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Thursday, 22 October 2026

मुकाफ़ात-ए-अमल! कभी ईदी अमीन की सेना का सबसे ताकतवर जनरल, आज झोपड़ी में अकेला और बेबस - वक्त से बड़ा कोई नहीं!

मुकाफ़ात-ए-अमल! कभी ईदी अमीन की सेना का सबसे ताकतवर जनरल, आज झोपड़ी में अकेला और बेबस - वक्त से बड़ा कोई नहीं!
-Friday World Oct 23,2026
कम्पाला: ये दो तस्वीरें एक ही इंसान की हैं, लेकिन इनमें जमीन-आसमान का फर्क है। एक तस्वीर में वर्दी पर सितारे चमक रहे हैं, माइक के सामने हुक्म चल रहा है, और दूसरी तस्वीर में वही इंसान फटे कपड़ों में, हड्डियों का ढांचा बनकर मिट्टी की झोपड़ी में बैठा है।

ये हैं युगांडा के पूर्व आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल यूसुफ गोवोन, जो 70 के दशक में तानाशाह ईदी अमीन के सबसे करीबी और सबसे ताकतवर जनरल माने जाते थे।

मकौन थे यूसुफ गोवोन?

1970 के दशक में जब ईदी अमीन ने युगांडा में अपनी क्रूर हुकूमत कायम की थी, तो यूसुफ गोवोन उसकी सेना के प्रमुख थे। कहा जाता है कि उस दौर में उनके एक इशारे पर हजारों लोगों की किस्मत तय होती थी। सत्ता, दौलत, शोहरत सब उनके कदमों में थी। वे खुद को अजेय समझते थे। ईदी अमीन के शासन में हुए कई बड़े फैसलों में उनका नाम आता है।

लेकिन वक्त ने पलटी मारी। 1979 में जब ईदी अमीन का तख्तापलट हुआ, तो उसकी पूरी सल्तनत बिखर गई। उसके वफादार जनरल या तो मारे गए, या जेल गए, या फिर गुमनामी में खो गए। यूसुफ गोवोन भी उसी गुमनामी के अंधेरे में चले गए।

तस्वीर देखिए और फैसला कीजिए

आज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। 80-90 साल के बुजुर्ग गोवोन की हालत देखकर हर कोई कह रहा है - ये है मुकाफ़ात-ए-अमल।

कभी जो जनरल बड़े-बड़े महलों में रहता था, आज एक टूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर है। कभी जिसके आगे-पीछे गार्ड चलते थे, आज उसके पास कोई पूछने वाला भी नहीं है। शरीर सूखकर कांटा हो गया है, आंखें धंस गई हैं।

यह तस्वीर सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए सबक है जो सत्ता के नशे में इंसानियत भूल जाता है।

बद्द दुःआ से कोई नहीं बच सकता

लोगों का मानना है कि सत्ता में रहते हुए किए गए जुल्मों की बद्दुआ कभी पीछा नहीं छोड़ती। कुरान में भी कहा गया है, हर ऊँचाई के बाद ढलान है। आज ताकत आपके हाथ में है, तो कल हालात किसी और के पक्ष में हो सकते हैं।

यूसुफ गोवोन की यह कहानी हमें सिखाती है कि घमंड, जुल्म और ताकत का नशा हमेशा के लिए नहीं रहता। इतिहास का पहिया घूमते देर नहीं लगती।

इसलिए कहा गया है - ज्यादा घमंड ठीक नहीं। विनम्र रहिए, क्योंकि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 23,2026

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