-Friday World March 17,2026
यूएससीआईआरएफ की 2026 रिपोर्ट का सच: आरएसएस और रॉ पर प्रतिबंध की मांग – क्या है रिपोर्ट में और क्यों भारत ने ठुकराया?
– धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन, संपत्ति फ्रीज और हथियार बिक्री रोकने की मांग; भारत सरकार ने कहा – पक्षपाती और प्रेरित!"
मार्च 2026 में जारी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) की वार्षिक रिपोर्ट ने भारत को फिर से निशाने पर लिया है। इस रिपोर्ट में आयोग ने भारत को "विशेष चिंता वाला देश" (Country of Particular Concern - CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। सबसे चौंकाने वाली बात
– आयोग ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) पर लक्षित प्रतिबंध (targeted sanctions) लगाने की मांग की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये संगठन "धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार हैं या उन्हें सहन करते हैं"।
यूएससीआईआरएफ एक स्वतंत्र, द्विदलीय (बाइपार्टिसन) संघीय आयोग है, जो 1998 के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत काम करता है। यह अमेरिकी विदेश मंत्रालय से अलग है और राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देता है। रिपोर्ट में 2025 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति "निरंतर बिगड़ती" बताई गई है। आयोग ने आरोप लगाया कि सरकार ने नए कानून लागू किए, जो धार्मिक अल्पसंख्यकों (खासकर मुस्लिम और ईसाई) को निशाना बनाते हैं।
रिपोर्ट में आरएसएस और रॉ पर क्या आरोप?
रिपोर्ट के भारत अध्याय में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आरएसएस और रॉ "धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार हैं या उन्हें बर्दाश्त करते हैं"। आयोग का दावा है कि:
- आरएसएस हिंदू राष्ट्रवादी समूहों के माध्यम से मुस्लिम और ईसाई समुदायों के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा को बढ़ावा देता है या सहन करता है।
- रॉ ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमन (transnational repression) में भूमिका निभाई है, जैसे अमेरिका में सिख अलगाववादियों या अन्य अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं पर कथित हमले।
- रिपोर्ट में 2025 में CAA, NRC, UAPA, वक्फ बिल और राज्य स्तर के एंटी-कन्वर्जन/गौ-हत्या कानूनों का जिक्र है, जिन्हें अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया गया। आयोग ने सिफारिश की कि अमेरिका सरकार:
- आरएसएस और रॉ से जुड़े व्यक्तियों/संस्थाओं की संपत्ति फ्रीज करे।
- उन्हें अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाए।
- हथियार निर्यात नियंत्रण अधिनियम (Arms Export Control Act) की धारा 6 लागू कर भारत को हथियार बिक्री रोक दे, क्योंकि अमेरिकी नागरिकों और अल्पसंख्यकों पर "धमकी और उत्पीड़न" जारी है।
- भविष्य की सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़े। ये सिर्फ सिफारिशें हैं
– अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इन्हें अभी स्वीकार नहीं किया है। पिछले सालों में भी यूएससीआईआरएफ ने भारत को CPC बनाने की मांग की, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे लागू नहीं किया।
भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट को "पक्षपाती, प्रेरित और विकृत" बताया। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा:
- यूएससीआईआरएफ कई सालों से भारत के खिलाफ "विकृत और चुनिंदा चित्रण" पेश कर रहा है।
- रिपोर्ट में "संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक कथानकों" पर आधारित आरोप हैं, न कि तथ्यों पर।
- भारत "कड़े शब्दों में" रिपोर्ट को खारिज करता है।
बीजेपी ने भी रिपोर्ट को "बेबुनियाद" कहा और कांग्रेस पर निशाना साधा कि वो अमेरिकी आयोग के साथ खड़ी है। कांग्रेस ने रिपोर्ट को "आरएसएस के खिलाफ सबूत" बताया और कहा कि ये संगठन राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा है।
आरएसएस ने अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। केशव कुंज मीडिया विभाग ने कहा कि कोई बयान जारी नहीं हुआ है।
रिपोर्ट में भारत के अलावा कौन-कौन?
यूएससीआईआरएफ ने 18 देशों को CPC बनाने की सिफारिश की, जिनमें पहले से शामिल हैं – चीन, ईरान, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब आदि। नई सिफारिशों में भारत, अफगानिस्तान, लीबिया, सीरिया और वियतनाम शामिल हैं। नाइजीरिया को 2025 में ट्रंप ने फिर CPC में डाला था।
यूएससीआईआरएफ की विश्वसनीयता पर सवाल भारत सरकार इसे "पक्षपाती" मानती है। कई विश्लेषकों का कहना है कि आयोग में कुछ सदस्यों के विचारधारा-आधारित पूर्वाग्रह हैं। रिपोर्ट में भारत के खिलाफ आरोप अक्सर कुछ एनजीओ, मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्षी दलों के दावों पर आधारित होते हैं।
सिफारिशें या दबाव? यूएससीआईआरएफ की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं। ट्रंप प्रशासन ने पहले भी इन्हें नजरअंदाज किया है। लेकिन रिपोर्ट भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा कर सकती है, खासकर जब दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं। आरएसएस और रॉ पर प्रतिबंध की मांग पहली बार इतनी स्पष्ट रूप से आई है – ये वैश्विक स्तर पर हिंदू राष्ट्रवाद और भारतीय खुफिया एजेंसी के खिलाफ बड़ा कदम है।
भारत ने इसे "भारत विरोधी" करार दिया है। अब देखना है कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय क्या फैसला लेता है। रिपोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर राजनीतिक दबाव का हथियार बन सकती है या सिर्फ कागजी सिफारिश रह जाएगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 17,2026
(यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट्स, यूएससीआईआरएफ की आधिकारिक दस्तावेज और मीडिया कवरेज पर आधारित है।)