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Friday, 6 February 2026

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 'शून्य' टैरिफ का दावा, लेकिन भारतीय किसानों के हित सुरक्षित? क्या यह डबल इनकम का सपना या खतरे की घंटी?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 'शून्य' टैरिफ का दावा, लेकिन भारतीय किसानों के हित सुरक्षित? क्या यह डबल इनकम का सपना या खतरे की घंटी? -Friday world 5/2/2026

नई दिल्ली/वाशिंगटन:  फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे "ऐतिहासिक" बताते हुए दावा किया कि भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को शून्य करने पर सहमति जताई है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि भारत औसत औद्योगिक टैरिफ 13.5% से घटाकर लगभग सभी वस्तुओं पर शून्य करेगा, जिसमें फल, सब्जियां, मेवे (ट्री नट्स), वाइन, स्पिरिट्स आदि शामिल हैं।

 ट्रंप ने कहा, "भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को जीरो करेगा।" वहीं, व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और अमेरिका में 500 अरब डॉलर का निवेश करेगा, जिसमें ऊर्जा, तकनीक, कृषि और कोल शामिल हैं।

 लेकिन भारतीय पक्ष की ओर से वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने संसद में स्पष्ट किया कि समझौते में कृषि और डेयरी क्षेत्र के संवेदनशील हितों का पूर्ण संरक्षण किया गया है। गोयल ने कहा, "हमने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि और डेयरी को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।" उन्होंने जोर दिया कि यह डील भारतीय एमएसएमई, उद्यमियों और मेक इन इंडिया को नई तकनीक और अवसर देगी। 

 डील के प्रमुख बिंदु: क्या वाकई शून्य टैरिफ कृषि पर? 

- अमेरिकी दावे: भारत ने "विशाल श्रेणी" (vast array) के कृषि उत्पादों पर टैरिफ जीरो करने पर सहमति जताई, जैसे बादाम, पिस्ता, सेब, फल-सब्जियां, वाइन आदि। ग्रीर ने कहा कि 98-99% औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ जीरो होगा।

 - भारतीय स्पष्टीकरण: कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों में सुरक्षा बरकरार रहेगी। जीएम फसलें (जैसे अमेरिकी मक्का, सोयाबीन), डेयरी, पोल्ट्री, अनाज आदि पर कोई बड़ा बदलाव नहीं। भारत ने रूसी तेल पर पूर्ण बंद का दावा खारिज नहीं किया, लेकिन विविधीकरण की बात की। 

- टैरिफ में बदलाव: अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया (पिछले punitive duties हटाए)। भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा, लेकिन पूर्ण जीरो का विवादास्पद दावा। 

भारतीय किसानों पर क्या असर? भारत में कृषि और पशुपालन 70 करोड़ से अधिक लोगों का आधार है। विकसित देशों में खेती मशीनीकृत और सब्सिडी वाली है, जबकि भारत में छोटे किसान मजदूरी पर निर्भर हैं।

 - चिंताएं: अगर अमेरिकी सस्ते, सब्सिडी वाले उत्पाद (अनाज, डेयरी) बिना टैरिफ के आएं, तो स्थानीय कीमतें गिर सकती हैं। विश्व का 90% फूड ट्रेड 5 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथ में है, जो कीमतें नियंत्रित करती हैं। इससे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। 

- अमेरिकी कृषि निर्यात: 2024 में अमेरिका ने भारत को 1.6 अरब डॉलर का कृषि निर्यात किया (मुख्यतः बादाम, पिस्ता, सेब, इथेनॉल)। भारत की कुल कृषि निर्यात 51 अरब डॉलर है, जिसे 100 अरब तक ले जाने का लक्ष्य। 

- फायदे: कुछ क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ सकता है (श्रिंप, टेक्सटाइल आदि)। अमेरिकी तकनीक से उत्पादकता बढ़ सकती है। 

डील के अन्य पहलू 

- रूसी तेल: ट्रंप का दावा कि भारत रूसी तेल बंद करेगा और अमेरिका/वेनेजुएला से खरीदेगा, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। रूस से सस्ता तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण।

 - 500 अरब डॉलर निवेश/खरीद: ट्रंप का दावा, लेकिन भारत की ओर से पुष्टि नहीं। वर्तमान अमेरिकी आयात 

~50 अरब डॉलर सालाना है, इतनी बड़ी राशि असंभव लगती है। 

- राजनीतिक प्रभाव: यह डील ट्रंप-मोदी की दोस्ती का नतीजा है, लेकिन विपक्ष और किसान संगठन इसे "किसानों पर हमला" बता रहे हैं। 

अवसर या खतरा? यह डील भारतीय निर्यातकों (टेक्सटाइल, जेम्स, लेदर) के लिए राहत है, लेकिन कृषि पर असर पर बहस जारी है। गोयल का दावा है कि संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष "विशाल" बाजार खुलने का जश्न मना रहा है। असल विवरण (फाइनल टेक्स्ट) आने पर ही साफ होगा कि क्या भारतीय किसान "डबल इनकम" पाएंगे या उनकी आजीविका पर "डबल खतरा" मंडराएगा। 

यह समझौता भारत-अमेरिका रिश्तों में नया अध्याय है, लेकिन किसानों के हितों की रक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday world 5/2/2026