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Thursday, 26 March 2026

युद्ध उन्मादी अमेरिका-इजरायल ईरान से पूरी तरह हार चुका, फिर भी शर्तें थोपने की कोशिश लेकिन ईरान ने ठुकरा दिया

युद्ध उन्मादी अमेरिका-इजरायल ईरान से पूरी तरह हार चुका, फिर भी शर्तें थोपने की कोशिश लेकिन ईरान ने ठुकरा दिया-Friday World March 26,2026 
मध्य पूर्व में चल रहे इस भीषण संघर्ष में अमेरिका-इजरायल गठबंधन की स्थिति बेहद कमजोर दिख रही है। युद्ध के कई हफ्तों बाद भी ईरान न सिर्फ टिके हुए हैं, बल्कि अब वे आक्रामक जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। ईरान ने अमेरिका-इजरायल की किसी भी शर्त को सिरे से ठुकरा दिया है और सीधे अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर मिसाइल हमले का दावा किया है। ईरान स्पष्ट संदेश दे रहा है कि वह युद्ध जारी रखेगा और किसी भी दबाव में अपनी शर्तों पर ही बातचीत करेगा। 

यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ बातचीत के संकेत दे रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ सैन्य दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। ईरान की मजबूत प्रतिक्रिया ने पूरे क्षेत्र को फिर से अस्थिर कर दिया है। 

अब्राहम लिंकन पर ईरानी मिसाइल हमला: नया मोड़ 

ईरानी सेना और नौसेना ने हाल ही में दावा किया कि उन्होंने तटीय क्रूज मिसाइलों (खासकर क़ादेर मिसाइलें) से अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया और सैन्य प्रवक्ताओं के अनुसार, मिसाइलें लॉन्च करने के बाद अमेरिकी कैरियर ग्रुप को अपनी स्थिति बदलनी पड़ी और वह पीछे हट गया। ईरानी नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने कहा कि अब्राहम लिंकन की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखी जा रही है और जैसे ही यह ईरानी मिसाइल रेंज में आएगा, उसे शक्तिशाली हमलों का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिकन युद्ध पोत अब्राहम लिंकन निशाने पर 

ईरान ने इसे अपनी मजबूती का प्रतीक बताते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना अब क्षेत्र में दबाव महसूस कर रही है। कुछ रिपोर्ट्स में एक अमेरिकी नाविक के घायल होने की भी पुष्टि हुई है, हालांकि अमेरिकी पक्ष इसे नॉन-कॉम्बेट घटना बता रहा है। 

यह हमला उस पृष्ठभूमि में हुआ जब ईरान पहले ही इजरायल पर मिसाइल हमले कर चुका था और अब अमेरिकी ठिकानों को भी सीधे चुनौती दे रहा है। ईरान का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई “आक्रामकता” के खिलाफ है और आगे भी ऐसी कार्रवाइयां जारी रहेंगी। 

 अमेरिका-इजरायल की हार शुरूआती दौर में दोनों देशों ने दावा किया कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। लेकिन वास्तविकता कुछ और ही निकली। ईरान ने न सिर्फ जवाबी हमले जारी रखे, बल्कि अपने “प्रतिरोध मोर्चे” (रेजिस्टेंस एक्सिस) को सक्रिय कर दिया।

  अमेरिकी राष्ट्रपति का प्रस्ताव, ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। तेहरान का रुख साफ है – कोई भी बातचीत केवल अपनी शर्तों पर होगी, जिसमें इजरायल पर हमले बंद करना, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति घटाना और ईरानी संप्रभुता का सम्मान शामिल है। ईरान किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं दिख रहा। 

 खार्ग द्वीप और होर्मुज-बाब अल-मंडेब का खतरा ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा या हमला करने की कोशिश करता है तो वह बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को नियंत्रित कर लेगा। होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही प्रभावित है, जहां से विश्व के २० प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। अब बाब अल-मंडेब (जिसे “दर्द का द्वार” भी कहा जाता है) बंद होने पर यूरोप के लिए सुएज नहर का रास्ता भी खतरे में पड़ जाएगा। 

ईरान यमन के हूथी स्वतंत्र सेनानियों को समर्थन देता है, जो रेड सी में पहले भी जहाजों पर हमले कर चुके हैं। अगर ईरान उन्हें और सक्रिय करता है तो वैश्विक शिपिंग और तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। ईरान का यह रणनीतिक कदम अमेरिका-इजरायल को जंग से बाहर निकलने के लिए मजबूर करने का प्रयास लगता है। 

 ईरान की मजबूती और अमेरिका की दुविधा ईरान ने साबित कर दिया है कि उसकी मिसाइल क्षमता, ड्रोन तकनीक और क्षेत्रीय सहयोगी (हूथी, हिजबुल्लाह आदि) अभी भी मजबूत हैं। अमेरिका-इजरायल गठबंधन भले ही तकनीकी रूप से आगे हो, लेकिन लंबे युद्ध में ईरान की “असिमेट्रिक वॉरफेयर” (असमान युद्ध) रणनीति उन्हें परेशान कर रही है। 

ट्रंप प्रशासन अब दोहरी नीति लेकिन ईरान के पास अमेरिका से ज्यादा स्ट्रेटेजी – एक तरफ बातचीत का प्रस्ताव, दूसरी तरफ ३,००० से अधिक सैनिकों की तैनाती और खार्ग द्वीप पर संभावित ऑपरेशन की चर्चा। लेकिन ईरान का रुख सख्त है। तेहरान कह रहा है कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक अमेरिका-इजरायल क्षेत्र से पीछे नहीं हटते। 

वैश्विक असर: तेल की कीमतें और अर्थव्यवस्था इस संघर्ष से विश्व स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। होर्मुज और बाब अल-मंडेब दोनों स्ट्रेट्स प्रभावित होने पर भारत जैसे तेल आयातक देशों को भारी नुकसान हो सकता है। महंगाई बढ़ेगी, शिपिंग लागत आसमान छू सकती है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

 यूरोपीय देश सुएज नहर पर निर्भर हैं, जबकि एशिया और अमेरिका भी इस क्षेत्र से आने वाले तेल पर आंशिक रूप से निर्भर हैं। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो वैश्विक मंदी का खतरा भी मंडरा सकता है। 

शांति की राह कब? अमेरिका-इजरायल गठबंधन ईरान को कमजोर समझकर युद्ध शुरू किया था, लेकिन अब स्थिति उलट गई लगती है। ईरान अब्राहम लिंकन जैसे प्रतीकात्मक लक्ष्यों को निशाना बनाकर अपनी मजबूती दिखा रहा है और किसी भी शर्त को ठुकरा रहा है। वह जंग जारी रखने और अपनी शर्तों पर बातचीत करने की बात कर रहा है।

 यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है। यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और स्थिरता को प्रभावित कर रहा है। दोनों पक्षों को समझना होगा कि लंबा युद्ध किसी के हित में नहीं है। कूटनीति और संवाद ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन फिलहाल ईरान का सख्त रुख और अमेरिका-इजरायल की जिद से स्थिति और जटिल होती जा रही है। 

दुनिया उम्मीद कर रही है कि जल्द कोई समझौता हो, वरना मध्य पूर्व की यह आग पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले सकती है।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 26,2026