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Wednesday, 4 March 2026

होर्मुज़ खाड़ी में दुनिया का सबसे बड़ा तेल संकट: करोड़ों डॉलर का झटका, 700+ टैंकर फंसे, भारत के 37 जहाज और 1100 नाविक खतरे में!

होर्मुज़ खाड़ी में दुनिया का सबसे बड़ा तेल संकट: करोड़ों डॉलर का झटका, 700+ टैंकर फंसे, भारत के 37 जहाज और 1100 नाविक खतरे में!
-Friday World मार्च-4-2026
आज के वैश्विक संकट की सबसे बड़ी कुंजी है – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़। यह संकरी खाड़ी दुनिया के लगभग 20% क्रूड ऑयल और बड़ी मात्रा में एलएनजी (प्राकृतिक गैस) का परिवहन करती है। लेकिन 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर **आयतुल्लाह अली खामेनेई** की मौत हो गई। इस घटना ने ईरान को आक्रामक बना दिया और उसने तुरंत होर्मुज़ खाड़ी को बंद कर दिया।

 ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने साफ घोषणा की: "खाड़ी बंद है। जो भी जहाज गुजरने की कोशिश करेगा, उसे आग लगा दी जाएगी।" इस घोषणा के बाद वाणिज्यिक ट्रैफिक लगभग थम गया। सामान्य दिनों में यहां से रोजाना  1.98 करोड़ बैरल क्रूड ऑयल गुजरता है, लेकिन 1 मार्च को सिर्फ 28 लाख बैरल (केवल तीन टैंकर) ही गुजर पाए – यानी 86% की गिरावट! 

फिलहाल 706 से ज्यादा गैर-ईरानी टैंकर खाड़ी के दोनों तरफ फंसे हुए हैं। इनमें 334 क्रूड ऑयल कैरियर, 109 डर्टी प्रोडक्ट कैरियर और 263 क्लीन प्रोडक्ट वेसल शामिल हैं। 26 टैंकर तो किसी निश्चित गंतव्य के बिना ही खाड़ी में भटक रहे हैं। अगर यह स्थिति लंबी चली तो फंसे जहाजों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है, जिससे डिलीवरी में महीनों का विलंब हो जाएगा। 

भारत पर सबसे बड़ा असर भारत के लिए यह खाड़ी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से 40% क्रूड ऑयल और 50% एलएनजी आता है। वर्तमान में  37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज (ज्यादातर क्रूड और एलएनजी कैरियर) पर्शियन गल्फ, गल्फ ऑफ ओमान और आसपास के इलाकों में अटके हुए हैं। इन जहाजों पर 1109 से ज्यादा नाविक (सैलर्स) सवार हैं। इंडियन नेशनल शिपओनर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि इन जहाजों के कारण 10,000 करोड़ रुपये की संपत्ति** खतरे में है। हाल ही में विदेशी जहाजों पर सवार तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिससे चिंता और बढ़ गई है। 

वैश्विक असर और कीमतों में उछाल इस संकट से दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आ रहा है। एशिया और यूरोप की रिफाइनरी कंपनियां अब अमेरिका, गल्फ, वेस्ट अफ्रीका, ब्राजील और रूस से वैकल्पिक स्रोत तलाश रही हैं। चीन और भारत जैसे देश, जो गल्फ क्रूड पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, उन्हें सबसे बड़ा झटका लग रहा है। ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने से जहाजों का किराया आसमान छू रहा है। कई कंपनियों ने होर्मुज़ से गुजरना रोक दिया है और अफ्रीका के आसपास लंबे रास्ते से जहाज भेज रही हैं, जिससे खर्च और समय दोनों बढ़ रहे हैं। 

आगे क्या होगा? अगर यह स्थिति लंबी चली तो वैश्विक ईंधन संकट पैदा हो सकता है। भारत सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार शुरू कर दिया है, लेकिन तत्काल समाधान मुश्किल लग रहा है। ईरान की आक्रामकता और अमेरिका-इज़राइल के हमलों के बीच युद्ध की आग और भड़क रही है। दुनिया की निगाहें अब होर्मुज़ पर टिकी हैं – क्योंकि यह कोई छोटी खाड़ी नहीं है, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धमनी है! 

यह संकट दिखाता है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति कितनी नाजुक है। अगर युद्ध जारी रहा तो ईंधन की कीमतों में उछाल, आर्थिक मंदी और आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ेगा। समय आ गया है कि दुनिया इस एकमात्र चोकपॉइंट पर निर्भरता कम करे। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World मार्च-4-2026