-फ्राइडे वर्ल्ड 4/2/2026
अमेरिका ईरान पर हमला क्यों नहीं कर रहा? होर्मुज का ताला और विश्व की आर्थिक तबाही"
मध्य पूर्व की राजनीति में आज एक अजीब स्थिति है – अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है, लेकिन ईरान जैसे देश पर अब तक पूर्ण पैमाने पर सीधा हमला नहीं किया गया। भले ही ट्रंप प्रशासन ने धमकियां दी हों, भले ही जून 2025 में इजराइल के साथ मिलकर ईरान की न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नतांज और इस्फहान) पर हमले किए गए हों (ऑपरेशन मिडनाइट हैमर), लेकिन पूर्ण युद्ध अभी तक टाला जा रहा है। इसका मुख्य कारण है ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता और उसके परिणामों का डर।
ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और असिमेट्रिक युद्ध की मजबूत क्षमता है।
अमेरिका के मध्य पूर्व में 8-10 प्रमुख बेस हैं – जैसे कतर का अल उदैद एयर बेस (सबसे बड़ा, 10,000+ अमेरिकी सैनिक), बहरीन में नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय), जॉर्डन का मुवाफ्फक सल्ती, कुवैत और सऊदी अरब में अन्य बेस। जून 2025 में ईरान ने अल उदैद पर मिसाइल हमला किया था – हालांकि बड़े नुकसान नहीं हुए, लेकिन यह दिखाता है कि ईरान की पहुंच है और वह जवाब दे सकता है।
ईरान के IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के अधिकारी कहते हैं कि अमेरिका के ये बेस "शक्ति नहीं, बल्कि सबसे बड़ी कमजोरी" हैं। अगर अमेरिका हमला करे तो ईरान इन बेस पर मिसाइल-ड्रोन हमले कर सकता है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की जान खतरे में पड़ सकती है। यह डर अमेरिका को पूर्ण युद्ध से रोकता है – क्योंकि युद्ध शुरू हुआ तो यह "क्षेत्रीय युद्ध" में बदल जाएगा, जिसमें इजराइल, हिज्बुल्लाह, हूती और अन्य प्रॉक्सी ग्रुप शामिल हो जाएंगे। लेकिन सबसे बड़ा डर है
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।
यह संकरी चैनल दुनिया के 20% तेल और बड़े हिस्से के LNG से गुजरती है। ईरान इसे "बंद" कर सकता है – माइंस, स्पीडबोट्स, सबमरीन्स और क्रूज मिसाइलों से। पूर्ण ब्लॉकेज न हो तो भी कुछ हमलों से शिपिंग रुक सकती है, इंश्योरेंस रेट्स बढ़ सकते हैं और तेल के दाम $10-20 प्रति बैरल तक उछल सकते हैं। विश्व स्तर पर महंगाई, मंदी और आर्थिक हाहाकार मच सकता है। चीन, भारत, जापान जैसे देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उनका बड़ा तेल इसी रूट से आता है।
यमन के लाल सागर में हूतियों ने पहले ही शिपिंग पर हमले किए हैं – जिससे रूट बदलने पड़े और खर्च बढ़ा।
अगर होर्मुज बंद हुआ तो यह समस्या वैश्विक स्तर पर पहुंच जाएगी। सऊदी अरब, UAE जैसे देश भी प्रभावित होंगे, क्योंकि उनका तेल एक्सपोर्ट इसी रूट पर निर्भर है। इजराइल के अस्तित्व पर भी खतरा बढ़ेगा। ईरान के प्रॉक्सी (हिज्बुल्लाह, हमास के अवशेष) और आक्रामक हो सकते हैं। अमेरिका इजराइल की रक्षा के लिए ज्यादा संसाधन खर्च करेगा, लेकिन इससे विश्व स्तर पर अस्थिरता बढ़ेगी।
आखिरकार, अमेरिका ईरान पर हमला नहीं कर रहा क्योंकि यह "कम लागत, ज्यादा प्रभाव" वाला नहीं है।
युद्ध हुआ तो अमेरिकी सैनिक मरेंगे, बेस नष्ट होंगे, तेल के दाम आसमान छू लेंगे और विश्व अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी। ईरान भी जानता है कि उसके तेल एक्सपोर्ट आधारित अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, लेकिन "एस इन द होल" के रूप में होर्मुज का इस्तेमाल करके वह डिटरेंस बनाए रखता है।
यह "डर की दीवार" है जो अब तक युद्ध को रोक रही है। लेकिन अगर कोई गलती हुई – एक गलतफहमी, एक अचानक हमला – तो यह दीवार टूट जाएगी और मध्य पूर्व के साथ पूरा विश्व हाहाकार में डूब जाएगा।
सज्जाद अली नयानी ✍
फ्राइडे वर्ल्ड 4/2/2026