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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 2 March 2026

"अमेरिका-इज़राइल की जंग का बोझ: भारतीय निवेशकों का ₹8 लाख करोड़ डूबा – सेंसेक्स 2,743 पॉइंट तक गिरा, निफ्टी 24,600 के नीचे!"

"अमेरिका-इज़राइल की जंग का बोझ: भारतीय निवेशकों का ₹8 लाख करोड़ डूबा – सेंसेक्स 2,743 पॉइंट तक गिरा, निफ्टी 24,600 के नीचे!"
-Friday World – 2 March 2026 
अमेरिका-इज़राइल की "गुंडागर्दी" का खामियाजा भारतीय निवेशकों को भुगतना पड़ रहा है! मध्य पूर्व में भड़की युद्ध की आग ने भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह झकझोर दिया। आज (2 मार्च 2026, सोमवार) ब्लैक मंडे बन गया, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। 

अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमलों, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की शहादत, और ईरान के जवाबी हमलों (जिसमें सऊदी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक शामिल है) ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया। 

क्रूड ऑयल की कीमतें 9-10% उछलकर $79-82 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ गया। 

कुल नुकसान कितना?

 - निवेशकों का कुल नुकसान: BSE लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सेशन के ₹463.25-463.50 लाख करोड़ से घटकर ₹455-456.40 लाख करोड़** तक पहुंचा। 

- क्लोजिंग पर नुकसान: लगभग ₹6.84-6.87 लाख करोड़।

 - इंट्राडे पीक पर: ₹7.8-8 लाख करोड़ से ज्यादा का पेपर लॉस (कुछ रिपोर्ट्स में शुरुआती मिनटों में ही ₹8 लाख करोड़+ का नुकसान)।

 - कुल मिलाकर **₹7-8 लाख करोड़ का बड़ा नुकसान दर्ज किया गया, जो भारतीय निवेशकों की कमाई को चट कर गया। 

- यह नुकसान मुख्य रूप से पेपर लॉस है – यानी अगर कोई निवेशक अभी बेचे तो इतना नुकसान होगा। लेकिन अगर स्थिति सुधरती है तो रिकवरी भी संभव है। 

प्रमुख सेक्टर और स्टॉक्स पर असर 

- सबसे ज्यादा प्रभावित: ऑटो, ऑयल एंड गैस, एविएशन, पेंट्स, टायर्स, केमिकल्स (2-5% गिरावट) क्योंकि क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें इनपुट कॉस्ट बढ़ाती हैं। 

- टॉप लूजर्स: L&T (-5%), Adani Ports (-3%), IndiGo, Reliance Industries, ICICI Bank, HDFC Bank आदि। 

- कुछ राहत: अपस्ट्रीम ऑयल (ONGC, Oil India) और डिफेंस स्टॉक्स (HAL, BEL) में मामूली तेजी या कम गिरावट।

 क्यों इतनी भयानक गिरावट? अमेरिका-इज़राइल की कार्रवाई ने ईरान को उकसाया, जिसने जवाब में खाड़ी देशों (सऊदी, UAE, कतर आदि) पर हमले किए। होर्मुज जलडमरूमध्य (दुनिया के 20% तेल सप्लाई का रास्ता) में शिपिंग ठप हो गई, जहाजों पर हमले हुए, एक नाविक की मौत हुई। इससे क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत 85% तेल आयात करता है, इसलिए महंगाई, रुपये में कमजोरी (₹91+ प्रति डॉलर), ट्रेड डेफिसिट और FII आउटफ्लो का डर बढ़ा। ग्लोबल रिस्क-ऑफ मोड में निवेशक सेफ-हेवन (गोल्ड +2-3%) की ओर भागे। 

युद्ध का असली बोझ आम आदमी पर! यह सिर्फ शेयर बाजार की गिरावट नहीं, बल्कि अमेरिका-इज़राइल की "गुंडागर्दी" का सीधा असर है जो भारतीय निवेशकों और आम जनता पर पड़ रहा है। ऊंची महंगाई, पेट्रोल-डीजल महंगा होना, रोजमर्रा की चीजों पर असर – सब कुछ इसी जंग से जुड़ा है। दुनिया अब सांस थामे देख रही है कि क्या डिप्लोमेसी काम करेगी या युद्ध और भयानक रूप लेगा। निवेशकों को सलाह: पैनिक सेलिंग से बचें, लॉन्ग-टर्म में ऐसे संकट अक्सर रिकवर हो जाते हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म में वोलेटिलिटी बनी रहेगी।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World – 2 March 2026