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November 04, 2026
नेतन्याहू का खेल खत्म! इजरायल के विपक्ष ने जनरल आइजेनकोट के नाम पर लगाई मुहर, 61 का जादुई आंकड़ा ही तय करेगा नया Pm
नेतन्याहू का खेल खत्म! इजरायल के विपक्ष ने जनरल आइजेनकोट के नाम पर लगाई मुहर, 61 का जादुई आंकड़ा ही तय करेगा नया Pm
-Friday World Nov 4,2026
येरुशलम। इजरायल की राजनीति में एक बड़ा भूकंप आ गया है। सालों से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को हटाने के लिए इजरायल का पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है।
इजरायल के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट का समर्थन करने पर सहमति जता दी है। विपक्षी नेताओं ने आइजेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाने और उनके नेतृत्व में नई सरकार के गठन का समर्थन करने का निर्णय लिया है।
यह फैसला सिर्फ एक राजनीतिक चाल नहीं है, यह नेतन्याहू के 17 साल के शासन के खिलाफ सबसे बड़ी बगावत है। अगर यह योजना कामयाब हो गई, तो इजरायल को एक नया प्रधानमंत्री मिलेगा - एक ऐसा PM जो नेता नहीं, जनरल है।
कौन हैं #गादी आइजेनकोट?
गादी आइजेनकोट कोई साधारण नेता नहीं हैं। वो इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख हैं। उन्होंने इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में सेवाएं दी हैं। यानी वो वो आदमी हैं, जिनके एक इशारे पर इजरायल की पूरी सेना चलती थी।
आइजेनकोट 2015 से 2019 तक इजरायल डिफेंस फोर्सेज के 21वें चीफ ऑफ स्टाफ रहे। उनके कार्यकाल में इजरायल ने सीरिया, लेबनान, गाजा में कई बड़े ऑपरेशन किए। उन्हें इजरायल का सबसे सफल और सबसे शांत दिमाग वाला जनरल माना जाता है।
सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वो पहले बेनी गैंट्ज की पार्टी नेशनल यूनिटी में शामिल हुए। बाद में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। अब वो इजरायल की राजनीति में एक साफ-सुथरी छवि वाले नेता के तौर पर जाने जाते हैं।
इजरायल के लोग उन्हें कहते हैं - “जनरल जो झूठ नहीं बोलता।”
आइजेनकोट का एक व्यक्तिगत दर्द भी है, जिसने उन्हें पूरे इजरायल का हीरो बना दिया। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में उनके बेटे गाल आइजेनकोट की मौत हो गई थी। गाल भी इजरायली सेना में मेजर था। अपने बेटे को खोने के बाद भी आइजेनकोट ने देश को नहीं छोड़ा, वो युद्ध कैबिनेट में बैठे रहे। इजरायल के लोग इस बलिदान को कभी नहीं भूल सकते।
#विपक्ष क्यों एकजुट हुआ?
