-Friday World March 24,2026
दुबई/तेहरान, 24 मार्च 2026— मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध अब एक नई, खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की रक्षा परिषद (Defense Council) ने सोमवार को साफ-साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिका या इजरायल ने ईरान के तटों या किसी भी द्वीप पर हमला करने की कोशिश की, तो पूरा फारस की खाड़ी (Persian Gulf) समुद्री बारूदी सुरंगों (naval mines) से भर दिया जाएगा। इस कदम से क्षेत्रीय जहाजरानी और संचार लाइनें पूरी तरह ठप हो जाएंगी, जिसका असर न सिर्फ खाड़ी देशों पर, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी रक्षा परिषद ने राज्य मीडिया के जरिए जारी बयान में कहा, “ईरान के तटों या द्वीपों पर हमला करने की किसी भी कोशिश की स्थिति में खाड़ी देशों तक जाने वाले सभी रास्तों को अलग-अलग तरह की समुद्री बारूदी सुरंगों से भर दिया जाएगा। इनमें तैरने वाली माइन (floating mines) भी शामिल होंगी, जिन्हें तट से ही छोड़ा जा सकता है।”
परिषद ने आगे चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में पूरा खाड़ी क्षेत्र लंबे समय तक **होर्मुज स्ट्रेट** जैसी स्थिति में आ जाएगा। 1980 के दशक के 'टैंकर वॉर' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “उस समय कुछ ही समुद्री माइन हटाने में 100 से ज्यादा माइनस्वीपर जहाज लग गए थे, लेकिन वे बुरी तरह विफल रहे थे। उस विफलता को नहीं भूलना चाहिए।”
युद्ध का चौथा सप्ताह: बढ़ती हिंसा और बढ़ते खतरे
यह धमकी भरा बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिका-इजरायल गठबंधन के साथ ईरान का संघर्ष 28 फरवरी 2026 से चल रहा है। इस युद्ध में अब तक ईरान में 1500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि इजरायल में ईरानी हमलों में 15 लोगों की मौत हुई है। वेस्ट बैंक और खाड़ी के अरब देशों में भी दर्जनों नागरिक हताहत हुए हैं।
सोमवार को इजरायल ने तेहरान समेत ईरान के कई इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय लक्ष्यों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के अल धफरा एयर बेस के पास एयर डिफेंस सिस्टम ने एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया, लेकिन जमीन पर एक व्यक्ति छर्रे लगने से घायल हो गया। बहरीन और कुवैत में चेतावनी के सायरन बज उठे, जबकि सऊदी अरब ने रियाद की ओर आ रही ईरानी मिसाइल को इंटरसेप्ट किया और पूर्वी प्रांत में ड्रोन हमलों को भी नाकाम किया।
ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम और खाड़ी में तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जो मंगलवार आधी रात से ठीक पहले खत्म होने वाला था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अगर ईरान ने स्ट्रेट नहीं खोला तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को “पूरी तरह तबाह” कर देगा।
ट्रंप ने बाद में इस ultimatum को पांच दिनों के लिए टाल दिया और कहा कि ईरान के साथ “अच्छी और उत्पादक बातचीत” हुई है, लेकिन तेहरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 'दुश्मन' जहाजों (अमेरिका और इजरायल से जुड़े) के लिए बंद रहेगा, जबकि अन्य देशों के जहाजों को समन्वय के बाद गुजरने की अनुमति दी जा सकती है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके मुख्य तेल निर्यात केंद्र **खार्ग द्वीप** (Kharg Island) पर कब्जा या ब्लॉक करने की योजना पर विचार कर रहा है। इजरायल ने भी संकेत दिया है कि युद्ध में जमीनी कार्रवाई की संभावना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की करीब 20% तेल और LNG सप्लाई का रास्ता है। इसकी आंशिक बंदी और माइन बिछाने की धमकी से वैश्विक बाजार हिल गए हैं। ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में $105 तक का उछाल दर्ज किया गया। प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेजी आई है, जिसका असर भारत समेत ऊर्जा आयातक देशों पर पड़ रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान ने खाड़ी में बड़े पैमाने पर माइन बिछा दिए, तो सफाई में महीनों लग सकते हैं — ठीक 1980 के दशक की तरह। उस समय भी कुछ माइन हटाने में अंतरराष्ट्रीय नौसेना की बड़ी ताकत लगी थी, लेकिन काम अधूरा रह गया था।
ईरान की रणनीति: असममित युद्ध और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा है कि अगर अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया तो पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को बिजली पहुंचाने वाले पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा। यहां तक कि UAE के बाराकाह न्यूक्लियर प्लांट और डेसालिनेशन प्लांट्स का भी जिक्र किया गया है।
खाड़ी के अरब देश अब सतर्क हैं। सऊदी अरब, UAE, बहरीन और कुवैत अपनी एयर डिफेंस सिस्टम को अलर्ट पर रखे हुए हैं। वहीं, ईरान की नई सुप्रीम लीडरशिप (मोजतबा खामेनी) ने कहा है कि दुश्मनों की सुरक्षा छीन ली जाएगी।
युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इजरायल का लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को नेस्तनाबूद करना है, जबकि ईरान असममित हमलों — मिसाइल, ड्रोन और अब समुद्री माइन — के जरिए जवाब दे रहा है।
विश्व समुदाय चिंतित है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) से समन्वय की बात हो रही है, लेकिन कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा। अगर खाड़ी में बारूद बिछ गया तो न सिर्फ तेल की सप्लाई रुक जाएगी, बल्कि वैश्विक मुद्रास्फीति, शिपिंग बीमा दरें और अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी।
ईरान की यह चेतावनी सिर्फ शब्दों की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता की परीक्षा है। दुनिया अब सांस रोके देख रही है कि अगला कदम क्या होगा — बातचीत का रास्ता या खाड़ी को बारूद का समंदर बनाने वाली तबाही?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 24,2026