-Friday World Oct 22,2026
नई दिल्ली: देश के लोकतांत्रिक ढांचे में एक बड़ा संवैधानिक टकराव देखने को मिल सकता है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने साफ कर दिया है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष कोई नया महाभियोग प्रस्ताव लाता है, तो उसकी जांच पूरी तरह से नियमों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब INDIA ब्लॉक ने CEC के खिलाफ महाभियोग लाने की संभावना जताई है।
विपक्ष क्यों मांग रहा है इस्तीफा? SIR बना वजह
पिछले दो हफ्तों से देश के अलग-अलग हिस्सों में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान भारी अनियमितताएं बरती गईं।
विपक्ष का दावा है कि SIR के नाम पर लाखों वोटरों के नाम काटे गए, कई जगहों पर फर्जी वोट जोड़े गए और चुनाव आयोग ने सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम किया। इसी को लेकर वे CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दो बार फेल हुआ हटाने का प्रयास, तीसरी तैयारी में विपक्ष
यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष CEC को हटाने की कोशिश कर रहा है।
- पहली कोशिश - 12 मार्च: लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ महाभियोग का नोटिस दिया गया था, जिसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने खारिज कर दिया था।
- दूसरी कोशिश: दूसरी बार दिया गया नोटिस अभी भी राज्यसभा में पेंडिंग है, यानी लंबित पड़ा है।
अब INDIA ब्लॉक तीसरी बार महाभियोग लाने की तैयारी में है। इसी सवाल पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा, "अगर कोई नई नोटिस आएगी, तो हम नियमों और प्रक्रियाओं के तहत उसे देखेंगे और उसकी जांच करेंगे। प्रक्रिया एकदम स्पष्ट है।"
CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
बहुत से लोगों को लगता है कि CEC को सरकार आसानी से हटा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। संविधान के मुताबिक, CEC को हटाना उतना ही मुश्किल है जितना सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाना।
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के अनुसार:
1. CEC को सिर्फ संसद ही हटा सकती है।
2. इसके लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव पास होना जरूरी है।
3. प्रस्ताव को सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित होकर वोट करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पास होना चाहिए।
4. आधार सिर्फ दो हो सकते हैं - 'साबित हुई कदाचार' (Proved Misbehaviour) या 'अक्षमता' (Incapacity)।
तीन सदस्यों की जांच समिति बनेगी
जज (जांच) अधिनियम, 1968 के मुताबिक, अगर संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा के सभापति तीन सदस्यों की समिति बनाएंगे।
इस समिति में होंगे:
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या सुप्रीम कोर्ट के कोई जज
- देश के 25 हाईकोर्ट में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश
- एक प्रख्यात कानूनविद्
यह समिति सभी आरोपों की जांच करेगी। अगर समिति कहती है कि कदाचार साबित नहीं हुआ, तो प्रस्ताव वहीं खत्म हो जाएगा। अगर कदाचार साबित होता है, तो संसद के दोनों सदन उसी सत्र में राष्ट्रपति को प्रस्ताव भेजेंगे और राष्ट्रपति के आदेश से CEC को हटाया जाएगा।
स्पीकर ने यह भी याद दिलाया कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था, लेकिन अभी तक सत्रावसान (Prorogation) नहीं हुआ है। इसलिए पुराने नोटिस पर अभी भी चर्चा संभव है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष जरूरी बहुमत जुटा पाता है या यह महाभियोग भी सिर्फ एक राजनीतिक दबाव बनकर रह जाएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 22,2026
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