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Thursday, 26 March 2026

ईरान का सख्त संदेश: "बातचीत नहीं, प्रतिरोध जारी रहेगा" — अमेरिका के मध्यस्थ संदेशों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री अराग़ची का बड़ा बयान

ईरान का सख्त संदेश: "बातचीत नहीं, प्रतिरोध जारी रहेगा" — अमेरिका के मध्यस्थ संदेशों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री अराग़ची का बड़ा बयान
-Friday World March 26,2026
तेहरान, 26 मार्च 2026: मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा मध्यस्थों के जरिए भेजे गए संदेशों पर ईरान ने साफ़-साफ़ जवाब दे दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने राज्य टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में कहा कि ये संदेश "न तो बातचीत हैं, न मोल-भाव और न ही कोई औपचारिक संवाद"। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की नीति अभी भी अपनी सुरक्षा और प्रतिरोध की है, और "अभी बातचीत का कोई इरादा नहीं है"। 

अराग़ची ने स्पष्ट किया, "कई दिनों से अमेरिका ने अलग-अलग मध्यस्थों के ज़रिए संदेश भेजना शुरू कर दिया है। मित्रवत देशों के माध्यम से ये संदेश आए, जिनका हमने जवाब अपनी स्थिति बताते हुए और चेतावनी देकर दिया है। लेकिन यह बातचीत नहीं है।" 

युद्ध का बढ़ता दायरा और ट्रंप का शांति प्रस्ताव यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजराइल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की प्रत्यक्ष भागीदारी के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि वॉशिंगटन शांति योजना प्रस्तुत कर रहा है और अप्रत्यक्ष संपर्क हो रहे हैं। लेकिन तेहरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

 अराग़ची ने कहा, "यह इसराइल की लड़ाई है और अमेरिका के साथ ही इस इलाके के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं।" उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि पहले तो वह "अनकंडीशनल सरेंडर" (बिना शर्त समर्पण) की मांग कर रहा था, अब अचानक बातचीत की बात कर रहा है — जो उनकी नजर में "हार का स्वीकारोक्ति" है। 

ईरान के अनुसार, संदेशों का आदान-प्रदान मध्यस्थ देशों (जिनमें पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश शामिल बताए जा रहे हैं) के जरिए हो रहा है, लेकिन यह कोई औपचारिक वार्ता नहीं माना जा सकता। ईरान के शीर्ष नेतृत्व इन प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है, लेकिन कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। 

 ईरान की शर्तें और "प्रतिरोध" की नीति विदेश मंत्री ने जोर दिया कि ईरान का फोकस अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा पर है। उन्होंने कहा:

 - "हमारी वर्तमान नीति प्रतिरोध जारी रखने और देश की रक्षा करने की है। हम बातचीत का इरादा नहीं रखते।"

 - ईरान ने कभी सीजफायर की मांग नहीं की, बल्कि स्थायी शांति और हुए नुकसान का मुआवजा चाहता है।

 - अमेरिका और इजराइल पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते हुए अराग़ची ने कहा कि पूरा इलाका इस "लड़ाई" की कीमत चुका रहा है।

 यह बयान ईरान की पारंपरिक "प्रतिरोध की धुरी" (Axis of Resistance) नीति को फिर से रेखांकित करता है, जिसमें वह खुद को क्षेत्रीय हमलों का शिकार बताते हुए मजबूत सैन्य और रणनीतिक तैयारियों पर जोर दे रहा है। 

 क्षेत्रीय प्रभाव: होर्मुज स्ट्रेट से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक ईरान के इस रुख का असर न सिर्फ मध्य पूर्व पर, बल्कि वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट — विश्व के तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग — पर ईरान का नियंत्रण एक बड़ा रणनीतिक हथियार है। अराग़ची ने संकेत दिया कि अगर युद्ध बढ़ा तो क्षेत्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है, हालांकि मित्र देशों (जैसे भारत, चीन, रूस) के लिए रास्ते खुले रखने की बात भी कही गई। 

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान का यह सख्त रुख अमेरिका को दबाव में डालने की कोशिश है। ट्रंप प्रशासन के शांति प्रस्ताव (जिसमें 15 पॉइंट्स बताए जा रहे हैं) को ईरान ने अभी तक स्वीकार नहीं किया है और अपनी शर्तों पर जोर दे रहा है। 

 कूटनीति बनाम युद्ध: क्या है आगे का रास्ता? अराग़ची का बयान स्पष्ट रूप से दिखाता है कि ईरान युद्ध को "इसराइल-अमेरिका की लड़ाई" मान रहा है और खुद को पीड़ित पक्ष बता रहा है। उन्होंने कहा कि 47 साल बाद भी अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सीमाएं समझनी पड़ रही हैं। 

दूसरी ओर, अमेरिका और इजराइल ईरान पर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी हमलों का आरोप लगाते रहते हैं। इस बीच पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश शांति प्रयासों में सक्रिय दिख रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वास की दीवार खड़ी है।

 ईरान के इस रुख से साफ है कि फिलहाल प्रत्यक्ष बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही। तेहरान का फोकस प्रतिरोध और अपनी शर्तों पर बना हुआ है — स्थायी शांति, मुआवजा और क्षेत्रीय हमलों का अंत। 


अनिश्चितता का दौर जारी अब्बास अराग़ची का यह इंटरव्यू युद्ध के बीच ईरान की मजबूत कूटनीतिक और सैन्य स्थिति को उजागर करता है। जबकि अमेरिका अप्रत्यक्ष चैनलों से दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, ईरान स्पष्ट रूप से कह रहा है — "हमारी सुरक्षा हम खुद करेंगे। बातचीत तभी, जब हमारी शर्तें मानी जाएं।" 

मध्य पूर्व की इस जटिल स्थिति में हर नया बयान क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल रहा है। क्या मध्यस्थ देश कोई ब्रेकथ्रू ला पाएंगे, या युद्ध और लंबा खिंचेगा — यह समय बताएगा। लेकिन फिलहाल तेहरान का संदेश एकदम साफ है: प्रतिरोध पहले, बातचीत बाद में। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 26,2026