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सऊदी अरब ने अमेरिका के लिए नया सैन्य बेस खोला: मुस्लिम देशों की जमीन पर मुस्लिम पर हमला, तेल संपत्ति तबाह—कौन है असली लाभार्थी?
21 मार्च 2026। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना के लिए King Fahd Air Base (ताइफ में स्थित) को खोल दिया है। यह बेस Prince Sultan Air Base से ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है, क्योंकि यह ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों से दूर है। अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारियों ने Middle East Eye को बताया कि सऊदी ने इस कदम से ईरान के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशंस को सपोर्ट दिया है। यह फैसला युद्ध के तीन हफ्ते बाद आया है, जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया, तेल की कीमतें 119 डॉलर तक पहुंच गईं, और खाड़ी देशों के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले हो रहे हैं।
सऊदी का यह कदम: मुस्लिम देश की जमीन पर मुस्लिम पर हमला?
सऊदी अरब—जो खुद को इस्लाम का संरक्षक बताता है—ने अमेरिका को अपनी जमीन पर बेस खोलकर ईरान (एक मुस्लिम देश) पर हमलों में सहयोग दिया। ईरान के IRGC ने पहले ही सऊदी, यूएई, कतर और बहरीन में अमेरिकी बेस पर हमले किए हैं। Prince Sultan Air Base पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जहां सऊदी सेना ने इंटरसेप्ट किया। अब King Fahd बेस खोलने से सऊदी सीधे युद्ध में शामिल हो रहा है। यह स्थिति बेहद विडंबनापूर्ण है:
- मुस्लिम देश (सऊदी) की जमीन से मुस्लिम देश (ईरान) पर हमला।
- तेल एसेट्स (रिफाइनरीज, पोर्ट्स) खाक हो रही हैं—साउथ पार्स गैस फील्ड, यानबु पोर्ट आदि पर हमले।
- फायदा अमेरिका को—तेल कीमतें ऊंची होने से अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, जबकि खाड़ी देश तबाह हो रहे हैं।
- इजरायल को अप्रत्यक्ष फायदा—ईरान कमजोर हो रहा है, और क्षेत्रीय दुश्मन (ईरान) व्यस्त है।
कई विश्लेषक इसे 'पालतू गुलाम' की भूमिका बता रहे हैं। सऊदी ने अमेरिका के साथ पुराने रिश्ते (1945 का Quincy Pact) को निभाया, लेकिन इस बार यह मुस्लिम एकता के खिलाफ लगता है।
इजरायल का 'ग्रेटर इजरायल' नक्शा: सऊदी अरब भी शामिल?
यह कदम इजरायल के 'ग्रेटर इजरायल' (Greater Israel) विजन से जुड़ा माना जा रहा है। यह विचार बाइबिल और कुछ ज़ायोनी विचारधाराओं पर आधारित है, जिसमें इजरायल की सीमाएं विस्तारित होकर जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, मिस्र, इराक और सऊदी अरब के कुछ हिस्सों तक फैलती हैं।
- अगस्त 2025 में नेतन्याहू ने कहा था कि वे "ग्रेटर इजरायल" से "ऐतिहासिक और आध्यात्मिक" जुड़ाव महसूस करते हैं।
- फाइनेंस मिनिस्टर बेजालेल स्मोट्रिच ने जॉर्डन और उसके आगे के इलाकों को शामिल करने की बात की।
- अरब देशों (सऊदी, मिस्र, जॉर्डन, कतर आदि) ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और कड़ी निंदा की।
- सऊदी अरब ने "विस्तारवादी प्रोजेक्ट्स" को खारिज किया।
अब सऊदी का अमेरिका को बेस देना इजरायल के लिए फायदेमंद है—ईरान कमजोर हो रहा है, और खाड़ी देश आपस में लड़ रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल जानबूझकर सऊदी जैसे देशों को युद्ध में खींचना चाहता है, ताकि वे कमजोर हों और 'ग्रेटर इजरायल' का रास्ता साफ हो।
अमेरिका का फायदा: तेल, हथियार और प्रभाव
अमेरिका इस युद्ध से सबसे ज्यादा लाभान्वित हो रहा है: - तेल कीमतें ऊंची
→ अमेरिकी शेल ऑयल कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं। - हथियार बिक्री
→ सऊदी, यूएई आदि को F-35, पैट्रियट मिसाइलें बेची जा रही हैं। - क्षेत्रीय प्रभाव
→ ईरान कमजोर होने से अमेरिका का दबदबा बढ़ रहा है।
- ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति → घरेलू स्तर पर "ईरान को हराया" का दावा।
ट्रंप ने कहा कि "हमारे उद्देश्य पूरे हो चुके हैं", लेकिन युद्ध जारी है। सऊदी का बेस खोलना अमेरिकी सेना को और मजबूती देगा।
मुस्लिम दुनिया की विडंबना: एकता कहां गई? यह स्थिति मुस्लिम दुनिया के लिए शर्मनाक है:
- मुस्लिम देश एक-दूसरे के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के साथ खड़े हैं।
- तेल संपत्ति (जो मुस्लिम राष्ट्रों की है) तबाह हो रही है।
- आम मुस्लिम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और युद्ध से पीड़ित।
- इजरायल का 'ग्रेटर इजरायल' सपना साकार होने की ओर—जबकि मुस्लिम नेता चुप या सहयोगी।
पालतू गुलाम से यही उम्मीद थी—अपनी जमीन और भाइयों पर हमला करवाना, ताकि मालिक खुश रहे। लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसे गुलाम आखिर में खुद तबाह होते हैं।
क्या यह युद्ध मुस्लिम दुनिया को बर्बाद कर देगा? सऊदी का King Fahd बेस खोलना सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं—यह मुस्लिम एकता की हार है। इजरायल और अमेरिका का फायदा साफ है, जबकि सऊदी-ईरान जैसे देश आपस में लड़कर कमजोर हो रहे हैं। 'ग्रेटर इजरायल' का नक्शा अगर साकार हुआ, तो सऊदी अरब के हिस्से भी खतरे में आ सकते हैं।
मुस्लिम दुनिया को सोचना चाहिए—क्या यह 'पालतू गुलामी' की कीमत चुकाने लायक है? या एकता की जरूरत है? युद्ध जारी है, लेकिन असली हार मुस्लिम एकता की हो रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 21,2026