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Saturday, 17 October 2026

ट्रम्प का ऐतिहासिक :पीछेहठ रूसशिया पर प्रतिबंध ढीले, अमेरिका में डीजल महंगाई से जनता बेहाल

ट्रम्प का ऐतिहासिक पीछेहठ: रूसशिया पर प्रतिबंध ढीले, अमेरिका में डीजल महंगाई से जनता बेहाल
-Friday World Oct 18,2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसशिया पर लगाए गए कई प्रतिबंधों को हल्का करने का बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। गत दिन ट्रम्प ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर रूसशिया से जुड़े कई आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त या शिथिल करने का आदेश दिया। इस फैसले को लगभग सभी प्रमुख देशों ने स्वागत योग्य बताया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रियेव ने इसे “ऐतिहासिक क्षण” करार दिया है। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी और आपसी विश्वास भी बढ़ेगा।

#महंगाई का दबाव और मध्यावधि चुनाव का डर

अमेरिका में डीजल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सितंबर में गैलन प्रति डीजल की कीमत 6.5 डॉलर तक पहुंच गई थी। अक्टूबर में थोड़ी राहत के साथ शुक्रवार को यह 6.28 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई। फिर भी आम अमेरिकी नागरिक महंगाई की मार झेल रहे हैं। ऊर्जा कीमतों में यह उछाल ट्रम्प प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। जानकारों का मानना है कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव (मिड-टर्म पोल) को ध्यान में रखते हुए ट्रम्प ने यह कदम उठाया है। जनता में बढ़ते आक्रोश को कम करने के लिए प्रतिबंधों में नरमी अपरिहार्य हो गई थी।

युक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने रूसी सामानों पर भारी टैरिफ लगाए थे। साथ ही रूसशिया से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी भी दी गई थी। इससे भारत जैसे देशों के निर्यात पर असर पड़ा और अमेरिकी बाजार में कीमतें दोगुनी हो गईं। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका के अपने व्यापार और उद्योग को भी नुकसान पहुंचा। जब अमेरिका को खुद डीजल की जरूरत पड़ी तो रूसशिया से खरीदना पड़ा। ऐसी स्थिति में प्रतिबंधों को हल्का करना और रूसशिया के साथ सहयोग भरा रवैया अपनाना मजबूरी बन गया।

#जेलेंस्की पर सीधा प्रहार

ट्रम्प प्रशासन ने अब युक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की खुलेआम आलोचना शुरू कर दी है। यह बदलाव स्पष्ट संकेत देता है कि व्हाइट हाउस अब युक्रेन संकट को लेकर अपनी पुरानी कठोर नीति से पीछे हट रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी कांग्रेस में ऐसा विधेयक भी पास हुआ था जिसमें रूसशिया से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का सुझाव दिया गया था। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले पांच देशों में भारत भी शामिल है। ट्रम्प का ताजा फैसला इन सब दबावों का नतीजा लगता है।

दिमित्रियेव ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में 2026 के “ग्राहम रूसशिया-ईरान एक्ट” से कुछ धाराओं को हटाने के ट्रम्प प्रशासन के फैसले की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए नई शुरुआत साबित हो सकता है। रूसी पक्ष इस कदम को आपसी सहयोग बढ़ाने का सुनहरा अवसर मान रहा है।

#वैश्विक प्रतिक्रिया और भारत का हित

दुनिया भर के कई देशों ने ट्रम्प के इस फैसले का स्वागत किया है। ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत के लिए भी यह खबर राहत भरी है क्योंकि रूसशिया से सस्ता तेल खरीदने पर अमेरिकी दबाव कम होने की संभावना बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रतिबंध और ढीले होते रहे तो वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे विकासशील देशों को फायदा होगा।

ट्रम्प के पास शायद ही कोई और विकल्प बचा था। महंगाई का सीधा असर नवंबर की चुनावी नतीजों पर पड़ना तय था। अमेरिकी कांग्रेस भी अब इस हकीकत को समझने लगी है कि लंबे समय तक सख्त प्रतिबंध जारी रखना खुद अमेरिका के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा था। डीजल की ऊंची कीमतें न सिर्फ आम नागरिकों को परेशान कर रही थीं बल्कि ट्रक परिवहन, कृषि और उद्योग पर भी भारी बोझ डाल रही थीं।

यह फैसला सिर्फ ऊर्जा संकट का हल नहीं है। यह अमेरिका-रूस संबंधों में संभावित नरमी का संकेत भी है। दोनों देश आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि युक्रेन युद्ध अभी भी जारी है और कई जटिलताएं बाकी हैं। फिर भी ट्रम्प का यह कदम वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बनाने वाला साबित हो सकता है।

अमेरिकी जनता की जेब पर महंगाई का बोझ कम करने और चुनावी गणित संभालने के लिए ट्रम्प ने जो कदम उठाया है, उसे कई विश्लेषक व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रतिबंधों में और कितनी नरमी आती है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर क्या पड़ता है। फिलहाल तो ट्रम्प का यह फैसला ऊर्जा संकट से जूझ रहे अमेरिका के लिए राहत का संदेश लेकर आया है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 18,2026

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