अरब और यहूदी साथ होंगे, तभी जीतेंगे"
-Friday World Oct 31,2026 
तेल अवीव / यरुशलम - इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनावों के बाद सियासी भूचाल आ गया है।

कोई भी गुट बहुमत हासिल नहीं कर पाया और पहली बार अरब पार्टियां किंगमेकर बनकर उभरी हैं। इसी बीच तेल अवीव, यरुशलम और हाइफा की सड़कों पर सैकड़ों लोग उतर आए हैं, जो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इस्तीफे और यहूदी-अरब संयुक्त सरकार की मांग कर रहे हैं। हाथों में पोस्टर हैं जिन पर लिखा है - "Arab, Jewish, we will win together" और "अरब और यहूदी साथ होंगे, तभी जीतेंगे।"

#चुनावी नतीजे - नेतन्याहू का ब्लॉक बहुमत से 8 सीट दूर

इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा जारी फाइनल नतीजों के मुताबिक 120 सीटों वाली नेसेट (संसद) का गणित इस प्रकार है:

नेतन्याहू का दक्षिणपंथी ब्लॉक - 53 सीटें:* इसमें लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलीं, जो पिछली बार 32 थीं। शास को 6, ओत्जमा येहुदित को 7, यूनाइटेड टोरा यहूदी धर्म को 7 और रिलिजियस जियोनिज्म को 6 सीटें मिलीं। यह ब्लॉक 68 से सीधे 53 पर आ गया।

विपक्षी बदलाव ब्लॉक - 48 सीटें: पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट की यशर पार्टी को 21, नफ्ताली बेनेट की बायाचड को 12, यायर गोलन की डेमोक्रेट्स को 8 और अविग्दोर लिबरमैन की यिस्राएल बेइतेनू को 7 सीटें मिलीं।
-अरब पार्टियां - 19 सीटें: जॉइंट लिस्ट को 11 और मंसूर अब्बास की राम (Ra'am) पार्टी को 8 सीटें मिलीं। 2022 में इन दोनों के पास कुल 10 सीटें थीं, अब 19 हो गई हैं। यह ऐतिहासिक उछाल है।

सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है, जो किसी के पास नहीं है। वोटिंग 77.9% रही, जो 1999 के बाद सबसे ज्यादा है।

#सड़कों पर क्यों उतरे लोग?

28 अक्टूबर की शाम मेसिला पार्क तेल अवीव से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 की सुरक्षा विफलता, भ्रष्टाचार के केस और अब अल्पमत में होने के बाद भी कुर्सी नहीं छोड़ी।

#प्रदर्शन में शामिल एक युवती ने कहा, "हम सड़कों पर इसलिए हैं ताकि कह सकें - YES to a joint #Jewish-Palestinian government!"

#विपक्षी नेता यायर गोलन ने खुलकर अरब पार्टियों के साथ साझेदारी का आह्वान किया है। गोलन ने गादी आइजनकोट, मंसूर अब्बास और यायर लैपिड के साथ सरकार गठन पर बैठकें भी की हैं।

#गणितीय रूप से अगर आइजनकोट का 48 सीटों वाला ब्लॉक और अरब पार्टियों की 19 सीटें मिल जाएं तो 67 सीटें हो जाती हैं, जो बहुमत से 6 ज्यादा है।

#नेतन्याहू का जवाब - "#अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाना मना है"

नेतन्याहू ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने X पर एक वीडियो शेयर कर कहा, "It is forbidden to form a government with them"।

लिकुड पार्टी ने बिना सबूत के आरोप लगाया है कि अरब पार्टियों ने विदेशी मदद से चुनाव चुराया है। चुनाव आयोग के प्रमुख जस्टिस नोआम सोलबर्ग ने कहा है कि विदेशी हस्तक्षेप की "गंभीर आशंका" की शिकायतें आई हैं, लेकिन अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है।

नेतन्याहू ने अपने सहयोगी बेन-गवीर से भी मुलाकात की है ताकि अरब समर्थित वैकल्पिक सरकार को रोका जा सके। वहीं लैपिड ने कहा, "नेतन्याहू को 53 सीटें मिली हैं, यह एक क्रैश है। इसमें से भी 13 सीटें उन पार्टियों की हैं जो खुद को जियोनिस्ट नहीं मानतीं, तो उसके पास बचे सिर्फ 40। उसके पास सरकार बनाने का कोई रास्ता नहीं है।"

आगे क्या होगा? इजरायल के पास 4 विकल्प

 1. अरब समर्थन से विपक्षी सरकार: आइजनकोट के नेतृत्व में 48+19=67 की सरकार। यह सबसे आसान गणित है लेकिन नफ्ताली बेनेट और लिबरमैन जैसी पार्टियां अरब पार्टियों पर निर्भर सरकार को मानने को तैयार नहीं हैं।

 2. अल्पमत सरकार: आइजनकोट की सरकार बाहर से अरब पार्टियों के समर्थन से चले। मंसूर अब्बास ने चैनल 12 को बताया कि इसकी संभावना बहुत कम है।

 3. एकता सरकार: लिकुड और विपक्ष मिलकर सरकार बनाएं। लेकिन 7 अक्टूबर और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर दोनों के बीच गहरी खाई है।

 4. फिर से चुनाव: अगर राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग द्वारा नियुक्त उम्मीदवार 28+14 दिन में सरकार नहीं बना पाया, तो इजरायल 2027 की शुरुआत में फिर से चुनाव में जाएगा।

नई नेसेट 10 नवंबर को शपथ लेगी और 4 नवंबर तक चुनाव परिणामों का प्रमाणीकरण होना है। उससे पहले विपक्ष और अरब पार्टियां मिलकर स्पीकर का चुनाव जीत सकती हैं, जिससे संसदीय एजेंडा उनके हाथ में आ जाएगा।

इजरायल के इतिहास में सिर्फ एक बार 2021 में राम पार्टी सरकार का हिस्सा बनी थी, जो एक साल में ही गिर गई थी। इस बार अरब मतदाताओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट देकर साफ कर दिया है कि वे सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक बनना चाहते हैं।

नारा अब सिर्फ पोस्टरों पर नहीं, बल्कि नेसेट के गलियारों में भी गूंज रहा है - अरब और यहूदी साथ होंगे, तभी जीतेंगे।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 31,2026 

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