-Friday World March 26,2026
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की आग अभी पूरी तरह बुझी नहीं है कि ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक और गंभीर झटका देने की चेतावनी दे दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर देने के बाद अब ईरान बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को निशाना बनाने की धमकी दे रहा है। यह धमकी अमेरिका द्वारा ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर संभावित सैन्य कार्रवाई के जवाब में आई है।
वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तेल और एलएनजी सप्लाई का लगभग २० प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान ने संघर्ष शुरू होने के बाद इस मार्ग को व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया है, जिससे केवल कुछ मंजूर जहाजों को ही गुजरने की अनुमति है। परिणामस्वरूप तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
खार्ग द्वीप: ईरान की तेल अर्थव्यवस्था की धमनी खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा द्वीप है, जो ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग ९० प्रतिशत संभालता है। यह द्वीप ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिकी प्रशासन इस द्वीप को कब्जे में लेने या ब्लॉक करने की योजना पर विचार कर रहा है ताकि ईरान पर दबाव बढ़ाया जा सके और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खुलवाया जा सके।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका खार्ग द्वीप पर जमीन से सैनिक उतारने (ग्राउंड ऑपरेशन) की संभावना तलाश रहा है। इसके लिए मरीन्स की एम्फीबियस यूनिट्स और आर्मी की ८२वीं एयरबोर्न डिवीजन की ब्रिगेड (लगभग ३,००० सैनिक) को क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी चल रही है। ईरान भी इस खतरे को भांपते हुए द्वीप पर माइन्स बिछा रहा है, अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है और एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत कर रहा है।
ट्रंप प्रशासन एक तरफ बातचीत के संकेत दे रहा है, लेकिन दूसरी तरफ सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। इस दोहरी रणनीति से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ रहा है।
ईरान की चेतावनी: बाब अल-मंडेब स्ट्रेट पर नया मोर्चा ईरान ने स्पष्ट कहा है कि अगर खार्ग द्वीप या उसके क्षेत्र पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हुई तो वह एडन की खाड़ी से लाल सागर और सुएज नहर की ओर जाने वाले जलीय मार्ग को प्रभावित कर सकता है। यह मार्ग बाब अल-मंडेब स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जो वैश्विक व्यापार का एक और महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है।
ईरान के सैन्य सूत्रों ने तस्नीम न्यूज एजेंसी को बताया कि “प्रतिरोध मोर्चा” के अन्य मोर्चे खुल सकते हैं। इसमें यमन के हूथी स्वतंत्र सेनानी शामिल हो सकते हैं, जो ईरान के वफादार सहयोगी माने जाते हैं। हूथी स्वतंत्र सेनानियों ने पहले भी रेड सी में जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे शिपिंग लागत कई गुना बढ़ गई थी।
ईरान इन स्वतंत्र सेनानियों को हथियार, उपकरण और आर्थिक सहायता प्रदान करता है। अगर ईरान उन्हें सक्रिय करता है तो बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रोकना या उन्हें खतरे में डालना मुश्किल नहीं होगा। इससे यूरोप के लिए सुएज नहर का रास्ता प्रभावित होगा और सऊदी अरब के पश्चिमी तट से आने वाला तेल भी असर में आ सकता है।
दोनों स्ट्रेट्स की वैश्विक अहमियत
- होर्मुज स्ट्रेट: दुनिया के तेल और एलएनजी का करीब २० प्रतिशत गुजरता है। वर्तमान में यातायात लगभग ठप है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
- बाब अल-मंडेब स्ट्रेट: वैश्विक व्यापार का करीब १० प्रतिशत और यूरोप के लिए महत्वपूर्ण तेल शिपमेंट यहां से होता है।
अगर दोनों मार्ग प्रभावित हुए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों में महंगाई बढ़ सकती है, शिपिंग लागतें आसमान छू सकती हैं और ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
हूथी स्वतंत्र सेनानी: ईरान का विश्वसनीय सहयोगी हूथी स्वतंत्र सेनानी ईरान के रणनीतिक साझेदार हैं। उन्होंने अतीत में रेड सी में १०० से अधिक हमले किए हैं। ईरान के समर्थन से वे मिसाइल और ड्रोन हमलों में सक्षम हैं। ईरानी सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर कार्रवाई करता है तो “नए स्तर” की प्रतिक्रिया हो सकती है, जिसमें बाब अल-मंडेब स्ट्रेट भी शामिल है।
ट्रंप की रणनीति और जोखिम ट्रंप प्रशासन होर्मुज को फिर से खोलने के लिए सहयोगी देशों पर दबाव डाल रहा है, लेकिन सैन्य तैयारी भी तेज है। २,००० से अधिक मरीन्स और ३,००० एयरबोर्न सैनिकों की तैनाती से लगता है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहता है। खार्ग द्वीप पर ग्राउंड ऑपरेशन उच्च जोखिम वाला होगा, क्योंकि द्वीप छोटा है लेकिन भारी सुरक्षा वाला है।
ईरान ने भी द्वीप को “किला” बनाने की कोशिश की है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ता तनाव युद्ध को और व्यापक बना सकता है।
शांति की सख्त जरूरत होर्मुज का हाहाकार जारी है और ईरान बाब अल-मंडेब के जरिए दूसरा बड़ा तेल फांसला डालने की तैयारी दिखा रहा है। हूथी स्वतंत्र सेनानी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। यह स्थिति न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक है।
वैश्विक समुदाय को तत्काल कूटनीतिक प्रयास करके तनाव कम करना चाहिए। युद्ध की आग और तेल के फांसलों से कोई भी देश अछूता नहीं रहेगा। शांति और स्थिरता ही सभी देशों के हित में है। दोनों पक्षों को समझौते की राह पर लौटना होगा, वरना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को अपूरणीय नुकसान पहुंच सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 26,2026