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नई दिल्ली/अहमदाबाद, 26 मार्च 2026: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण युद्ध ने अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विश्व स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जबकि हार्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में तेल आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। इसी संकट के बीच भारत की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर कंपनी **नायरा एनर्जी** (Nayara Energy) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है।
यह बढ़ोतरी वैश्विक तेल संकट को भारतीय बाजार में प्रतिबिंबित करती है। सरकारी कंपनियां अभी भी कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, लेकिन नायरा ने इनपुट लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला लिया है।
कीमतों में कितना हुआ इजाफा? नायरा एनर्जी ने आज यानी 26 मार्च 2026 से प्रभावी रूप से पेट्रोल में प्रति लीटर 5 से 5.30 रुपये तक की बढ़ोतरी की है, जबकि डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। राज्यवार वैट और अन्य स्थानीय करों के कारण वास्तविक बढ़ोतरी अलग-अलग हो सकती है।
अहमदाबाद में नायरा के पंपों पर नई कीमतें इस प्रकार हैं:
- पेट्रोल: लगभग 99.65 रुपये प्रति लीटर - डीजल: लगभग 93.07 रुपये प्रति लीटर अन्य प्रमुख शहरों में स्थिति और भी चिंताजनक है:
- हैदराबाद: पेट्रोल 107.46 रुपये प्रति लीटर, डीजल 95.70 रुपये प्रति लीटर
- मुंबई: पेट्रोल 100 रुपये से ऊपर (लगभग 103.54 रुपये + बढ़ोतरी)
- कोलकाता: पेट्रोल 100 रुपये के पार (लगभग 105.41 रुपये + बढ़ोतरी)
देश के कई मेट्रो शहरों में पेट्रोल अब 100-110 रुपये के दायरे में पहुंच गया है, जो आम आदमी की रोजमर्रा की यात्रा, परिवहन और सामानों की कीमतों पर सीधा असर डालेगा।
क्यों आई यह बढ़ोतरी? युद्ध और सप्लाई चेन का संकट 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमलों के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी। ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज लगभग बंद जैसी स्थिति बन गई है। यह खाड़ी दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG का परिवहन करती है। भारत जैसे देश जो 80-90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करते हैं और उसमें बड़ा हिस्सा हॉर्मुज रूट से गुजरता है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के एनर्जी प्लांट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ। परिणामस्वरूप:
- ब्रेंट क्रूड की कीमतें 50 प्रतिशत तक उछल गईं।
- वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई।
- भारत में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगी हैं।
- LPG सिलिंडर के लिए डिपो पर घंटों इंतजार और कुछ इलाकों में पैनिक बाइंग शुरू हो गई है।
असम, गुवाहाटी जैसे क्षेत्रों में सोशल मीडिया पर कमी की अफवाहों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
नायरा एनर्जी, जिसके देशभर में लगभग 7,000 पेट्रोल पंप हैं और जो रूस की रोसनेफ्ट द्वारा बहुलांश स्वामित्व वाली है, ने वैश्विक कीमतों में उछाल का हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का फैसला किया। यह लंबे समय से चली आ रही कीमत फ्रीज की नीति को तोड़ने वाला पहला बड़ा कदम है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा प्रभाव:
- किराना सामान, सब्जी-फल, दूध आदि की कीमतों पर
- ट्रक, बस, ऑटो जैसे वाहनों के किराए पर
- उद्योगों की उत्पादन लागत पर
- मुद्रास्फीति (Inflation) के बढ़ने पर
LPG सिलिंडर की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। घरेलू सिलिंडर की कीमत में हाल में उछाल आया है, जबकि व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं पर बोझ और बढ़ गया है। कई रेस्तरां और छोटे व्यापारी गैस की कमी से जूझ रहे हैं – कुछ ने मेन्यू छोटा कर दिया, कुछ ने इंडक्शन कुकर पर स्विच किया है।
सरकार की भूमिका और आगे क्या? सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) अभी भी सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों को फ्रीज रखे हुए हैं, जो बाजार के 90 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करती हैं। लेकिन अगर संकट लंबा चला तो उन्हें भी दबाव बढ़ सकता है।
भारत सरकार ने पहले ही आपातकालीन उपाय अपनाए हैं – घरेलू LPG सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है और उद्योगों से कुछ मात्रा डायवर्ट की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हॉर्मुज की स्थिति सामान्य नहीं हुई तो अगले कुछ महीनों में और महंगाई का खतरा है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य यह संकट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। एशिया के कई देश तेल आयात पर निर्भर हैं। अमेरिका में भी गैसोलीन की कीमतें बढ़ रही हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर युद्ध बढ़ा तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित होगा।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
- अनावश्यक यात्राएं कम करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कारपूलिंग का इस्तेमाल करें।
- वाहन की ईंधन दक्षता बढ़ाएं – नियमित सर्विसिंग और सही टायर प्रेशर।
- LPG का संयमित उपयोग करें, अफवाहों पर ध्यान न दें।
- बजट में ईंधन और परिवहन खर्च का अतिरिक्त प्रावधान रखें।
यह बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआत हो सकती है। मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। अगर कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम हुआ और हॉर्मुज फिर से खुला तो राहत मिल सकती है, अन्यथा आम आदमी की जेब और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ता रहेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 26,2026