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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 2 March 2026

"ईरान का 'ड्रोन प्रहार': अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर हमला, तेल की कीमतें 10% उछलीं – विश्व अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल!"

"ईरान का 'ड्रोन प्रहार': अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर हमला, तेल की कीमतें 10% उछलीं – विश्व अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल!"
-Friday World 2th march 2026
मध्य पूर्व का तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। 2 मार्च 2026 को सोमवार की सुबह, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया। यह दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी में से एक है, जो रोजाना 5.5 लाख बैरल से अधिक तेल रिफाइन करती है और सऊदी क्रूड के निर्यात का प्रमुख केंद्र है। 

हमले में ड्रोन से गिरे मलबे से आग लग गई, हालांकि सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार ड्रोन को रोक लिया गया और आग पर काबू पा लिया गया। कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन सावधानी के तौर पर रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। यह हमला ईरान की उस व्यापक जवाबी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें अबू धाबी, दुबई, दोहा, मनामा और ओमान के डुकम पोर्ट सहित कई खाड़ी देशों पर हमले हुए हैं। 

ईरान का बदला: अमेरिका-इजरायल हमलों का जवाब शनिवार से शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों ने स्थिति को और भयावह बना दिया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबरें आईं, जिससे तेहरान में आक्रोश चरम पर है। ईरान ने जवाब में इजरायल, अमेरिकी सैन्य अड्डों और अब खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसे "आतंकवादी आक्रमण" करार देते हुए कड़ी निंदा की है और कहा है कि सऊदी धरती या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिका-इजरायल हमलों के लिए नहीं किया गया, फिर भी ईरान ने हमला किया।

 रियाद ने ईरानी राजदूत को तलब कर सख्त विरोध जताया है। अब खाड़ी देशों में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, और स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। 

होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया का 20% तेल सप्लाई ठप सबसे बड़ा खतरा **होर्मुज जलडमरूमध्य** पर मंडरा रहा है। यह संकरी जलधारा, जो ईरान और ओमान के बीच है, दुनिया के लगभग 20% समुद्री तेल व्यापार का रास्ता है। ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जहाजों को चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज गुजरने न पाए। नतीजा? सैकड़ों टैंकर जहाज जलडमरूमध्य के बाहर लंगर डाले खड़े हैं। तीन टैंकरों पर हमले हुए, एक नाविक की मौत हुई, और शिपिंग पूरी तरह ठप हो गई है। 

इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत सोमवार को 9-10% बढ़कर 79-82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई – पिछले चार सालों की सबसे ऊंची स्तर। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर स्थिति लंबी चली तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकती हैं। 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: महंगाई का तूफान** यह संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा। अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा, तो वैश्विक सप्लाई चेन ठप हो जाएगी। तेल की ऊंची कीमतें परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को बढ़ाएंगी। दुनिया भर में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है, खासकर उन देशों में जो तेल आयात पर निर्भर हैं।

 सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश अब अमेरिका-इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई की ओर बढ़ सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला खाड़ी ऊर्जा ढांचे पर पहला बड़ा हमला है, जो युद्ध को और व्यापक बना सकता है। 

 युद्ध की छाया में दुनिया** मध्य पूर्व में यह नया दौर न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आर्थिक संकट का कारण बन सकता है। ईरान का यह ड्रोन हमला सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि एक चेतावनी है – कि अगर युद्ध जारी रहा तो ऊर्जा संकट और महंगाई का तूफान आएगा। दुनिया अब सांस थामे देख रही है कि अगला कदम क्या होगा। क्या बातचीत होगी या युद्ध और भयानक रूप लेगा?

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 2th march 2026