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Thursday, 26 March 2026

ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को 'टोल बूथ' बनाने जा रहा है? संसद में टोल टैक्स का ड्राफ्ट, दोस्त देशों के लिए सुरक्षित

ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को 'टोल बूथ' बनाने जा रहा है? संसद में टोल टैक्स का ड्राफ्ट, दोस्त देशों के लिए सुरक्षित
-Friday World March 26,2016
नई दिल्ली/तेहरान, 26 मार्च 2026: विश्व की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा धमनी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में ईरान अब एक नया दांव खेल रहा है। ईरानी संसद (मजलिस) हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स (transit fee) वसूलने के लिए कानून बनाने की तैयारी कर रही है। यह कदम न सिर्फ ईरान की संप्रभुता को मजबूत करने का दावा है, बल्कि युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण के लिए राजस्व जुटाने का भी माध्यम माना जा रहा है।

 ईरानी मीडिया (Fars News Agency) के अनुसार, संसद की निर्माण समिति ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसे अगले सप्ताह अंतिम रूप दिया जा सकता है। एक सांसद ने कहा, “हम ऐसा प्रस्ताव आगे बढ़ा रहे हैं जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट में ईरान की संप्रभुता, नियंत्रण और निगरानी को कानूनी रूप से मान्यता मिले और टोल वसूली के जरिए देश के लिए राजस्व का स्रोत बने।” 

 हॉर्मुज स्ट्रेट क्यों इतना महत्वपूर्ण? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस (LNG) इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, UAE, कतर, इराक और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए यह एकमात्र समुद्री निकास है।

 कोई भी यहां यातायात बाधित करने की कोशिश वैश्विक तेल कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर देती है। वर्तमान में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव/संघर्ष के कारण इस रूट पर यातायात लगभग ठप पड़ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। 

 ईरान का प्रस्ताव: सुरक्षा के बदले टोल 

ईरानी संसद में चर्चा हो रही है कि जहाजों को सुरक्षित गुजरने के लिए शुल्क लिया जाए। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टोल की राशि कितनी होगी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में अनौपचारिक रूप से प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर (लगभग 16-18 करोड़ रुपये) तक की मांग की खबरें आई हैं। कुछ सूत्रों के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पहले से ही कुछ जहाजों से ऐसे शुल्क वसूल रहे हैं।

 ईरान इसे “सुरक्षा प्रदान करने” का मामला बता रहा है, जबकि आलोचक इसे “टोल बूथ” या “शेकडाउन” कह रहे हैं। संसद के प्रस्ताव का मकसद युद्ध क्षति की भरपाई और क्षेत्रीय सुरक्षा सेवाओं के लिए फंड जुटाना भी बताया जा रहा है। 

 विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची का बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया: 

“हमने चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक और भारत जैसे दोस्त देशों के जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है। हमारे नजरिए से हॉर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि दुश्मनों के लिए बंद है।” 

उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र युद्ध क्षेत्र है, इसलिए दुश्मन देशों और उनके सहयोगियों के जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारत के दो जहाज हाल ही में सुरक्षित गुजर चुके हैं, जिसकी पुष्टि भारतीय अधिकारियों ने भी की है। 

 भारत पर क्या असर? भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और उसका बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी से आता है। हॉर्मुज का कोई भी बाधा या अतिरिक्त टोल भारतीय अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा सकता है — पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ना, मुद्रास्फीति का दबाव और व्यापार लागत में वृद्धि संभव है। 

हालांकि, ईरान भारत को “दोस्त देश” मान रहा है, इसलिए भारतीय जहाजों को अभी तक अनुमति मिल रही है। भारत सरकार और MEA ने अनौपचारिक टोल की कुछ रिपोर्ट्स को भ्रामक बताया है, लेकिन स्थिति निगरानी में है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक रूट्स, रणनीतिक भंडार और विविधीकरण पर भी जोर दे रहा है। 

 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चुनौतियां 

- अमेरिका और पश्चिमी देश: हॉर्मुज को खुला रखने के लिए दबाव डाल रहे हैं। अमेरिका ने नौसेना एस्कॉर्ट की बात की है, लेकिन पूर्ण सुरक्षा मुहिम महंगी और जटिल साबित हो सकती है (रेड सी के हूती हमलों का सबक)। 

- शिपिंग इंडस्ट्री: कई कंपनियां रूट बदल रही हैं, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।

 - वैश्विक अर्थव्यवस्था: तेल कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। अगर टोल स्थायी रूप से लागू हुआ तो यह सुएज कैनाल जैसा मॉडल बन सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादास्पद रहेगा क्योंकि हॉर्मुज प्राकृतिक जलमार्ग है। 

ईरान का यह कदम युद्ध के दौरान अपनी स्थिति मजबूत करने और भविष्य में लीवरेज बनाने की रणनीति लगती है। हालांकि, कानूनी रूप से यह बिल अभी ड्राफ्ट स्टेज पर है और पूरी तरह पास नहीं हुआ है।

 यदि ईरान का टोल कानून पास होता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार के नियम बदल सकता है। दोस्त देशों (भारत सहित) को संभवतः राहत मिलेगी, लेकिन दुश्मन या उनके सहयोगी जहाजों पर सख्ती बनी रहेगी। 

भारत जैसा देश कूटनीति से संतुलन बनाए रखते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। डॉ. एस. जयशंकर जैसे अनुभवी विदेश मंत्री की टीम इस संकट में भारत के हितों की रक्षा पर फोकस कर रही है। 

हॉर्मुज स्ट्रेट की यह नई “टोल वाली कहानी” दिखाती है कि भू-राजनीति कैसे व्यापार और ऊर्जा को प्रभावित करती है। दुनिया अब देख रही है कि ईरान इस प्रस्ताव को कितना आगे ले जाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसका कैसे जवाब देता है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 26,2016