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Tuesday, 17 March 2026

ईरान के स्पीकर का तीखा हमला: "ट्रंप हताशा से रोज़ झूठ बोलते हैं – हमने अमेरिका की सभी मध्य पूर्व छावनियों को तबाह कर दिया!"

ईरान के स्पीकर का तीखा हमला: "ट्रंप हताशा से रोज़ झूठ बोलते हैं – हमने अमेरिका की सभी मध्य पूर्व छावनियों को तबाह कर दिया!"
-Friday World – March 18, 2026 
ट्रंप की "जीत" वाली बातें हास्या स्पद! ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ का दावा – अमेरिकी बेस नष्ट, होर्मुज़ पर कंट्रोल, ट्रंप 32 देशों-नाटो से मदद मांगकर नाकाम, अब स्टेटमेंट्स बदलते रहते हैं – हताशा साफ दिख रही है!

 तेहरान से एक बार फिर जोरदार बयान आया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ट्रंप "हताशा से रोज़ कई झूठ बोलते हैं"। उनका मूल इरादा सिर्फ 72 घंटों में ईरान को हराने का था, लेकिन अब स्थिति उलट गई है – ईरान ने अमेरिका की मध्य पूर्व में मौजूद सभी प्रमुख सैन्य छावनियों को नष्ट कर दिया है।

 ग़ालिबाफ ने कहा, "ट्रंप ने दावा किया था कि वे हमें 9 बार दो हफ्तों में हरा चुके हैं – यह हास्यास्पद है! उनका प्लान था कि 72 घंटों में जीत हासिल कर लेंगे, लेकिन आज नतीजा यह है कि हमने उनकी मध्य पूर्व की सभी बेस को तबाह कर दिया। ट्रंप हताशा में रोज़ नए-नए झूठ बोल रहे हैं।" 

ईरान का दावा: अमेरिकी बेस पर भारी नुकसान ईरान की तरफ से लगातार दावे किए जा रहे हैं कि अमेरिका के मध्य पूर्व में मौजूद दर्जनों बेस – जैसे बहरीन में फिफ्थ फ्लीट, कतर में अल उदैद एयर बेस, सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस, कुवैत और UAE के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों से भारी क्षति हुई है। ईरानी मीडिया और IRGC के बयानों में कहा गया है कि कम से कम 17 अमेरिकी साइट्स क्षतिग्रस्त हुईं, जिसमें एयर डिफेंस, कम्युनिकेशन और डिप्लोमैटिक ठिकाने शामिल हैं।

 ईरान ने जवाबी हमलों में हजारों मिसाइल और ड्रोन इस्तेमाल किए, जिससे होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजरानी ठप हो गई है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, और ईरान के माइन बिछाने और हमलों से स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद है। ग़ालिबाफ ने इसे "रणनीतिक जीत" बताया और कहा कि अमेरिका अब अपनी ही बेस बचाने में लगा है। 

ट्रंप की मदद की गुहार: 32 देशों और नाटो से नाकामी ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि अमेरिका को किसी की मदद नहीं चाहिए – "हम अकेले काफी हैं"। लेकिन हकीकत में उन्होंने होर्मुज़ खोलने के लिए 32 से ज्यादा देशों, नाटो सहयोगियों, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों से युद्धपोत मांगे। जर्मनी ने साफ कहा कि "यह हमारी जंग नहीं है"। फ्रांस, ब्रिटेन और अन्य ने भी सैन्य सहयोग से इनकार कर दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि नाटो "बहुत बुरा भविष्य" देखेगा अगर मदद नहीं की, लेकिन सहयोगी पीछे हट गए।

 अब ट्रंप के स्टेटमेंट्स में लगातार बदलाव आ रहा है। पहले कहा "ईरान की सेना तबाह हो गई", फिर "हमें मदद की जरूरत नहीं", और अब "दुनिया के देश होर्मुज़ संभालें"। ईरानी स्पीकर ने इसे "हताशा" बताया और कहा कि ट्रंप को अब पता नहीं क्या बोलें और क्या न बोलें। 

अमेरिका में भी विरोध: घरेलू स्तर पर दबाव ट्रंप के ईरान युद्ध के फैसले पर अमेरिका में भी विरोध तेज हो गया है। डेमोक्रेटिक लीडर्स जैसे चक शूमर ने कहा कि ट्रंप "फ्लेलिंग" कर रहे हैं – प्लानिंग में फेल रहे और अब डैमेज कंट्रोल नहीं कर पा रहे। पोल्स दिखाते हैं कि सिर्फ 25% अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन करते हैं। घरेलू स्तर पर आर्थिक संकट – तेल की कीमतें $100+ पार, महंगाई बढ़ रही है। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने बिना ठोस प्लान के युद्ध शुरू किया। 

ईरान की स्थिति: रणनीतिक लाभ? ईरान दावा करता है कि उसके हमलों से अमेरिकी बेस कमजोर हो गए हैं। IRGC ने हजारों मिसाइल लॉन्च किए, और होर्मुज़ पर कंट्रोल बनाए रखा। ग़ालिबाफ ने कहा कि युद्ध के बाद मध्य पूर्व का नया ऑर्डर बनेगा, जहां अमेरिकी उपस्थिति खत्म होगी। ईरान ने क्षेत्रीय सहयोगियों (इराक, यमन, लेबनान) से भी सपोर्ट लिया है। 

वैश्विक असर: तेल संकट और न्यूक्लियर खतरा होर्मुज़ बंद होने से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। एशिया में 80% आयात प्रभावित। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो न्यूक्लियर एस्केलेशन का खतरा है। ट्रंप के "72 घंटे में जीत" वाले प्लान के उलट, युद्ध तीसरे हफ्ते में है और कोई अंत नजर नहीं आ रहा। 

ईरानी स्पीकर का बयान ट्रंप की हताशा साफ दिख रही है – मदद मांगना, स्टेटमेंट बदलना, घरेलू विरोध। ईरान इसे अपनी "रणनीतिक जीत" बता रहा है। लेकिन फिलहाल होर्मुज़ का संकट और गहरा रहा है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World – March 18, 2026