आज दुनिया एक अभूतपूर्व संकट के कगार पर खड़ी है। अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने बदला लेने के लिए हॉर्मुज़ स्ट्रेट – विश्व के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा – प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। इस स्ट्रेट से रोज़ाना 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल खपत का लगभग 20% है। ईरान के हमलों और धमकियों के कारण टैंकरों की आवाजाही लगभग थम गई है, जिससे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आ रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।
इस युद्ध का सीधा असर भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों पर पड़ेगा। भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात का लगभग 50% हिस्सा मध्य पूर्व से (हॉर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते) आता है। अगर यह सप्लाई लंबे समय तक रुक जाए तो भारतीय अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है – पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, औद्योगिक उत्पादन घट सकता है और महंगाई की आग भड़क सकती है।
भारत के पास कितने दिनों तक चलेगा तेल? ताज़ा रिपोर्ट्स और एनर्जी एनालिटिक्स फर्म Kpler के डेटा के अनुसार, भारत के पास कुल क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का स्टॉक (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व + कमर्शियल स्टॉक्स) लगभग 100 मिलियन बैरल है। हॉर्मुज़ स्ट्रेट से आने वाले आयात (रोज़ाना औसतन 2.5 मिलियन बैरल) को ध्यान में रखते हुए यह स्टॉक 40-45 दिनों तक चल सकता है।
- स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR): मंगलौर, पदुर और विशाखापत्तनम में अंडरग्राउंड स्टोरेज में लगभग 9-10 दिनों का कवरेज।
- कमर्शियल स्टॉक्स (रिफाइनरियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास): 25-30 दिनों का क्रूड और रिफाइंड प्रोडक्ट्स (पेट्रोल, डीज़ल आदि)।
- कुल मिलाकर: 40-45 दिनों का बफर, जिसमें जहाजों पर चल रहे आयात का वॉल्यूम भी शामिल है।
सरकार वैकल्पिक स्रोतों जैसे रूस, अमेरिका, वेस्ट अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात बढ़ा सकती है, जिससे यह समय थोड़ा और बढ़ सकता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, क्रूड ऑयल के 25 दिनों और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के 25 दिनों का स्टॉक है, जो कुल मिलाकर 6-8 हफ्तों (लगभग 50-56 दिनों) तक की सुरक्षा देता है, लेकिन हॉर्मुज़ से जुड़े हिस्से के लिए 40-45 दिनों का अनुमान अधिक प्रासंगिक है।
वैश्विक तुलना में कौन कितने दिनों तक टिक सकता है?
इस संकट में विभिन्न देशों की तैयारी अलग-अलग है ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार:
- जापान: 200+ दिन (IEA सदस्य के रूप में मजबूत रिज़र्व, कुछ अनुमानों में 254 दिन तक)
- दक्षिण कोरिया: 200+ दिन
- चीन: 90-180 दिन (कम से कम 6 महीने का बफर, अनुमानित 3 महीने से अधिक)
- यूनाइटेड स्टेट्स: 90+ दिन (SPR में 714 मिलियन बैरल से अधिक)
- यूरोपियन यूनियन: 90+ दिन (IEA स्टैंडर्ड)
- भारत: 40-45 दिन (कमर्शियल + SPR मिलाकर, IEA के 90 दिनों के बेंचमार्क से नीचे)
भारत अभी IEA के 90 दिनों के मानक से नीचे है, लेकिन पिछले वर्षों में स्ट्रैटेजिक रिज़र्व बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। कुल क्षमता 74 दिनों तक की है, लेकिन वर्तमान स्टॉक में हॉर्मुज़ डिसरप्शन के लिए 40-45 दिन प्रमुख है।
इस संकट का असर और भारत की तैयारी
अगर हॉर्मुज़ स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो तेल की कीमतें $100-150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे भारत का आयात बिल भारी बढ़ेगा। लेकिन सरकार के पास वैकल्पिक रास्ते, राशनिंग और डिमांड मैनेजमेंट के प्लान हैं। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है – अधिक रिज़र्व, रिन्यूएबल एनर्जी और विविध आयात स्रोतों पर फोकस जरूरी है।
यह युद्ध सिर्फ मध्य पूर्व की आग नहीं – यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धमनी में लगी आग है। भारत को इस संकट से बाहर निकलने के लिए तैयार रहना होगा!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 3, 2026