300 यात्रियों की 14 घंटे की मार, ₹60 लाख का ईंधन सिर्फ हवा में उड़ा दिया नई
दिल्ली, 20 मार्च 2026: एयर इंडिया ने एक बार फिर अपनी लापरवाही से पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर ली हैं। दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर जा रही फ्लाइट AI-185 को गलत विमान मॉडल में सवार करके भेज दिया गया। नतीजा? लगभग 7 घंटे की उड़ान के बाद चीन के कुनमिंग एयरस्पेस में पहुंचने पर कनाडाई अथॉरिटी ने लैंडिंग की इजाजत नहीं दी, और फ्लाइट को यू-टर्न लेकर वापस दिल्ली लौटना पड़ा। इस पूरी घटना में 300 से ज्यादा यात्रियों को अनावश्यक रूप से 14 घंटे से अधिक की परेशानी झेलनी पड़ी, जबकि एयरलाइन को करोड़ों का नुकसान हुआ।
घटना की पूरी टाइमलाइन
- फ्लाइट का प्रस्थान: गुरुवार (19 मार्च 2026) सुबह 11:34 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से फ्लाइट AI-185 वैंकूवर के लिए रवाना हुई।
- विमान का मॉडल: यात्रियों को बोइंग 777-300 ER में सवार होने की जानकारी दी गई थी, जो कनाडा के लिए अधिकृत मॉडल है।
- असली मॉडल: लेकिन एयर इंडिया ने गलती से बोइंग 777-200 LR मॉडल का इस्तेमाल किया, जिसके लिए कनाडा की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने एयर इंडिया को लैंडिंग परमिशन नहीं दी है।
- खुलासा: उड़ान के लगभग 4 घंटे बाद जब विमान चीन के कुनमिंग एयरस्पेस में पहुंच चुका था, तब कनाडाई एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ को इस गलती का पता चला।
यू-टर्न और वापसी: तुरंत फ्लाइट को यू-टर्न लेने का निर्देश दिया गया। शाम 7:19 बजे यह विमान वापस दिल्ली में लैंड हो गया।
- यात्रियों की स्थिति: सभी 300+ यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। उन्हें रात भर होटल में ठहराया गया और अगले दिन (20 मार्च) सुबह दूसरी फ्लाइट से वैंकूवर भेजा गया।
कनाडा ने सिर्फ B777-300 ER को दी है परमिशन
एविएशन नियमों के मुताबिक हर देश अलग-अलग विमान मॉडल के लिए अलग-अलग परमिशन देता है। कनाडा ने एयर इंडिया को वैंकूवर रूट पर केवल बोइंग 777-300 ER मॉडल के लिए ही लैंडिंग की मंजूरी दी है। LR वर्जन (लॉन्ग रेंज) के लिए अलग से अप्रूवल, अतिरिक्त सर्टिफिकेशन और दस्तावेजों की जरूरत होती है, जो इस फ्लाइट में मौजूद नहीं थे।
यह गलती डिस्पैच टीम, क्रू प्लानिंग और ग्राउंड स्टाफ की मिली-जुली लापरवाही से हुई है। एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी गलती बेहद गंभीर है क्योंकि यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सेफ्टी और रेगुलेटरी कंप्लायंस का भी उल्लंघन है। ईंधन का भारी नुकसान – अनुमानित ₹60 लाख का धुआं! बोइंग
777 सीरीज का एक विमान औसतन प्रति घंटे 8-9 टन जेट फ्यूल खपत करता है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय ईंधन दरों (लगभग ₹90,000 से ₹1,00,000 प्रति टन) को देखते हुए:
- 7 घंटे की उड़ान में कुल 56 से 63 टन ईंधन खर्च हुआ।
- अनुमानित लागत: ₹50 लाख से ₹65 लाख के बीच।
- इसमें क्रू सैलरी, मेंटेनेंस, एयरपोर्ट चार्जेस, ग्राउंड हैंडलिंग और अन्य खर्चे अलग से जुड़ेंगे।
- कुल नुकसान एयरलाइन के लिए आसानी से 1 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच सकता है।
यात्रियों की परेशानी और गुस्सा
- कई परिवारों में छोटे बच्चे थे, जिन्हें 7 घंटे उड़ान के बाद वापस लौटना पड़ा।
- बिजनेस क्लास और प्रीमियम यात्रियों की महत्वपूर्ण मीटिंग्स और कनेक्शन फ्लाइट्स मिस हो गईं।
- सोशल मीडिया पर यात्रियों ने लिखा:
- "एयर इंडिया ने हमें 14 घंटे की यात्रा में सिर्फ 7 घंटे का फ्री टूर कराया!"
- "हमने हजारों रुपये टिकट में दिए, लेकिन एयरलाइन ने हमें गलत प्लेन में बिठाकर 7 घंटे हवा में घुमाया।"
- "क्या एयर इंडिया अब भी टाटा ग्रुप के बाद भी इतनी लापरवाह है?"
एयर इंडिया का आधिकारिक बयान एयर इंडिया ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा: "यह एक ऑपरेशनल इश्यू था। सभी यात्रियों और क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। हमने उन्हें होटल में ठहराया और अगले उपलब्ध फ्लाइट से उनकी यात्रा पूरी कराई। हम इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं और ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।"
लेकिन यात्रियों का कहना है कि एयरलाइन ने उन्हें बीच में ही सिर्फ "तकनीकी कारणों" से वापसी की बात बताई, पूरी जानकारी नहीं दी गई।
DGCA और एविएशन विशेषज्ञों की राय
एविएशन सेफ्टी विशेषज्ञ कैप्टन अजय सिंह ने कहा: "यह कोई छोटी गलती नहीं है। अलग-अलग मॉडल के लिए अलग परमिशन होती है। एयरलाइन को डिस्पैच और क्रू को यह पहले से पता होना चाहिए था। यह सेफ्टी और रेगुलेटरी कंप्लायंस का गंभीर उल्लंघन है। DGCA को इसकी जांच करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।"
एक अन्य एविएशन एनालिस्ट ने नाम न छापने की शर्त पर कहा: "ऐसी गलती से पता चलता है कि एयर इंडिया के ऑपरेशनल कंट्रोल सिस्टम में बड़ी खामी है। एक फ्लाइट को गलत प्लेन में भेजना और फिर 7 घंटे बाद पता चलना – यह अस्वीकार्य है।"
क्या होगी आगे कार्रवाई? सूत्रों के अनुसार एयर इंडिया ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। डिस्पैच टीम, क्रू शेड्यूलिंग और ग्राउंड स्टाफ से जुड़े अधिकारियों पर जांच चल रही है। DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) भी इस घटना की रिपोर्ट मांग सकता है और जरूरत पड़ने पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई कर सकता है।
यह घटना एयर इंडिया के लिए एक बड़ा सबक है। जब देश की प्रमुख एयरलाइन ऐसी बड़ी गलतियां कर रही है, तो यात्रियों का भरोसा टूटता है। अब सवाल यह है कि क्या एयर इंडिया ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपने सिस्टम में बड़े सुधार लाएगी या फिर यह सिर्फ एक और "ऑपरेशनल इश्यू" बनकर रह जाएगा?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 🌎 20 मार्च 2026