-Friday World 15th Feb 2026
कई बार जिंदगी हमें ऐसे रिश्ते देती है जो खून से नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से जुड़े होते हैं। ऐसे ही एक रिश्ते की कहानी है, जो धर्म, देश, भाषा और दूरी की सारी दीवारों को तोड़कर सिर्फ प्यार की जीत दिखाती है।
कई साल पहले की बात है। केरल की एक साधारण हिंदू महिला, जिन्हें हम यहां 'माँ' कहकर पुकारेंगे, सऊदी अरब में नौकरी करने गईं। वहां उनका काम था छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करना। घरेलू नौकरानी के रूप में काम करते हुए उन्होंने कई बच्चों को अपनी गोद में लिया, लेकिन एक बच्चा ऐसा था जिसे उन्होंने अपनी कोख से भी ज्यादा प्यार दिया। वो छोटा सा बच्चा, जिसकी मासूम आंखों में शरारत और मुस्कान थी, धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया।
वह बच्चा मुस्लिम परिवार का था। माँ उसे रोज नहलाती, खाना खिलाती, लोरी सुनाती, स्कूल के लिए तैयार करती। जब वह बीमार पड़ता, तो रात भर जागकर उसकी देखभाल करती। उसकी हर छोटी-बड़ी खुशी में शामिल होती। बच्चे के लिए वो सिर्फ 'आंटी' नहीं, बल्कि 'अम्मी' बन गई थीं। बच्चा उन्हें 'उम्मा' कहकर पुकारता, और हर बार गले लगकर कहता, "तुम मेरी असली माँ हो।"
समय बीतता गया। बच्चा बड़ा हुआ। माँ की नौकरी खत्म हुई और वे वापस केरल लौट आईं। विदाई के दिन बच्चे की आंखों में आंसू थे। उसने माँ के हाथ पकड़कर कहा था, "मैं कभी तुम्हें नहीं भूलूंगा। मैं बड़ा होकर तुमसे मिलने आऊंगा।" माँ ने मुस्कुराकर उसके माथे पर चूम लिया और कहा, "बेटा, माँ का प्यार कभी नहीं भूलता।"
साल बीतते गए। बच्चा अब जवान हो चुका था। सऊदी अरब में अपनी जिंदगी बसा चुका था, लेकिन दिल में वो पुरानी यादें जिंदा थीं। हर ईद पर, हर त्योहार पर, हर खुशी के मौके पर उसे वो केरल की महिला याद आती। वो सोचता, "क्या वो अभी भी मुझे याद करती होंगी? क्या वो मुझे पहचानेंगी?"
उसने फैसला किया। महीनों तक उसने पता लगाया। पुराने नंबर, पुराने पते, सोशल मीडिया, रिश्तेदारों से बातें—सब कुछ करके आखिरकार उस माँ का पता लगा लिया। फिर बिना किसी को बताए उसने फ्लाइट बुक की। सऊदी से भारत की उड़ान। दिल में एक अजीब सी घबराहट थी। क्या माँ अब भी वही होंगी? क्या वो पुराना प्यार अब भी जिंदा होगा? या समय ने सब कुछ बदल दिया होगा?
केरल पहुंचते ही वो सीधा उस गांव की ओर निकल पड़ा। छोटा सा घर, वही पुरानी दीवारें, वही आंगन जहां कभी वो खेलता था। दरवाजे पर खड़ा होकर उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। हाथ कांप रहे थे। उसने धीरे से दरवाजा खटखटाया।
दरवाजा खुला। सामने वही चेहरा—बूढ़ा हो चुका, लेकिन वही मुस्कान, वही आंखें। माँ ने उसे देखा। एक पल को सन्न रह गईं। फिर उनकी आंखें भर आईं। "बेटा...?" उनकी आवाज कांप रही थी। वो दौड़कर आगे बढ़ा। माँ ने हाथ फैलाए। वो गले लग गया। जैसे बचपन में लगता था, वैसे ही। माँ रो पड़ीं। उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, "मेरा बेटा... मेरा राजा बेटा आ गया!"
बेटा भी रो पड़ा। उसने माँ के पैर छुए, माथा टेक दिया। "माँ, मैं वादा करके आया था। मैं तुम्हें कभी नहीं भूला।"
उस पल में न कोई हिंदू था, न मुस्लिम। न सऊदी था, न भारतीय। सिर्फ एक माँ थी और उसका बेटा। धर्म की दीवारें गायब हो गईं। देश की सीमाएं मिट गईं। सिर्फ प्यार बाकी था—वो प्यार जो सालों तक दबा रहा, लेकिन कभी मरा नहीं।
माँ ने उसे घर के अंदर बिठाया। पुरानी यादें ताजा हो गईं। वो पुरानी तस्वीरें निकालीं, जिसमें छोटा सा बच्चा उनकी गोद में मुस्कुरा रहा था। दोनों ने घंटों बातें कीं। हंसे, रोए, एक-दूसरे को गले लगाया। पड़ोसी आए, सबकी आंखें नम हो गईं।
यह कहानी सिर्फ एक मुलाकात की नहीं है। यह उस एहसान की है जो कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह उस प्यार की है जो सीमाओं से परे है। यह बताती है कि इंसानियत जिंदा है। जब दिल से दिल जुड़ता है, तो न कोई मजहब रोक सकता है, न कोई दूरी।
क्या आपने भी कभी किसी की इतनी बड़ी मेहरबानी को याद रखा है? क्या आपके जीवन में भी ऐसा कोई रिश्ता है जो खून का नहीं, लेकिन दिल का है? क्या आपने कभी किसी के लिए इतनी दूरियां तय की हैं?
यह कहानी हमें याद दिलाती है—प्यार कभी पुराना नहीं होता। वह बस इंतजार करता है। और जब वो पल आता है, तो सारी दुनिया रुक जाती है। सिर्फ दो दिल धड़कते रहते हैं—एक माँ का और एक बेटे का।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 15th Feb 2026