-Friday World 1st March 2026
तेहरान में हुए बर्बरतापूर्ण हमले के बाद पूरी दुनिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हवाई हमले में मौत (शहादत) की पुष्टि हो चुकी है। 86 वर्षीय इस शक्तिशाली नेता की हत्या को अब रूस और चीन ने खुलकर 'हत्या' और 'अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन' करार दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे "मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी मानकों का घोर उल्लंघन" बताते हुए कड़ी निंदा की है। वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने इसे "ईरान की संप्रभुता पर हमला" और "संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन" कहा है। दोनों महाशक्तियों ने सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की अपील की है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति को संदेश भेजते हुए कहा, "खामेनेई की हत्या एक निंदनीय कृत्य है, जो सभी नैतिक और कानूनी सीमाओं को लांघता है। रूस में उन्हें एक महान राजनेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने रूस-ईरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया।" पुतिन ने स्पष्ट किया कि यह हमला सिर्फ ईरान पर नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था पर हमला है। रूस ने पहले से ही ईरान के साथ गहरे सैन्य और आर्थिक संबंध बनाए हैं, और अब यह घटना दोनों देशों को और करीब ला सकती है।
दूसरी ओर चीन ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "ईरान के सर्वोच्च नेता पर हमला और उनकी हत्या ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का खुला उल्लंघन है। चीन इसका कड़ा विरोध करता है और इसकी घोर निंदा करता है। हम सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने, तनाव बढ़ने से बचाने और मध्य पूर्व तथा विश्व में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त प्रयास करने की अपील करते हैं।" चीन ने ईरान के साथ अपनी 'बेल्ट एंड रोड' पहल और ऊर्जा व्यापार को मजबूत किया है, और अब यह निंदा अमेरिका-इज़रायल गठबंधन के खिलाफ एक बड़ा संदेश है।
यह घटना अब वैश्विक राजनीति में एक नया मोड़ ला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब किसी भी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या सर्वोच्च नेता पर सीधा हमला करना आसान नहीं रहेगा। यह पूर्वव्यापी उदाहरण बन गया है कि बड़े नेता भी सुरक्षित नहीं हैं। ईरान ने पहले ही अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, और रूस-चीन का समर्थन मिलने से स्थिति और जटिल हो गई है। मध्य पूर्व में युद्ध की आग भड़क सकती है, और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका और इज़रायल पर इसका सीधा असर पड़ना तय है। रूस और चीन जैसे परमाणु शक्ति संपन्न देशों की निंदा से पश्चिमी देशों पर दबाव बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र में बहस तेज हो सकती है, जहां रूस और चीन अमेरिका-इज़रायल के खिलाफ प्रस्ताव ला सकते हैं। ईरान के नए नेतृत्व (जिसमें मोहतबा खामेनेई या अंतरिम परिषद) को अब रूस-चीन से मजबूत समर्थन मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है।
यह समय इतिहास के काले पन्नों पर लिखा जा रहा है। एक नेता की हत्या ने न सिर्फ ईरान को हिलाया है, बल्कि पूरी दुनिया की शक्ति संरचना को चुनौती दी है। रूस और चीन का ईरान के साथ खड़ा होना दिखाता है कि अब बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था मजबूत हो रही है। क्या यह बदला क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा? या शांति के प्रयास सफल होंगे? दुनिया की नजरें तेहरान, मॉस्को और बीजिंग पर टिकी हैं।
ईरान कह रहा है – "बदला हमारा हक है!" और रूस-चीन साथ हैं। आने वाले दिनों में क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 1st March 2026