इजरायल में विपक्ष लंबे समय से बंटा हुआ था। हर नेता खुद PM बनना चाहता था। कोई कहता था मैं बनूंगा, कोई कहता था मैं बनूंगा। इसी फूट का फायदा नेतन्याहू उठाते रहे।
लेकिन इस बार विपक्ष ने एक बड़ी समझदारी दिखाई है। सभी नेताओं ने कहा - पहले नेतन्याहू को हटाओ, PM बाद में तय करेंगे। और PM के लिए सबसे अच्छा नाम है - आइजेनकोट।
क्यों आइजेनकोट? इसके 4 बड़े कारण हैं।
1. सबको स्वीकार्य चेहरा
आइजेनकोट ना तो ज्यादा वामपंथी हैं, ना ज्यादा दक्षिणपंथी। वो बीच के आदमी हैं। वामपंथी उन्हें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वो शांति की बात करते हैं। दक्षिणपंथी उन्हें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वो सेना के जनरल हैं, सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे।
2. भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं
नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के कई मुकदमे चल रहे हैं। विपक्ष के कई नेताओं पर भी आरोप हैं। लेकिन आइजेनकोट पर एक भी आरोप नहीं है। उनकी छवि बिल्कुल साफ है।
3. सेना का भरोसा
इजरायल एक ऐसा देश है, जहां सेना सबसे ज्यादा भरोसेमंद संस्था है। जब देश युद्ध में हो, तो लोग जनरल पर ज्यादा भरोसा करते हैं, नेता पर कम। आइजेनकोट को सेना का पूरा समर्थन है।
4. अमेरिका का भरोसा
अमेरिका भी आइजेनकोट को पसंद करता है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि आइजेनकोट के आने से इजरायल-अमेरिका रिश्ते और मजबूत होंगे, और मिडिल ईस्ट में शांति की संभावना बढ़ेगी।
#नेसेट का गणित: 61 का जादुई आंकड़ा
इजरायल में प्रधानमंत्री बनने के लिए नेसेट, यानी देश की संसद में आवश्यक राजनीतिक समर्थन हासिल करना होता है। इजरायली संसद में कुल 120 सदस्य होते हैं और सामान्यत: सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
यही 61 का आंकड़ा अब इजरायल की राजनीति का सबसे बड़ा खेल बन गया है।
अभी नेतन्याहू की सरकार के पास 64 सांसदों का समर्थन है। विपक्ष के पास 56 सांसद हैं। विपक्ष को सरकार बनाने के लिए 5 और सांसदों की जरूरत है।
विपक्ष की रणनीति है - नेतन्याहू की सरकार में जो छोटे दल नाराज हैं, उन्हें तोड़ो। कुछ धार्मिक दल, जो नेतन्याहू से नाराज हैं, उन्हें आइजेनकोट के साथ लाओ। अगर 5 सांसद भी पलट गए, तो नेतन्याहू की सरकार गिर जाएगी।
विपक्षी नेताओं ने आइजेनकोट से कहा है - आप आगे बढ़ो, हम आपके पीछे हैं। हम 61 का आंकड़ा जुटाएंगे।
#नेतन्याहू की बेचैनी
नेतन्याहू इस खबर से बेहद बेचैन हैं। नेतन्याहू 17 साल से इजरायल के PM हैं। वो इजरायल के सबसे लंबे समय तक रहने वाले PM हैं। उन्होंने कई बार हार के मुंह से जीत छीनी है।
लेकिन इस बार चुनौती अलग है। इस बार उनके सामने कोई नेता नहीं, एक जनरल खड़ा है। नेतन्याहू ने हमेशा खुद को “मिस्टर सिक्योरिटी” कहा है। अब उनके सामने एक असली जनरल आ गया है, जो सुरक्षा के मामले में उनसे भी बड़ा है।
नेतन्याहू के करीबी लोगों का कहना है कि नेतन्याहू ने अपने मंत्रियों से कहा है - आइजेनकोट को किसी भी हालत में PM नहीं बनने देना है। वो आइजेनकोट के खिलाफ अभियान शुरू करने वाले हैं।
नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने कहा है - आइजेनकोट के पास राजनीतिक अनुभव नहीं है। वो देश नहीं चला सकते। वो सिर्फ सेना चला सकते हैं।
लेकिन इजरायल की जनता अब इस बात से थक चुकी है। जनता कह रही है - हमें नेता नहीं, ईमानदार आदमी चाहिए।
#इजरायल की जनता क्या चाहती है?
