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Monday, 23 March 2026

"अमेरिका के सपनों पर ताला! ट्रंप प्रशासन की कड़वी वीजा नीतियों से भारत-चीन के छात्रों का भविष्य अधर में – 2.5 लाख वीजा कम, छात्र वीजा में 30% से ज्यादा गिरावट"

"अमेरिका के सपनों पर ताला! ट्रंप प्रशासन की कड़वी वीजा नीतियों से भारत-चीन के छात्रों का भविष्य अधर में – 2.5 लाख वीजा कम, छात्र वीजा में 30% से ज्यादा गिरावट"-Friday World March 23,2026 
लेकिन 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही यह सपना कई छात्रों के लिए दूर की कौड़ी बन गया। ट्रंप प्रशासन ने वीजा नीतियों को इतना कड़ा कर दिया कि कानूनी इमिग्रेशन में भारी गिरावट आई है। 'द वॉशिंगटन पोस्ट' के ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले आठ महीनों (जनवरी से अगस्त) में पिछले साल की तुलना में लगभग 2.5 लाख कम वीजा जारी किए गए। यह कुल स्वीकृत वीजा में 11% की कमी दर्शाता है। 

यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है – यह लाखों युवाओं के सपनों, परिवारों की उम्मीदों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की भविष्य की क्षमता पर सीधा असर डाल रही है। खासकर भारत और चीन जैसे देशों के छात्रों को सबसे ज्यादा झटका लगा है, जहां उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाना एक बड़ा लक्ष्य होता है। 

ट्रंप प्रशासन की सख्त वीजा नीतियां: क्या-क्या बदलाव आए? ट्रंप प्रशासन ने "अमेरिका फर्स्ट" के नारे के तहत इमिग्रेशन को राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा से जोड़ दिया। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं: 

- सख्त जांच और स्क्रीनिंग: सोशल मीडिया की गहन जांच, बैकग्राउंड चेक और विस्तृत सुरक्षा सत्यापन अनिवार्य कर दिए गए। कई मामलों में छोटी-मोटी गलतियां भी वीजा रिजेक्शन का कारण बन रही हैं। 

- वीजा इंटरव्यू पर अस्थायी रोक: छात्र वीजा (F-1) के इंटरव्यू पर कुछ समय के लिए रोक लगाई गई, जिससे प्रोसेसिंग में भारी देरी हुई। 

- स्टाफ की कमी: विदेश विभाग में कर्मचारियों की छंटनी और बजट कटौती से वीजा प्रोसेसिंग की क्षमता घटी। वेटिंग पीरियड महीनों से सालों तक पहुंच गया। 

- ट्रैवल बैन का विस्तार: 19 देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए गए, जिससे कई छात्र प्रभावित हुए। हालांकि भारत और चीन पर डायरेक्ट बैन नहीं है, लेकिन जांच की सख्ती बढ़ गई। 

- अन्य बदलाव: H-1B वीजा फीस बढ़ाई गई, ग्रीन कार्ड प्रोसेस धीमी हुई और कई कैटेगरी में नए प्रतिबंध लगे।

 इन नीतियों का नतीजा यह हुआ कि 2025 के पहले आठ महीनों में कुल वीजा जारी करने में भारी कटौती हुई। बिजनेस और टूरिस्ट वीजा में भी 3.4% की गिरावट आई, लेकिन छात्र और वर्क वीजा पर असर सबसे ज्यादा पड़ा। 

 भारत और चीन पर सबसे ज्यादा असर: छात्रों का सपना टूटा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और चीन के नागरिकों को जारी वीजा में लगभग 84,000 की कमी आई। यह गिरावट मुख्य रूप से छात्र वीजा (F-1) में देखी गई, जहां 30% से ज्यादा की कमी दर्ज हुई। कुछ महीनों में यह गिरावट 40-50% तक पहुंच गई।

