-Friday World March 3, 2026
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"हमारे साथ धोखा हुआ... अमेरिका ने हमें ईरानी हमलों के रहमो-करम पर छोड़ दिया!"
मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वाशिंगटन ने अपने लंबे समय के सहयोगी खाड़ी देशों को "त्याग" दिया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने पैट्रियट (Patriot) और THAAD जैसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम को खाड़ी क्षेत्र से हटाकर इज़राइल की सुरक्षा के लिए ट्रांसफर कर दिया है। नतीजा? अमेरिकी मिलिट्री बेस वाले खाड़ी देश अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के सामने बेबस हो गए हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान ने बदले की कार्रवाई में सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। रियाद में अमेरिकी दूतावास पर दो ड्रोनों से हमला हुआ, जिसमें मामूली आग लगी और थोड़ा नुकसान पहुंचा। कुवैत में भी अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन अटैक हुआ, जिसके बाद अमेरिका ने दोनों देशों में अपने दूतावास बंद कर दिए। अमेरिका ने 14 देशों से अपने नागरिकों को तुरंत निकलने की चेतावनी दी है।
सऊदी अधिकारी का कहना है:
"अमेरिका ने हमें छोड़ दिया और अपना एयर डिफेंस सिस्टम इज़राइल की रक्षा के लिए ट्रांसफर कर दिया। उन्होंने उन सभी खाड़ी देशों को ईरानी हमलों के रहमो-करम पर छोड़ दिया जहां अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं।"
यह आरोप खाड़ी देशों में बढ़ती निराशा और गुस्से को दर्शाता है। सालों से सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कतर जैसे देश अमेरिकी मिलिट्री बेस होस्ट करते आए हैं। इन बेस से अमेरिका ने क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा किया था। लेकिन अब ईरान के हमलों के बीच अमेरिकी सिस्टम इज़राइल की तरफ शिफ्ट हो गए हैं, जहां THAAD बैटरी तैनात की गई हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका ने इज़राइल में दो THAAD सिस्टम डिप्लॉय किए हैं, जिससे इंटरसेप्टर मिसाइलों का बड़ा स्टॉक इस्तेमाल हो रहा है।
खाड़ी देशों की स्थिति चिंताजनक
ईरान ने पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र पर 165 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और 541 ड्रोनों से हमले किए हैं। यूएई ने इनमें से कई को इंटरसेप्ट किया, लेकिन सऊदी अरब और अन्य देशों में अमेरिकी दूतावास और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले हो रहे हैं। सऊदी डिफेंस मिनिस्ट्री ने ईरानी हमलों की निंदा की है, लेकिन अमेरिकी समर्थन की कमी से सुरक्षा में बड़ी खामी उजागर हुई है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की प्राथमिकता अब इज़राइल की सुरक्षा पर केंद्रित है। ट्रंप प्रशासन के तहत "Operation Epic Fury" जैसे ऑपरेशंस में इज़राइल को प्राथमिकता दी जा रही है। खाड़ी देशों ने ईरान पर अमेरिकी हमलों में अपनी जमीन इस्तेमाल करने से इनकार किया था, जिसके बाद अमेरिका ने अपना फोकस शिफ्ट कर दिया।
इससे क्या असर पड़ रहा है?
- तेल बाजार पर दबाव: हॉर्मुज़ स्ट्रेट के पास तनाव से तेल की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं। अगर खाड़ी देशों की सुरक्षा कमजोर हुई तो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
- खाड़ी देशों की नई रणनीति: सऊदी अरब और अन्य देश अब स्वतंत्र सुरक्षा व्यवस्था तलाश सकते हैं। चीन और रूस जैसे देशों से करीबी बढ़ सकती है।
- अमेरिका-खाड़ी संबंधों में दरार: सालों पुरानी साझेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। खाड़ी देश अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर निवेश करते हैं, लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
यह युद्ध अब सिर्फ ईरान vs अमेरिका-इज़राइल नहीं रहा। यह क्षेत्रीय गठबंधनों की परीक्षा है। सऊदी अधिकारी का यह बयान एक बड़ा संकेत है कि खाड़ी देश अब "अमेरिका पर भरोसा" की नीति से दूर जा रहे हैं। क्या यह मध्य पूर्व की भू-राजनीति में नया अध्याय शुरू करेगा? समय बताएगा।
लेकिन एक बात साफ है – जब सहयोगी एक-दूसरे को "त्याग" देते हैं, तो दुश्मन मजबूत होता है। खाड़ी देशों को अब अपनी सुरक्षा खुद संभालनी होगी, क्योंकि अमेरिकी छाता अब इज़राइल पर ज्यादा टिका हुआ दिख रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 3, 2026