-Friday World Nov 6,2020
कर्नाटक से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने देशभर के वाहन मालिकों को चौंका दिया है। सरकार की ही जांच में दावा किया गया है कि पेट्रोल में तय सीमा से कहीं ज्यादा इथेनॉल मिलाया जा रहा है। नियम के मुताबिक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलना चाहिए, जिसे E20 कहा जाता है। लेकिन जांच में कई जगहों पर यह मात्रा 20% से ज्यादा मिली है।
7 जिलों से लिए गए 63 सैंपल
कर्नाटक सरकार ने करीब 7 जिलों से पेट्रोल के कुल 63 सैंपल इकट्ठा किए। इनमें बेंगलुरु भी शामिल था। इन सैंपलों को प्राइवेट लैब में जांच के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद हड़कंप मच गया। दावा है कि ज्यादातर सैंपलों में इथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा पाई गई।
इनमें IOCL, HPCL, BPCL, Shell और Nayara जैसी बड़ी ऑयल कंपनियों के पेट्रोल पंपों के सैंपल शामिल थे।
IOCL के सैंपल में तो हद ही हो गई!
सबसे चौंकाने वाला दावा IOCL के सैंपल को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक एक सैंपल में 31.2% तक इथेनॉल मिला। यानी तय सीमा से 11.2% ज्यादा। अगर यह सच है तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि लाखों वाहन मालिकों के साथ धोखा भी है।
कर्नाटक सरकार ने केंद्र को घेरा
इस रिपोर्ट के बाद कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। सरकार की 3 बड़ी मांगें हैं:
1. ओवर-ब्लेंडिंग पर कार्रवाई हो: जो कंपनियां ज्यादा इथेनॉल मिला रही हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
2. नुकसान की भरपाई हो: अगर किसी की गाड़ी को नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई की जाए।
3. हर पंप पर डिस्प्ले लगे: हर पेट्रोल पंप पर साफ-साफ लिखा हो कि यहां के पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल है। ग्राहक को पता तो चले कि वो क्या डलवा रहा है।
कर्नाटक सरकार ने कहा है कि ऑयल कंपनियों की तरफ से इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ रही है। सरकार अब अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपने का फैसला कर चुकी है।
आम आदमी को क्या नुकसान?
सवाल यह है कि ज्यादा इथेनॉल से आपकी गाड़ी को क्या नुकसान हो सकता है?
पुरानी गाड़ियां, जो E20 के हिसाब से नहीं बनी हैं, उनमें ज्यादा इथेनॉल से कई दिक्कतें आ सकती हैं। जैसे माइलेज कम होना, इंजन में जंग लगना, रबर पाइप और फ्यूल पंप खराब होना, स्टार्टिंग में दिक्कत और इंजन की लाइफ कम होना। बाइक मालिकों को तो यह समस्या और ज्यादा महसूस हो रही है।
लोगों का कहना है कि E20 आने के बाद से उनकी गाड़ी का माइलेज गिर गया है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है। अब 31.2% का दावा सुनकर तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
इथेनॉल है क्या?
इथेनॉल गन्ने, मक्का जैसे फसलों से बनने वाला एक तरह का अल्कोहल है। सरकार इसे पेट्रोल में मिलाकर विदेश से आने वाले महंगे कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है। इससे किसानों को भी फायदा होता है और प्रदूषण भी कम होता है। यह सोच अच्छी है, लेकिन अगर ब्लेंडिंग तय सीमा से ज्यादा हो जाए तो यह फायदा नुकसान में बदल जाता है।
अब आगे क्या?
अब सबकी नजर केंद्र सरकार और ऑयल कंपनियों के जवाब पर है। क्या कंपनियां इस रिपोर्ट को मानेंगी? क्या जांच दोबारा होगी? क्या हर पंप पर इथेनॉल की मात्रा वाला बोर्ड लगेगा?
एक बात तो साफ है, ग्राहक को पारदर्शिता चाहिए। पैसा ग्राहक का है, गाड़ी ग्राहक की है, तो उसे यह जानने का पूरा हक है कि टंकी में क्या डाला जा रहा है।
जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इस रिपोर्ट को एक गंभीर दावा मानकर जांच की मांग करना ही सही तरीका है।
Sajjadali Nayani ✍️
Friday World Nov 6,2020
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