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Friday, 20 March 2026

युद्ध के बीच अमेरिका ईरान के तेल पर प्रतिबंध हल्का कर सकता है! ट्रम्प प्रशासन की नई रणनीति, तेल कीमतों में गिरावट की उम्मीद

युद्ध के बीच अमेरिका ईरान के तेल पर प्रतिबंध हल्का कर सकता है! ट्रम्प प्रशासन की नई रणनीति, तेल कीमतों में गिरावट की उम्मीद
-Friday World 🌎 20 March 2026  
वाशिंगटन/तेहरान/मस्कट: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण युद्ध के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में खुलासा किया है कि ट्रम्प प्रशासन ईरान से निकलने वाले तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हल्का करने पर विचार कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता चरम पर है और युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है। 

→ ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा, "हम वास्तविकता को स्वीकार कर रहे हैं। ईरान पहले से ही छिपे-छिपाए या विशेष माध्यमों से कई देशों को तेल बेच रहा है। अब हम उसी तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटा सकते हैं, जिससे बाजार में पहले से मौजूद आपूर्ति और बढ़ जाए और कीमतें नीचे आएं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई स्थायी नीति नहीं है, बल्कि युद्धकालीन आर्थिक स्थिरता के लिए एक व्यावहारिक कदम है।

 यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ने पिछले कुछ महीनों में ईरान पर सबसे सख्त प्रतिबंध लगाए थे। ईरान के तेल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद, तेहरान ने चीन, भारत, तुर्की और कुछ अन्य एशियाई देशों को गुप्त रूप से तेल बेचना जारी रखा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान प्रतिदिन 1.2 से 1.5 मिलियन बैरल तेल का निर्यात कर रहा है, जो प्रतिबंधों के बावजूद काफी हद तक बना हुआ है। अब अमेरिका इस 'वास्तविकता' को मान्यता देकर बाजार में और अधिक तेल आने देना चाहता है ताकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहें। 

→ युद्ध के बीच यह नीति परिवर्तन कई सवाल खड़े करता है। क्या यह अमेरिका की कमजोरी का संकेत है? या फिर यह एक चतुर आर्थिक रणनीति है? ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद अमेरिकी उपभोक्ताओं को सस्ता पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराना और वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह ईरान को अप्रत्यक्ष रूप से राहत देने जैसा है, जिसके खिलाफ अमेरिका अभी भी सैन्य कार्रवाई कर रहा है। 

दूसरी ओर, क्षेत्रीय स्तर पर ओमान ने अमेरिका पर तीखे हमले किए हैं। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ट्रम्प प्रशासन का ईरान के साथ युद्ध शुरू करना उनकी अब तक की सबसे बड़ी गलती साबित हो रही है। यह युद्ध न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गहरी चोट पहुंचा रहा है।" ओमान, जो हमेशा से मध्य पूर्व में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, ने इस युद्ध को 'अनावश्यक और विनाशकारी' करार दिया। 

→ ओमान के विदेश मंत्री ने आगे कहा, "तेल कीमतों में उछाल, शिपिंग रूट्स पर खतरा, और क्षेत्र में अस्थिरता – ये सब इस युद्ध के सीधे परिणाम हैं। दुनिया को शांति और संवाद की जरूरत है, न कि और अधिक संघर्ष की।" ओमान की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम है क्योंकि यह खाड़ी क्षेत्र का एक तटस्थ और संतुलित देश है, जो अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध रखता है। 

वैश्विक तेल बाजार पर इस कदम का क्या असर होगा? विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान के मौजूदा तेल निर्यात पर से प्रतिबंध हटाता है, तो वैश्विक बाजार में प्रतिदिन अतिरिक्त 1-1.5 मिलियन बैरल तेल आ सकता है। इससे ब्रेंट क्रूड और WTI की कीमतों में 5-10 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट आ सकती है। यह उन देशों के लिए राहत होगी जो ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, खासकर यूरोप और एशिया के विकासशील देश।

 लेकिन दूसरी तरफ, सऊदी अरब, यूएई और अन्य ओपेक+ देशों के लिए यह नुकसानदेह हो सकता है। वे पहले से ही उत्पादन कटौती कर बाजार को संतुलित रखने की कोशिश कर रहे हैं। अगर ईरानी तेल बिना किसी प्रतिबंध के बाजार में आएगा, तो उनकी आय प्रभावित होगी। 

→ ईरान की प्रतिक्रिया क्या होगी? ईरान ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि तेहरान इसे अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में देखेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहले ही कहा था कि "प्रतिबंध अमेरिका की अपनी समस्या हैं, हमारा तेल दुनिया को मिलना जारी रहेगा।" अब अगर अमेरिका खुद प्रतिबंध हल्का करता है, तो ईरान इसे अपनी आर्थिक दृढ़ता का प्रमाण बताएगा।

 ट्रम्प प्रशासन की यह नीति युद्ध और कूटनीति के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश लगती है। एक तरफ सैन्य दबाव बनाए रखना, दूसरी तरफ आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना – यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। 

→ निष्कर्ष यह खबर दर्शाती है कि युद्ध के मैदान में कितना भी तनाव क्यों न हो, आर्थिक हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अमेरिका ईरान के तेल पर प्रतिबंध हल्का करके वैश्विक बाजार को राहत देना चाहता है, जबकि ओमान जैसे देश युद्ध को पूरी तरह गलत ठहरा रहे हैं। मध्य पूर्व की यह स्थिति न केवल तेल की कीमतों, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति को भी प्रभावित करेगी।

 क्या यह कदम शांति की दिशा में पहला कदम साबित होगा या युद्ध को और लंबा खींचेगा? आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, तेल बाजार की नजरें वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 🌎 20 March 2026