अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में आप्रवासन नीति एक बार फिर सुर्खियों में है। ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक अनोखा और विवादास्पद अभियान शुरू किया है, जिसे 'प्रोजेक्ट होमकमिंग' या 'सेल्फ-डिपोर्टेशन इंसेंटिव प्रोग्राम' कहा जा रहा है। इस योजना के तहत अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों को स्वेच्छा से देश छोड़ने (सेल्फ-डिपोर्टेशन) पर **$2600** (लगभग 2.2 लाख रुपये) का 'एग्जिट बोनस' और फ्री एयर टिकट दिया जा रहा है।
हालांकि, इस अभियान का प्रचार तरीका इतना संवेदनशील और आक्रोश भरा साबित हो रहा है कि भारत सहित कई देशों में इसे अपमानजनक माना जा रहा है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए भारतीय प्रवासियों को लक्षित करने के लिए **ताजमहल** की प्रतिष्ठित तस्वीर का इस्तेमाल किया। पोस्ट में लिखा था: "You can go home with a fresh start! Receive a FREE flight home and a $2,600 exit bonus when you use CBP Home to self-deport." इसी तरह चीन और कोलंबिया के लिए भी उनके प्रसिद्ध स्थलों की तस्वीरें लगाई गईं।
योजना की शुरुआत और उद्देश्य ट्रंप प्रशासन ने 2025 में ही 'CBP Home' ऐप को रीब्रांड कर इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। शुरू में यह $1000 का स्टाइपेंड देता था, लेकिन 2026 में ट्रंप के दूसरे साल की पहली वर्षगांठ पर इसे बढ़ाकर $2600 कर दिया गया। DHS का दावा है कि जबरन डिपोर्टेशन (एनफोर्स्ड डिपोर्टेशन) की औसत लागत $18,000 से ज्यादा है, जबकि सेल्फ-डिपोर्टेशन पर यह मात्र $5,100 के आसपास आती है। इससे अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा बचता है।
DHS सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा, "अवैध प्रवासी इस उपहार का फायदा उठाएं और सेल्फ-डिपोर्ट करें, क्योंकि अगर नहीं किया तो हम उन्हें ढूंढेंगे, गिरफ्तार करेंगे और कभी वापस नहीं आने देंगे।" अब तक 2.2 मिलियन से ज्यादा लोगों ने स्वेच्छा से देश छोड़ा है, और हजारों ने CBP Home ऐप का इस्तेमाल किया।
यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए है जो अमेरिका में बिना वैध वीजा या स्टेटस के रह रहे हैं। इसमें शामिल होने पर जुर्माने माफ हो जाते हैं, फ्री फ्लाइट मिलती है, और कैश बोनस भी। लेकिन अगर कोई जबरन पकड़ा गया तो स्थायी बैन लग सकता है।
ताजमहल का इस्तेमाल: क्यों हुआ विवाद? DHS के सोशल मीडिया पोस्ट में ताजमहल की तस्वीर देखकर भारतीय समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने इसे "1.4 अरब भारतीयों का अपमान" बताया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिखा:
- "ताजमहल को 'घर लौटो' का सिंबल बनाना कितना घटिया है!"
- "यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का मजाक उड़ाना है।"
- "ट्रंप प्रशासन भारतीयों को 'इललीगल' कहकर ताजमहल दिखा रहा है, जैसे हम सब अवैध हों।"
भारतीय मीडिया में भी यह खबर छाई रही। कई रिपोर्ट्स में इसे "असंवेदनशील" और "रैसिस्ट" करार दिया गया। एक तरफ अमेरिका कह रहा है कि यह "मानवीय" विकल्प है, दूसरी तरफ प्रचार का तरीका इतना सतही और स्टीरियोटाइपिकल लग रहा है कि यह भारतीय डायस्पोरा को और नाराज कर रहा है।
कौन-कौन से देश शामिल? यह अभियान मुख्य रूप से उन देशों के नागरिकों पर फोकस्ड है जहां से अवैध प्रवासियों की संख्या ज्यादा है। खास तौर पर:
- **भारत** – अनुमानित 7 लाख से ज्यादा अनडॉक्यूमेंटेड भारतीय अमेरिका में।
- **चीन** – बड़े पैमाने पर चीनी प्रवासी।
- **कोलंबिया** – लैटिन अमेरिकी देशों में से एक प्रमुख स्रोत।
DHS ने इन तीनों देशों के आइकॉनिक लैंडमार्क्स – ताजमहल, ग्रेट वॉल ऑफ चाइना (या अन्य), और कोलंबिया के किसी प्रसिद्ध स्थल – का इस्तेमाल कर पोस्टर्स बनाए। यह टारगेटेड अप्रोच है, लेकिन इसे "कल्चरल अप्रोप्रिएशन" या "अपमान" के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका में भारतीय प्रवासियों की स्थिति अमेरिका में भारतीय कम्युनिटी काफी मजबूत है। लाखों भारतीय H-1B, ग्रीन कार्ड और सिटिजनशिप के साथ वैध रूप से रहते हैं। लेकिन अनडॉक्यूमेंटेड या ओवरस्टे वीजा वाले भी कम नहीं हैं। ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियों के कारण कई लोग डर में जी रहे हैं। कुछ लोग इस ऑफर को "अच्छा मौका" मान रहे हैं, खासकर अगर वे वापस भारत में परिवार के साथ नई शुरुआत करना चाहते हैं। $2600 और फ्री टिकट कोई छोटी रकम नहीं है।
लेकिन ज्यादातर भारतीय अमेरिकन्स इसे "अपमानजनक" मान रहे हैं। वे कहते हैं कि वैध प्रवासी भी इस तरह के मैसेज से असहज महसूस करते हैं।
क्या है आगे का रास्ता? ट्रंप प्रशासन की यह नीति मास डिपोर्टेशन के साथ-साथ "इंसेंटिव बेस्ड" अप्रोच है। DHS का कहना है कि यह "विन-विन" है – प्रवासी घर लौटते हैं, अमेरिका को लागत बचती है। लेकिन क्रिटिक्स कहते हैं कि यह "कोर्सिव" है – या तो पैसे लेकर जाओ, या जबरन निकाले जाओगे।
भारतीय सरकार या प्रवासी संगठनों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस तेज है। कई लोग पूछ रहे हैं – क्या ताजमहल जैसी धरोहर को ऐसे प्रचार में इस्तेमाल करना उचित है?
यह अभियान दिखाता है कि आप्रवासन का मुद्दा कितना जटिल और भावनात्मक है। एक तरफ अमेरिका अपनी सीमाओं की सुरक्षा चाहता है, दूसरी तरफ प्रवासी समुदाय अपनी पहचान और सम्मान की रक्षा। ताजमहल की तस्वीर वाला यह पोस्ट शायद जल्द भुला दिया जाएगा, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 18,2026