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Friday, 6 February 2026

ईरान ने दिया साफ संदेश: "युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर हुआ तो पूरी तरह तैयार!"

ईरान ने दिया साफ संदेश: "युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर हुआ तो पूरी तरह तैयार!"
-Friday world 6/2/2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति दोहराई है। भारत में तैनात ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने अमेरिका के साथ चल रहे तनाव पर स्पष्ट रुख जाहिर करते हुए कहा है कि तेहरान युद्ध बिल्कुल नहीं चाहता, लेकिन अगर स्थिति युद्ध तक पहुंची तो ईरान हर विकल्प के लिए पूरी तरह तैयार है।

 समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राजदूत फतहाली दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनसे सीधा सवाल किया गया कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है या मौजूदा तनाव पूर्ण युद्ध में बदल जाता है, तो ईरान कितना तैयार है? इस पर राजदूत ने जवाब दिया, ईरान बिल्कुल भी युद्ध नहीं चाहता। लेकिन हम सभी विकल्पों के लिए तैयार हैं। युद्ध के नतीजों को भी देखना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "हम बातचीत के लिए तैयार हैं, और हम इस बातचीत के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं। हमारा मानना है कि बातचीत अच्छी होनी चाहिए। हम बातचीत का कोई मौका नहीं छोड़ते, लेकिन बदकिस्मती से दूसरी तरफ वाले छोड़ देते हैं और हमला करते हैं। अब वे हमारे साथ अच्छी बातचीत करना चाहते हैं..."

 ओमान में चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है। अमेरिकी दल की अगुवाई विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कर रहे हैं, जबकि ईरानी टीम का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अरागची कर रहे हैं। इन वार्ताओं को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने इसे "एक अच्छी शुरुआत" बताया है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित है और कोई व्यापक एजेंडा नहीं है। 

राजदूत फतहाली का बयान ईरान की दोहरी नीति को दर्शाता है—शांति की इच्छा के साथ-साथ मजबूत रक्षा की तैयारी। ईरान बार-बार कहता रहा है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है, लेकिन अमेरिकी दबाव या सैन्य कार्रवाई का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। 

 भारत-ईरान संबंधों का संदर्भ भारत में ईरान के राजदूत का यह बयान खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं। चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। हाल के महीनों में ईरान ने भारत के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। राजदूत फतहाली ने कई बार भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की है, खासकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ईरान के पक्ष में वोट करने के लिए। 

 युद्ध की आशंका और वैश्विक प्रभाव अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का वैश्विक असर हो सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरा मंडरा रहा है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। ईरान ने पहले भी चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो वह इस मार्ग को प्रभावित कर सकता है। 

राजदूत फतहाली का संदेश साफ है—ईरान बातचीत चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा। "युद्ध के नतीजे" का जिक्र करते हुए उन्होंने आगाह किया कि कोई भी सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

 यह बयान न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि मध्य पूर्व में शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदाराना रवैया अपनाना जरूरी है। ईरान तैयार है—शांति के लिए और जरूरत पड़ी तो रक्षा के लिए भी।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday world 6/2/2026