 - भारतीय छात्र: भारत अमेरिका में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्र भेजने वाला देश है। 2025 में F-1 वीजा में 44% तक की गिरावट आई (कुछ महीनों में 60-69% तक)। जून-जुलाई 2025 में सिर्फ 12,776 F-1 वीजा जारी हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 41,336 थी।

 - चीनी छात्र: चीन भी प्रभावित हुआ, लेकिन गिरावट थोड़ी कम रही (करीब 56% कुछ महीनों में)। हालांकि, चीन ने अमेरिका की जगह अन्य देशों में छात्रों को आकर्षित करना शुरू कर दिया।

 - ग्रीन कार्ड और परिवार आधारित वीजा: इनमें भी देरी बढ़ी, खासकर भारत के लिए जहां बैकलॉग पहले से ही लाखों में है। 

अमेरिकी यूनिवर्सिटी जैसे हार्वर्ड, MIT, स्टैनफोर्ड और अन्य टॉप संस्थानों में भारतीय और चीनी छात्रों की संख्या में गिरावट आई। कई यूनिवर्सिटी ने रिपोर्ट किया कि नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों में 17% तक की कमी आई, जो दशक में सबसे बड़ी गिरावट है (पैंडेमिक को छोड़कर)। 

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर: विशेषज्ञों की चेतावनी ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ये नीतियां अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और नौकरियों के लिए जरूरी हैं। व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा, "वीजा कोई अधिकार नहीं, विशेषाधिकार है। हम बिना जांच के किसी को प्रवेश नहीं देंगे।"

 लेकिन अर्थशास्त्री और शिक्षा विशेषज्ञ अलग राय रखते हैं। हार्वर्ड के जेसन फरमैन जैसे विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इमिग्रेशन पर ऐसे प्रतिबंध अमेरिकी अर्थव्यवस्था, इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी को लंबे समय में नुकसान पहुंचाएंगे। अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिकी यूनिवर्सिटी को अरबों डॉलर का योगदान देते हैं, रिसर्च में मदद करते हैं और STEM फील्ड में टैलेंट लाते हैं।

 अमेरिका में AI, टेक और साइंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय और चीनी छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर ये टैलेंट अन्य देशों (कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके, जर्मनी) की ओर मुड़ गया, तो अमेरिका की ग्लोबल लीडरशिप को खतरा हो सकता है। 

छात्रों की प्रतिक्रियाएं: निराशा और नई राहें भारत और चीन के हजारों छात्र अब अमेरिका के बजाय कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके या यूरोपीय देशों को चुन रहे हैं। कई छात्रों ने कहा, "अमेरिका का सपना टूट गया, अब हम अन्य विकल्प देख रहे हैं।" कुछ ने घरेलू यूनिवर्सिटी या ऑनलाइन कोर्स चुन लिए। 

ट्रंप प्रशासन की नीतियां अमेरिका को "खुले दरवाजे" वाले देश की छवि से दूर ले जा रही हैं। लेकिन सवाल यह है – क्या यह गिरावट स्थायी होगी या नीतियां बदलेंगी? 

सपनों का क्या होगा? ट्रंप की सख्त वीजा नीतियां अमेरिका को "सुरक्षित" बनाने का दावा करती हैं, लेकिन इससे लाखों युवाओं के सपने प्रभावित हो रहे हैं। भारत और चीन जैसे देशों के छात्र, जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन में बड़ा योगदान देते हैं, अब अन्य रास्ते तलाश रहे हैं। यह सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि वैश्विक टैलेंट फ्लो और अमेरिकी प्रतिस्पर्धा पर असर डाल रहा है।

 वक्त आएगा जब दुनिया देखेगी – क्या अमेरिका फिर से "सपनों का देश" बनेगा या ये नीतियां स्थायी बदलाव ला देंगी? फिलहाल, भारतीय और चीनी छात्रों के लिए अमेरिका का रास्ता कठिन हो गया है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 23,2026