-Friday World March 29,2026
वाशिंगटन/अटलांटा/मिनियापोलिस, २९ मार्च २०२६: अमेरिका की सड़कें एक बार फिर गूंज उठीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी के खिलाफ 'नो किंग्स' (No Kings) आंदोलन का तीसरा बड़ा दौर २८ मार्च २०२६ को पूरे देश में फैल गया। आयोजकों के अनुसार, **८० लाख से ९० लाख** लोगों ने ३,३०० से अधिक स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। यह अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा एक दिवसीय गैर-हिंसक विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप को "किंग" (राजा) कहकर संबोधित किया और नारे लगाए — "No Kings in America", "Trump Must Go Now", "No War on Iran", "Hands Off Our Democracy"। मुख्य मुद्दे थे: आक्रामक इमिग्रेशन एन्फोर्समेंट (ICE ऑपरेशंस), जिसमें हाल के गोलीकांड शामिल हैं, महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और ईरान के साथ चल रही सैन्य कार्रवाई।
अटलांटा, वॉशिंगटन और मिशिगन में भारी भीड़ जॉर्जिया की अटलांटा में मेमोरियल ड्राइव पर हजारों लोग मार्च निकालकर राज्य कैपिटल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने "We Are Losing Our Democracy" जैसे संदेश वाले बैनर लहराए। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "चीजें सामान्य नहीं हैं। हम अपनी लोकतंत्र खो रहे हैं।"
वॉशिंगटन डीसी में लिंकन मेमोरियल के पास उल्टा अमेरिकी झंडा लेकर लोग जमा हुए। "Fight Fascism" और "Trump is a Dictator" के नारे गूंजे। मिशिगन में १२८ स्थानों पर प्रदर्शन हुए। कांग्रेसवुमन राशिदा त्लैब ने लांसिंग में २,००० लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन एजेंटों के जरिए समुदायों को आतंकित कर रहा है और ईरान युद्ध ने आम अमेरिकियों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है।
मिनेसोटा के स्टेट कैपिटल में फ्लैगशिप रैली हुई, जहां ब्रूस स्प्रिंगस्टीन जैसी हस्तियों ने प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाया। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर, शिकागो, लॉस एंजेलिस, फिलाडेल्फिया और सिएटल समेत सभी प्रमुख शहरों में सड़कें प्रदर्शनकारियों से पट गईं। छोटे शहरों और उपनगरों में भी सैकड़ों रैलियां हुईं, जो इस आंदोलन की व्यापक पहुंच को दर्शाती हैं।
ईरान जंग ने विरोध को नई ऊर्जा दी ट्रंप प्रशासन द्वारा इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर सैन्य हमले (जिसमें ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की धमकी भी शामिल है) ने विरोध को और तेज कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना युद्ध शुरू किया गया, जिससे गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई जगहों पर "No Blood for Oil" और "End the War on Iran" के बैनर दिखे।
आयोजक समूह (Indivisible और अन्य प्रोग्रेसिव संगठनों का गठबंधन) ने इसे "अमेरिका में राजा नहीं" का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन एजेंटों को "सीक्रेट पुलिस" की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जो समुदायों में आतंक फैला रहा है। हाल के ICE ऑपरेशंस में हुई गोलीबारी की घटनाएं (जैसे Renée Good, Keith Porter और Alex Pretti की मौत) ने गुस्से को भड़काया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिध्वनि प्रदर्शन सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहे। एम्स्टर्डम, मैड्रिड, रोम, लंदन, पेरिस और कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत १५ से अधिक देशों में रैलियां हुईं। प्रदर्शनकारियों ने वैश्विक लोकतंत्र और शांति की अपील की। यूरोपीय शहरों में भी "No Kings" बैनर और ईरान युद्ध के खिलाफ नारे सुनाई दिए।
ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट मार्च २०२६ के पोल्स में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग ३६-४२% के बीच बताई जा रही है, जबकि डिसअप्रूवल ५६-६०% तक पहुंच गई है। ईरान युद्ध और इमिग्रेशन नीतियों ने उनकी लोकप्रियता को और नुकसान पहुंचाया है। स्वतंत्र मतदाताओं में असंतोष और ज्यादा है। आगामी मिडटर्म चुनावों को देखते हुए सियासी माहौल तेजी से गरम हो रहा है।
व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को "रेडिकल लेफ्ट" का काम बताया और कहा कि यह लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन नीतियां नहीं बदलेंगी। राष्ट्रपति ट्रंप फ्लोरिडा में गोल्फ खेलते नजर आए, जबकि देशभर में लाखों लोग सड़कों पर थे।
प्रदर्शनकारियों की आवाज एक युवा प्रदर्शनकारी (अटलांटा) ने कहा, "हम इंट्रोवर्ट भी सड़क पर आ गए हैं क्योंकि स्थिति इतनी खराब है।" मिनियापोलिस में एक महिला ने बताया, "यह सिर्फ ट्रंप के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य, शांति और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।"
आयोजकों ने जोर दिया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन निरंतर रहेगा। उन्होंने सभी ५० राज्यों में स्थानीय स्तर पर संगठन बनाने की अपील की।
क्या कहते हैं विश्लेषक? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'नो किंग्स' आंदोलन २०२५ के दो पिछले दौरों से ज्यादा प्रभावी साबित हो रहा है। यह न सिर्फ बड़े शहरों, बल्कि ग्रामीण और रिपब्लिकन इलाकों तक पहुंच रहा है। ईरान युद्ध जैसे मुद्दे ने इसे व्यापक जनसमर्थन दिलाया है।
ट्रंप प्रशासन के आलोचक कहते हैं कि यह "अथॉरिटेरियन" रवैया अमेरिकी लोकतंत्र के लिए खतरा है। वहीं समर्थक इसे "राष्ट्र की सुरक्षा" के लिए जरूरी बताते हैं।
आगे क्या? आगामी दिनों में और प्रदर्शन की संभावना है। संगठन 'No Kings' ने वेबसाइट पर स्थानीय लाइवस्ट्रीम और आगे की रणनीति साझा की है। यह आंदोलन न सिर्फ ट्रंप की नीतियों के खिलाफ है, बल्कि अमेरिका में लोकतंत्र, समानता और शांति की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है।
अमेरिका की सड़कों पर लाखों लोगों का यह एकजुट प्रदर्शन इतिहास में दर्ज हो गया है। चाहे कोई इसे "लेफ्ट विंग" का प्रदर्शन कहे या "लोकतंत्र की आवाज", एक बात साफ है — अमेरिकी जनता चुप नहीं बैठने वाली।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 29,2026