एपस्टीन फाइल्स में खुलासा: अनिल अंबानी ने मांगी "लंबी सुनहरी बालों वाली आयरिश महिला" जैसी एस्कॉर्ट, लेकिन मिली "टॉल स्वीडिश ब्लॉन्ड" का ऑफर!
भारत के एक समय के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार अनिल अंबानी अब एपस्टीन फाइल्स में घिरे हुए हैं। हाल ही में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी दस्तावेजों में जेफरी एपस्टीन (जिसे यौन अपराधी और बाल यौन शोषण के दोषी के रूप में जाना जाता है) और अनिल अंबानी के बीच 2017 से 2019 तक चले मैसेज सामने आए हैं। इनमें एक चौंकाने वाला एक्सचेंज है जहां अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूछा – "Who do u suggest?" (किसे सुझाओ?)। एपस्टीन ने तुरंत जवाब दिया: "a tall swedish blonde woman, to make it fun to visit." (एक लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला, विजिट को मजेदार बनाने के लिए)। अनिल अंबानी का जवाब सिर्फ 20 सेकंड में आया: "Arrange that." (इंतजाम करो)।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यूजर ने "लंबी सुनहरे बालों वाली आयरिश महिला" का जिक्र किया है, लेकिन असली फाइल्स में "tall Swedish blonde" (लंबी स्वीडिश सुनहरी बालों वाली) का जिक्र है। शायद कोई लोकल ट्रांसलेशन या मेम में बदलाव हो गया हो, लेकिन मूल दस्तावेज स्वीडिश महिला का ही इशारा करते हैं। यह एपस्टीन की उस आदत को दर्शाता है जहां वह अमीरों के लिए महिलाओं का "इंतजाम" करता था – एक ऐसा नेटवर्क जो यौन शोषण और ट्रैफिकिंग से जुड़ा था।
अनिल अंबानी, जो कभी रिलायंस ग्रुप के बड़े चेहरे थे, आज दिवालिया होने की कगार पर हैं। उनकी कंपनियां जैसे रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंकों से हजारों करोड़ रुपये उधार लिए, लेकिन चुकाने में नाकाम रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी कंपनियों के 49,000 करोड़ रुपये के कर्ज में से एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने सिर्फ 455 करोड़ रुपये पर सेटलमेंट किया – यानी महज 0.92% चुकाकर बाकी माफ! यह "रिजॉल्यूशन" प्रक्रिया में हुआ, जहां कर्जदाता बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
कांग्रेस और कई विपक्षी नेताओं ने इसे मोदी सरकार की "क्रोनी कैपिटलिज्म" का सबूत बताया है। दावा किया जाता है कि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने में सरकार की मिलीभगत रही, जबकि किसानों और आम आदमी के लिए कोई राहत नहीं। राहुल गांधी जैसे नेताओं ने बार-बार कहा कि मोदी सरकार ने अनिल अंबानी, विजय माल्या जैसे लोगों के कर्ज माफ किए, लेकिन गरीबों को सिर्फ वादे दिए।
अब सवाल यह है – क्या यह सिर्फ बिजनेस फेलियर था, या सिस्टमेटिक लूट? एपस्टीन जैसे व्यक्ति से कनेक्शन, ट्रंप प्रशासन में कनेक्शन बनाने की कोशिशें (जैसे जared कुश्नर और स्टीव बैनन से मिलने की मांग), और मोदी सरकार के दौर में "लीडरशिप" के नाम पर बैकचैनल डिप्लोमेसी – सब कुछ मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या अनिल अंबानी ने देश के संसाधनों का दुरुपयोग कर अपनी ऐय्याशी चलाई? क्या सरकार ने जानबूझकर आंखें मूंदीं?
एपस्टीन फाइल्स में अनिल अंबानी के साथ चैट्स सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं – विश्व मामलों, इजराइल स्ट्रैटेजी, मोदी की यात्राओं पर चर्चा भी है। लेकिन सबसे गंदा हिस्सा यही "arrange that" वाला है, जो दिखाता है कि पावर और पैसा कितनी आसानी से नैतिकता को कुचल देता है।
भारतीय जनता अब जाग चुकी है। जब बैंक आम आदमी की जमा पूंजी से बड़े-बड़ों को लोन देते हैं, और फिर वह लोन माफ हो जाता है, तो सड़कों पर उतरना जरूरी हो जाता है। यह सिर्फ अनिल अंबानी की कहानी नहीं – यह क्रोनी कैपिटलिज्म, भ्रष्टाचार और आम आदमी के साथ धोखे की कहानी है।
मोदी सरकार से सवाल: एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर जांच क्यों नहीं? हजारों करोड़ माफ करने वाले को अब तक संरक्षण क्यों? जनता को जवाब चाहिए, और जवाब मिलना चाहिए – चाहे कितना भी दबाव क्यों न हो!
Sajjadali Nayani ✍
Friday world 8/2/2026