इजरायल में पिछले 2 साल से लगातार युद्ध चल रहा है। गाजा युद्ध, लेबनान युद्ध, ईरान के साथ तनाव - इजरायल के लोगों ने 2 साल में वो देखा है, जो उन्होंने पिछले 20 साल में नहीं देखा।
लोग थक चुके हैं। हर परिवार से कोई न कोई सेना में है। हर दिन किसी न किसी के मरने की खबर आती है। महंगाई बढ़ गई है। लोगों को लग रहा है कि नेतन्याहू युद्ध को इसलिए लंबा खींच रहे हैं, ताकि वो सत्ता में बने रहें। अगर युद्ध खत्म हो गया, तो उन्हें भ्रष्टाचार के मुकदमों का सामना करना पड़ेगा, और चुनाव हारना पड़ेगा।
ताजा सर्वे में 62% इजरायली लोगों ने कहा कि वो नेतन्याहू को बदलना चाहते हैं। 58% लोगों ने कहा कि आइजेनकोट एक अच्छे PM हो सकते हैं।
इजरायल की सड़कों पर अब पोस्टर लगने लगे हैं - “जनरल को लाओ, देश को बचाओ।”
#अगर आइजेनकोट PM बने, तो क्या बदलेगा?
1. गाजा युद्ध पर नया रुख
आइजेनकोट गाजा में बंधकों को वापस लाने को सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि नेतन्याहू ने बंधकों की रिहाई में देरी की। अगर वो PM बने, तो वो सबसे पहले बंधकों के लिए समझौता करेंगे।
2. ईरान पर संतुलित नीति
आइजेनकोट ईरान को इजरायल का सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं, लेकिन वो बिना सोचे-समझे युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। वो चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और यूरोप के साथ मिलकर रणनीति बनाई जाए, अकेले युद्ध न किया जाए।
3. फिलिस्तीन से बातचीत
नेतन्याहू फिलिस्तीन से बातचीत के सख्त खिलाफ हैं। आइजेनकोट कहते हैं - हमें फिलिस्तीनियों से बात करनी होगी, वरना यह युद्ध कभी खत्म नहीं होगा।
4. अमेरिका से रिश्ते
आइजेनकोट के आने से अमेरिका-इजरायल रिश्ते और मजबूत होंगे। ट्रंप भी आइजेनकोट को पसंद करते हैं। ट्रंप ने कहा था - आइजेनकोट एक सच्चा योद्धा है।
भारत पर क्या असर?
भारत के लिए यह बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है। भारत इजरायल का सबसे बड़ा दोस्त है। भारत इजरायल से हथियार, ड्रोन, टेक्नोलॉजी खरीदता है।
नेतन्याहू और मोदी की दोस्ती दुनिया जानती है। लेकिन आइजेनकोट भी भारत के दोस्त हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि भारत इजरायल का सबसे भरोसेमंद साझेदार है।
अगर आइजेनकोट PM बनते हैं, तो भारत-इजरायल रिश्ते और भी मजबूत होंगे। खासकर रक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में।
क्या नेतन्याहू सच में हट जाएंगे?
इजरायल की राजनीति में कुछ भी निश्चित नहीं है। नेतन्याहू को “जादूगर” कहा जाता है। वो कई बार हारते-हारते जीत गए हैं।
लेकिन इस बार हवा उनके खिलाफ है। विपक्ष एकजुट है, जनता नाराज है, सेना भी नेतन्याहू से नाराज है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है - अगर विपक्ष 61 का आंकड़ा जुटा लेता है, तो नेतन्याहू को जाना ही होगा। अगर नहीं जुटा पाता, तो इजरायल में फिर चुनाव होंगे। और चुनाव में भी नेतन्याहू के हारने की संभावना ज्यादा है।
एक बात तो तय है - इजरायल में अब बदलाव की आंधी चल पड़ी है। और इस आंधी का नाम है - गादी आइजेनकोट।
नेतन्याहू ने इजरायल को बहुत कुछ दिया, लेकिन अब इजरायल को एक नया चेहरा चाहिए। एक ऐसा चेहरा जो युद्ध नहीं, शांति लाए। एक ऐसा चेहरा जो राजनीति नहीं, देश को बचाए।
और वो चेहरा आइजेनकोट का हो सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Nov 4,2026
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