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Tuesday, 17 March 2026

अरुंधति रॉय का बयान: "मैं ईरान के साथ हूं" – US-इज़राइल हमलों की कड़ी निंदा, भारत सरकार को "गुटलेस और स्पाइनलेस" कहा

अरुंधति रॉय का बयान: "मैं ईरान के साथ हूं" – US-इज़राइल हमलों की कड़ी निंदा, भारत सरकार को "गुटलेस और स्पाइनलेस" कहा
-Friday World – March 18, 2026
बुकर विजेता अरुंधति रॉय का धमाकेदार ऐलान – "ईरान के साथ खड़ी हूं, बिना शर्त!" अमेरिका-इज़राइल के "अवैध हमलों" पर गुस्सा, भारत की "कायरता" पर शर्मिंदगी – क्या यह उनकी अपनी आवाज है या कोई दबाव?

 नई दिल्ली में 9 मार्च 2026 को अपनी नई किताब Mother Mary Comes to Me* की चर्चा के दौरान अरुंधति रॉय ने अचानक मंच पर खड़े होकर दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को "अनप्रोवोक्ड और इललीगल" बताते हुए कड़ी निंदा की और स्पष्ट कहा, "मैं ईरान के साथ हूं – बिना किसी शर्त के (Unequivocally)।" यह बयान न सिर्फ ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बीच आया, बल्कि भारत सरकार की विदेश नीति पर भी तीखा हमला था। रॉय ने भारत को "कायर और स्पाइनलेस" करार दिया, कहा कि "ईरान खड़ा हो रहा है, जबकि हमारी सरकार झुक रही है।" 

रॉय का पूरा बयान: ईरान नहीं है गाजा  

अपनी किताब की चर्चा के अंत में रॉय ने कहा, "मैं अपनी किताब Mother Mary की कैंडर और इम्पोलाइटनेस की भावना से कहना चाहती हूं कि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर अनप्रोवोक्ड और अवैध हमला किया है। यह गाजा में जारी नरसंहार का ही विस्तार है। लेकिन ईरान गाजा नहीं है। इस युद्ध का थिएटर पूरे दुनिया को निगल सकता है। हम न्यूक्लियर तबाही और आर्थिक संकट की कगार पर हैं।" 

उन्होंने आगे कहा, "जिन रेजिम्स को बदलने की जरूरत है – अमेरिका, इज़राइल और हमारी अपनी सरकार – उन्हें लोगों द्वारा बदला जाना चाहिए, न कि किसी झूठे, लालची, बम गिराने वाले इम्पीरियल पावर द्वारा। ईरान उनसे मुकाबला कर रहा है, जबकि भारत डर रहा है। मुझे अपनी सरकार की इस कायरता और स्पाइनलेसनेस पर शर्म आती है।" 

रॉय ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए:

 "हमारा प्रधानमंत्री इज़राइल जाकर नेतन्याहू को गले लगाता है, ठीक हमलों से पहले। हम अमेरिका के साथ ग्रॉवलिंग ट्रेड डील साइन करते हैं, जो हमारे किसानों और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बेच देती है। क्या यह हमारी गरिमा है? हमारी सरकार अमेरिका के सामने इतनी कमजोर क्यों है कि वह ईरान पर हमलों की निंदा भी नहीं कर सकती?" 

यह बयान उनकी अपनी आवाज है या मजबूरी?

अरुंधति रॉय का यह स्टैंड बिल्कुल उनकी पुरानी विचारधारा से मेल खाता है। वे हमेशा से अमेरिकी इम्पीरियलिज्म, इज़राइल की पॉलिसी और भारत की "सॉफ्ट" विदेश नीति की आलोचना करती आई हैं। गाजा युद्ध में भी उन्होंने इज़राइल की कार्रवाइयों को "जनोसाइड" कहा था। उनकी किताबें और लेख जैसे *The God of Small Things*, *Capitalism: A Ghost Story* और कई निबंधों में वे साम्राज्यवाद, पूंजीवाद और दमन के खिलाफ खुलकर बोलती हैं।

 यह बयान किसी "सत्ता दबाव" या मजबूरी से नहीं लगता। बल्कि यह उनकी स्वतंत्र, बेबाक आवाज है। रॉय ने पहले भी कई बार सरकार की नीतियों की आलोचना की है – चाहे कश्मीर हो, CAA-NRC हो या किसान आंदोलन। उनकी इस स्पीच के बाद ऑडियंस ने तालियां बजाकर खड़े होकर समर्थन दिया। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह उनका "पर्सनल स्टैंड" था, जो किताब लॉन्च के बाद अनप्लांड तरीके से आया। 

भारत सरकार का रुख और विवाद भारत सरकार ने ईरान पर US-इज़राइल हमलों पर कोई सख्त बयान नहीं दिया। बल्कि, भारत ने "शांति और संवाद" की अपील की, जो रॉय ने "कायरता" कहा। भारत ईरान से तेल आयात करता है, लेकिन अमेरिका के साथ गहरे संबंध हैं – QUAD, इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी और इज़राइल के साथ डिफेंस डील्स। रॉय ने इसे "स्वाधीनता से खाली" बताया। 

वैश्विक संदर्भ: ईरान युद्ध और रॉय की चिंता ईरान पर हमलों से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। होर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने का खतरा है। रॉय ने चेतावनी दी कि यह युद्ध न्यूक्लियर स्तर तक पहुंच सकता है।

 उन्होंने कहा, "हिरोशिमा-नागासाकी बम गिराने वाला देश अब ईरान की प्राचीन सभ्यता पर बम गिराने की तैयारी कर रहा है।" 

रॉय की विरासत: हमेशा विवादास्पद लेकिन साहसी अरुंधति रॉय बुकर प्राइज (1997) जीतने वाली सबसे युवा लेखिका हैं। लेकिन उनकी राजनीतिक सक्रियता ने उन्हें कई बार विवादों में लाया – Naxal समर्थन के आरोप, सेडिशन केस, आदि। फिर भी, वे कभी चुप नहीं रहीं। यह बयान भी उनकी उसी परंपरा का हिस्सा है। 

कई लोग कहते हैं कि रॉय "एंटी-इंडिया" हैं, लेकिन उनके समर्थक उन्हें "सच्चाई की आवाज" मानते हैं। ईरान पर उनका स्टैंड वैश्विक स्तर पर चर्चा में है – Zeteo, The Wire, MR Online, Dawn आदि ने इसे प्रमुखता से कवर किया।

 यह बयान सत्ता द्वारा मजबूर नहीं लगता – बल्कि अरुंधति रॉय की अपनी, बेबाक और साहसी आवाज है। वे ईरान के लोगों के साथ खड़ी हैं, और भारत से भी उम्मीद करती हैं कि वह अपनी गरिमा दिखाए। दुनिया न्यूक्लियर खतरे के दौर में है, और ऐसी आवाजें जरूरी हैं। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World – March 18, 2026