"ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' पर सवाल! ईरान युद्ध के खिलाफ अमेरिकी विशेष बलों के अनुभवी अधिकारी जो केंट का इस्तीफा –
"यह युद्ध इज़राइल लॉबी के दबाव में शुरू हुआ, ईरान कोई तत्काल खतरा नहीं था"
मार्च 2026 में अमेरिकी राजनीति में तूफान मचा हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू किए हैं। ऑपरेशन "एपिक फ्यूरी" के नाम से जाना जाने वाला यह अभियान ईरान की परमाणु सुविधाओं, सैन्य ठिकानों और नेतृत्व को निशाना बना रहा है।
ईरान ने जवाबी हमले तेज कर दिए हैं, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
लेकिन इस युद्ध के बीच ट्रंप प्रशासन में एक बड़ा विद्रोह सामने आया है – काउंटरटेररिज्म सेंटर (CTC) के निदेशक जो केंट ने इस्तीफा दे दिया है।
जो केंट कौन हैं? 45 वर्षीय जो केंट अमेरिकी विशेष बलों (Special Forces) और सीआईए के एक अनुभवी अधिकारी हैं। उन्हें 11 बार विदेशों में तैनात किया गया। उनकी पत्नी शैनन केंट अमेरिकी नौसेना की क्रिप्टोलॉजिक तकनीशियन थीं। साल 2019 में सीरिया में एक आत्मघाती बम विस्फोट में शैनन की मौत हो गई थी। जो केंट लंबे समय से ट्रंप के समर्थक रहे हैं। उन्होंने ट्रंप के "अमेरिका फर्स्ट" एजेंडे का खुलकर समर्थन किया था। लेकिन अब यही व्यक्ति ट्रंप के सबसे बड़े फैसले – ईरान युद्ध – के खिलाफ खड़ा हो गया है।
इस्तीफे का पत्र: क्या लिखा जो केंट ने?** जो केंट ने अपने एक्स अकाउंट पर एक लंबा पत्र पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने इस्तीफा देने का ऐलान किया और ट्रंप से "रुख बदलने" की अपील की। पत्र के मुख्य अंश:
- "जून 2025 तक मुझे लगता था कि राष्ट्रपति ट्रंप समझ गए हैं कि मध्य पूर्व के युद्धों ने अमेरिका को हमारे देशभक्तों के अनमोल जीवन से वंचित कर दिया है और राष्ट्र की संपत्ति व समृद्धि को कम किया है।"
- "लेकिन उच्च पदस्थ इज़राइली अधिकारियों और प्रभावशाली अमेरिकी पत्रकारों ने गलत सूचना फैलाई, जिससे ट्रंप को अपने 'अमेरिका फर्स्ट' मंच को कमजोर करना पड़ा।"
- "इन लोगों ने आपको यह यकीन दिलाया कि ईरान अमेरिका के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। यह झूठ था। ईरान कोई तत्काल खतरा नहीं था।"
- "यह युद्ध इज़राइल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया गया। इससे अमेरिकी सैनिकों की जान जा रही है और हमारी अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ रहा है।"
केंट ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि वे इस युद्ध के नैतिक और रणनीतिक औचित्य से सहमत नहीं हैं। उन्होंने ट्रंप से अपील की कि वे तुरंत युद्ध रोकें और डिप्लोमेसी का रास्ता अपनाएं।
ट्रंप की प्रतिक्रिया: "उनका जाना अच्छा है" राष्ट्रपति ट्रंप ने जो केंट के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा:
ट्रंप के करीबी सहयोगी स्टीव बैनन और माइक पेंस ने भी केंट की आलोचना की। बैनन ने कहा कि "यह इज़राइल विरोधी प्रचार है, जो केंट अब वामपंथी एजेंडे में शामिल हो गए हैं।"
अमेरिका में विरोध की लहर- जो केंट का इस्तीफा अकेला नहीं है। अमेरिका में ईरान युद्ध के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है।
- वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और शिकागो में हजारों लोग सड़कों पर उतरे हैं।
- "No War with Iran" और "America First, Not Israel First" के नारे लग रहे हैं।
- कई पूर्व सैनिक और खुफिया अधिकारी भी विरोध में शामिल हुए हैं।
- डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जैसे एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज और बर्नी सैंडर्स ने ट्रंप पर हमला बोला – "यह युद्ध इज़राइल लॉबी के लिए है, अमेरिकी जनता के लिए नहीं।"
केंट के इस्तीफे ने इन विरोधों को और बल दिया है। कई लोग इसे ट्रंप प्रशासन में "क्रैक" का संकेत मान रहे हैं।
युद्ध की पृष्ठभूमि और केंट का दावा ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा था और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की साजिश रच रहा था। लेकिन केंट का कहना है कि खुफिया रिपोर्ट्स में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इज़राइल की मोसाद और अमेरिकी प्रो-इज़राइल लॉबी (जैसे AIPAC) ने गलत जानकारी फैलाई।
केंट ने लिखा: "मैंने 11 विदेशी तैनाती में देखा कि मध्य पूर्व युद्ध अमेरिका के लिए कितने घातक हैं। मेरी पत्नी शैनन की मौत सीरिया में हुई। अब फिर वही गलती दोहराई जा रही है।"
अमेरिका में क्या हो रहा है?- कांग्रेस में कुछ रिपब्लिकन सांसद भी सवाल उठा रहे हैं।
- पेंटागन और सीआईए के कुछ अधिकारी चुपके-चुपके विरोध जता रहे हैं।
- मीडिया में बहस छिड़ी है – क्या यह युद्ध "अमेरिका फर्स्ट" है या "इज़राइल फर्स्ट"?
- ट्रंप के समर्थक आधार में भी दरार दिख रही है। कई MAGA समर्थक कह रहे हैं – "हम ईरान से युद्ध नहीं चाहते।" *:
ट्रंप के लिए बड़ा संकट? जो केंट का इस्तीफा सिर्फ एक व्यक्ति का फैसला नहीं है। यह ट्रंप प्रशासन में असंतोष की आवाज है। एक अनुभवी काउंटरटेररिज्म विशेषज्ञ, पूर्व सैनिक और ट्रंप समर्थक का यह कदम युद्ध की वैधता पर गंभीर सवाल उठाता है। ट्रंप ने इसे "अच्छा हुआ" कहकर खारिज किया, लेकिन विरोध की लहर बढ़ रही है।
अब सवाल ये है – क्या ट्रंप युद्ध जारी रखेंगे या डिप्लोमेसी का रास्ता अपनाएंगे? क्या केंट जैसे और अधिकारी सामने आएंगे? अमेरिका में "अमेरिका फर्स्ट" और "इज़राइल फर्स्ट" की बहस तेज हो गई है। आने वाले दिन बताएंगे कि ट्रंप इस संकट से कैसे निपटते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 17,2026