-Friday World March 18,2026
ईरान और इज़रायल के बीच चल रहा यह युद्ध अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। जहां शुरू में अमेरिका और इज़रायल लगातार यह नैरेटिव फैला रहे थे कि ईरान का मिसाइल जखीरा ख़त्म हो रहा है, वहीं हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पिछले एक हफ्ते से ईरान की ओर से इज़रायल पर हमलों की तीव्रता और निरंतरता ऐसी है कि इज़रायल की उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम—आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो—अब लगभग बेअसर नजर आ रही हैं। ईरान रोज़ाना 10-20 से ज्यादा मिसाइल सैल्वो (salvos) दाग रहा है, और इज़रायल को सांस लेने का मौका तक नहीं मिल रहा। यह सिर्फ सैन्य हमला नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध का एक खतरनाक दौर है—जहां ईरान कह रहा है: "तुम हर पल हमले की आशंका में जीयो।"
शुरुआती रणनीति: पुरानी मिसाइलों से एयर डिफेंस को कमजोर करना युद्ध की शुरुआत में ईरान ने एक चतुर रणनीति अपनाई। उसने जानबूझकर पुरानी और कम सटीक मिसाइलों की भारी मात्रा में बरसात की। इसका मकसद था इज़रायल और अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करना और उनकी क्षमता को खत्म करना। ईरान जानता था कि इन हमलों में उसकी कई मिसाइलें बर्बाद होंगी, लेकिन नतीजा मिला भी वैसा ही। इज़रायल के मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम पर इतना दबाव पड़ा कि वे अब नए और उन्नत हमलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
चार-पांच दिनों के बाद ईरान ने अपनी असली ताकत दिखानी शुरू की। अब वह 5 अलग-अलग प्रकार की आधुनिक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल कर रहा है—जिनकी स्पीड, ट्रैजेक्टरी, प्रोजेक्शन और अटैक पैटर्न सब अलग हैं। कुछ हाइपरसोनिक हैं, कुछ क्लस्टर वारहेड्स से लैस, जो मिड-एयर में बिखरकर इंटरसेप्शन को नामुमकिन बना देते हैं। नतीजा? इज़रायल अब एक भी मिसाइल को पूरी तरह रोक नहीं पा रहा। हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि तेल अवीव, रामत गान, होलोन और अन्य शहरों में मिसाइलों के टुकड़े और क्लस्टर मुनिशन्स गिर रहे हैं, जिससे नागरिक इलाकों में तबाही मच रही है।
अब हकीकत यह है कि अगर ईरान अब हाथ से कोई पत्थर या गोला फेंके, तो शायद इज़रायल उसे भी रोक न पाए। एयर डिफेंस का यह हाल इज़रायल के लिए सबसे बड़ा झटका है—जो सालों से खुद को "अजेय" बताता आया है।
खाड़ी में अमेरिका की मौजूदगी: फिफ्थ फ्लीट अब बेअसर अमेरिका की बहरीन स्थित फिफ्थ फ्लीट, जो मिडिल ईस्ट में उसकी सबसे बड़ी नौसैनिक ताकत है, अब पूरी तरह से प्रभावहीन हो चुकी है। सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की हालत भी पस्त है। ईरान अब खाड़ी देशों—UAE, सऊदी अरब, कुवैत आदि—पर भी हमले कर रहा है, लेकिन तरीका बिल्कुल अलग है। वह पहले ट्वीट या बयान जारी करके चेतावनी देता है: "फलां इलाके पर हमला होगा, वहां से दूर रहें।" फिर ड्रोन या मिसाइल दाग देता है। यह न सिर्फ सैन्य हमला है, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव का नया हथियार है—जिससे नागरिकों में दहशत फैलती है और आर्थिक गतिविधियां ठप हो जाती हैं।
ईरान ने यह सब पिछले एक साल में अपने टॉप नेतृत्व के भारी नुकसान के बावजूद किया है। कई शीर्ष जनरल, अफसर और नेता शहीद हुए, लेकिन ईरान ने अपना सॉलिड बैकअप सिस्टम तैयार रखा। IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) का स्ट्रक्चर इतना मजबूत है कि नेतृत्व के बदलाव से लड़ाई की रफ्तार कम नहीं हुई। यह लंबी प्लानिंग और गहरी रणनीति का नतीजा है।
नेतन्याहू का दु:स्वप्न और दोनों तरफ बढ़ता विरोध इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके रक्षा मंत्री ने सालों से ईरान पर हमले का सपना देखा था—कहा जाता है 40-47 साल से। आज वही सपना उनके लिए काला दु:स्वप्न बन चुका है। इज़रायल में पहली बार अमेरिका के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं—लोग कह रहे हैं कि अमेरिका सही मदद नहीं कर रहा। वहीं अमेरिका में इज़रायल के खिलाफ गुस्सा है—क्योंकि कई लोग मानते हैं कि इज़रायल ने अमेरिका को बेवजह इस युद्ध में घसीटा।
दोनों सहयोगी अब एक-दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं। दोनों की "पतलून फटी हुई" है, और दोनों चाहते हैं कि सामने वाला आए और रफू कर दे। लेकिन हकीकत यह है कि युद्ध अब दोनों के बस से बाहर होता जा रहा है। ईरान की तरफ से हमले की इंटेंसिटी बढ़ती जा रही है, जबकि इज़रायल और अमेरिका की डिफेंस क्षमता कमजोर पड़ रही है।
युद्ध का नया सामान्य यह युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों का नहीं रहा—यह इच्छाशक्ति, रणनीति और मनोबल का युद्ध है। ईरान ने साबित कर दिया है कि प्रतिबंधों, हमलों और नेतृत्व के नुकसान के बावजूद वह लड़ सकता है और लड़ेगा। इज़रायल, जो कभी "अजेय" माना जाता था, आज हर पल सायरन की आवाज में जी रहा है। अमेरिका की सुपरपावर इमेज भी धूमिल पड़ रही है।
दुनिया को देखना चाहिए कि नैरेटिव कितना झूठा हो सकता है। शुरू में कहा गया था—"ईरान खत्म हो जाएगा"—लेकिन आज ईरान इज़रायल को हर रोज़ चुनौती दे रहा है। यह युद्ध कब खत्म होगा, कोई नहीं जानता। लेकिन एक बात साफ है: ईरान ने नियम बदल दिए हैं, और अब इज़रायल-अमेरिका को नए सिरे से सोचना पड़ेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 18,2026