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Thursday, 5 March 2026

20 वर्षों में अमेरिका की जंग: अफगानिस्तान से लीबिया तक 5 देश कैसे बने खंडहर?

20 वर्षों में अमेरिका की जंग: अफगानिस्तान से लीबिया तक 5 देश कैसे बने खंडहर?
-Friday World – 5 मार्च 2026
तेहरान/वाशिंगटन, 5 मार्च 2026 – पिछले दो दशकों में अमेरिका ने मध्य पूर्व और उसके आसपास के क्षेत्र में ऐसी जंगें लड़ी हैं, जिन्होंने कई देशों को तबाह कर दिया। अफगानिस्तान, इराक, लीबिया, सीरिया और यमन—ये पांच देश अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद खंडहरों में तब्दील हो गए। अब 2026 में ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को आग में झोंक दिया है। ईरान जल रहा है, इजरायल में तबाही मची हुई है, और खाड़ी के देश—कतर, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब—भी हमलों की चपेट में हैं। सवाल यह है: क्या ईरान की दशा भी इराक, सीरिया, लीबिया, यमन और अफगानिस्तान जैसी हो जाएगी? क्या अमेरिका फिर से एक और देश को बर्बाद करके छोड़ देगा? 

अफगानिस्तान: 20 साल की सबसे लंबी जंग (2001-2021)

9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया। तालिबान को सत्ता से हटाया, लेकिन 20 साल बाद 2021 में अमेरिकी सेना वापस लौटी तो तालिबान फिर सत्ता में आ गया। इस जंग में 2,400 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि अफगानिस्तान में लाखों मौतें हुईं—सीधे युद्ध और अप्रत्यक्ष प्रभाव से। देश की अर्थव्यवस्था तबाह, इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट, करोड़ों लोग विस्थापित। अमेरिका ने $2.3 ट्रिलियन खर्च किए, लेकिन आज अफगानिस्तान गरीबी और अराजकता में डूबा है। 

 यह जंग अमेरिका की सबसे लंबी सैन्य कार्रवाई बनी, लेकिन अंत में कोई स्थिर सरकार नहीं छोड़ी। 

इराक: सद्दाम से ISIS तक (2003-वर्तमान)** 2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला किया—WMD (विनाशकारी हथियार) का बहाना बनाकर। सद्दाम हुसैन को हटाया गया, लेकिन कोई WMD नहीं मिले। परिणाम: गृहयुद्ध, लाखों मौतें (कुछ अनुमानों में 1 मिलियन से ज्यादा), और ISIS का उदय। इराक आज भी अस्थिर है—ईरानी प्रभाव बढ़ा, अमेरिकी सेना अभी भी मौजूद। देश की अर्थव्यवस्था और समाज चूर-चूर। 

 अमेरिकी हस्तक्षेप ने इराक को स्थायी अराजकता में धकेल दिया। 

लीबिया: गद्दाफी के बाद अराजकता (2011-वर्तमान) 2011 में NATO (अमेरिका के नेतृत्व में) ने लीबिया पर हवाई हमले किए। गद्दाफी की सरकार गिराई गई, लेकिन उसके बाद देश गृहयुद्ध में डूब गया। आज लीबिया दो हिस्सों में बंटा है—पूर्व और पश्चिम, मिलिशिया और आतंकवादी समूह हावी। लाखों विस्थापित, अर्थव्यवस्था तबाह, तेल उत्पादन प्रभावित। 
 "रेजीम चेंज" के नाम पर लीबिया को खंडहर बना दिया गया, कोई स्थिरता नहीं आई। 

सीरिया: गृहयुद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप (2011-वर्तमान) 2011 से सीरिया में गृहयुद्ध चला। अमेरिका ने ISIS के खिलाफ हमले किए, लेकिन असद सरकार को हटाने की कोशिश में असफल रहा। लाखों मौतें, करोड़ों शरणार्थी, देश का बड़ा हिस्सा नष्ट। अमेरिकी सेना अभी भी पूर्वी सीरिया में मौजूद। 

 अमेरिकी नीति ने सीरिया को स्थायी युद्धक्षेत्र बना दिया। 

यमन: सऊदी-अमेरिकी गठबंधन की जंग (2015-वर्तमान) 2015 से सऊदी अरब (अमेरिकी समर्थन से) ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग छेड़ी। अमेरिका ने हथियार, खुफिया जानकारी और हवाई सहायता दी। परिणाम: दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट—लाखों मौतें (भुखमरी से), करोड़ों विस्थापित, अर्थव्यवस्था तबाह।

  यमन आज भी युद्ध में डूबा है, अमेरिकी हथियारों से लाखों निर्दोष मारे गए। 

अब ईरान: क्या इतिहास दोहराया जाएगा?

 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू किए—ऑपरेशन एपिक फ्यूरी। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई शीर्ष नेता मारे गए। ईरान ने जवाबी हमले किए—सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन खाड़ी देशों (UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब) पर दागे। दुबई, अबू धाबी, दोहा, मनामा में विस्फोट, अमेरिकी बेस प्रभावित। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, तेल कीमतें आसमान छू रही हैं। 

 ईरान अब तक 1,000 से ज्यादा मौतें रिपोर्ट कर रहा है। इजरायल में भी तबाही—हजारों घायल। 

अमेरिका का इतिहास दिखाता है कि "रेजीम चेंज" के नाम पर देशों को तबाह कर दिया जाता है, लेकिन स्थिरता नहीं लाई जाती। अफगानिस्तान में 20 साल बाद तालिबान वापस, इराक में ISIS का उदय, लीबिया में गृहयुद्ध, सीरिया और यमन में अराजकता। ईरान की आबादी 90 मिलियन, मजबूत सेना, मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव। अगर युद्ध लंबा चला तो क्या ईरान भी खंडहर बन जाएगा? 

क्यों अमेरिका बार-बार ऐसा करता है? अमेरिका का दावा: आतंकवाद विरोध, परमाणु रोकथाम, क्षेत्रीय स्थिरता। लेकिन आलोचक कहते हैं—तेल नियंत्रण, इजरायल सुरक्षा, क्षेत्रीय वर्चस्व। 9/11 के बाद "वॉर ऑन टेरर" में $8 ट्रिलियन खर्च, लाखों मौतें, लेकिन आतंकवाद खत्म नहीं हुआ—बल्कि फैला।

 ईरान युद्ध अब क्षेत्रीय बन चुका है। खाड़ी देश अमेरिकी बेस होने के कारण निशाने पर। अगर ईरान टूटा तो BRICS, रूस-चीन गठबंधन मजबूत होगा। लेकिन अगर अमेरिका-इजरायल जीते तो क्या ईरान में भी गृहयुद्ध और अराजकता आएगी?

 ईरान ने दिखाया है कि वह अकेला लड़ सकता है। लेकिन इतिहास गवाह है—अमेरिकी हस्तक्षेप वाले देश अक्सर खंडहर बन जाते हैं। सवाल यह है: क्या ईरान अगला शिकार बनेगा, या यह जंग पूरी दुनिया को बदल देगी? 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World – 5 मार्च 2026