नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 110-120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने की खबरों ने देश में पेट्रोल और डीजल के भाव बढ़ने की अटकलों को हवा दी। कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल में ₹10 से ₹15 प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
लेकिन केंद्र सरकार ने इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने ऐसी खबरों को “मिशचिवस एंड मिसलीडिंग” (भ्रामक और गुमराह करने वाली) बताया और कहा कि ये अफवाहें नागरिकों में अनावश्यक डर और घबराहट फैलाने के लिए फैलाई जा रही हैं।
मंत्रालय का आधिकारिक स्पष्टीकरण
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस वार्ता में कहा, “पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। देश में LPG, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। कीमतें स्थिर हैं और कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें।”
पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट ने भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फर्जी अधिसूचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगीं और स्टॉक खत्म होने की खबरें भी आईं, जिसके बाद सरकार ने तुरंत सफाई दी।
क्यों फैली बढ़ोतरी की अफवाह?
- क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें: मध्य पूर्व (विशेषकर ईरान और आसपास) में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% क्रूड ऑयल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल में 108-112 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचीं (कुछ रिपोर्ट्स में 119-120 डॉलर तक का जिक्र)।
- भारत पर असर: भारत अपनी कुल क्रूड आवश्यकता का 85% से ज्यादा आयात करता है। कच्चे तेल की महंगाई से तेल कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल पर ₹20-25 प्रति लीटर और डीजल पर ज्यादा घाटा हो रहा था।
- चुनावी समय: पश्चिम बंगाल सहित राज्यों में चुनाव चल रहे थे (29 अप्रैल 2026 तक मतदान), इसलिए सोशल मीडिया पर “चुनाव खत्म होते ही भाव बढ़ेंगे” वाली अफवाहें तेज हो गईं। कुछ ब्रोकरेज रिपोर्ट्स (जैसे कोटक इंस्टीट्यूशनल) ने भी ₹25-28 तक की संभावित बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था, जिसे सरकार ने गलत बताया।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए?
सरकार ने उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए proactive कदम उठाए हैं:
1. एक्साइज ड्यूटी में कटौती: मार्च 2026 के अंत में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटा दी। पेट्रोल पर ड्यूटी अब ₹3 प्रति लीटर रह गई, जबकि डीजल पर शून्य कर दी गई। इससे तेल कंपनियों के घाटे को कुछ हद तक कंट्रोल किया गया और खुदरा कीमतें स्थिर रखी गईं।
2. निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी: घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए 11 अप्रैल 2026 के गजट नोटिफिकेशन के तहत डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर ₹55.50 प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹42 प्रति लीटर कर दिया गया। इससे रिफाइनर्स निर्यात कम करेंगे और देश में ईंधन उपलब्धता बनी रहेगी।
ये कदम दिखाते हैं कि सरकार उपभोक्ताओं की सुरक्षा और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दे रही है, भले ही वैश्विक कीमतें ऊंची हों।
भारत की स्थिति और चुनौतियां
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। मध्य पूर्व संकट से आयात बिल बढ़ रहा है, लेकिन सरकार ने पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं की है। यह अन्य देशों की तुलना में अनोखी स्थिति है, जहां क्रूड की महंगाई सीधे पंप पर असर डाल रही है।
सरकार का फोकस महंगाई नियंत्रण, आर्थिक स्थिरता और आम आदमी की जेब पर बोझ न बढ़ाने पर है। हालांकि, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट लंबा खिंचा तो भविष्य में दबाव बढ़ सकता है, लेकिन फिलहाल कोई तत्काल बढ़ोतरी नहीं होने वाली।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
- अफवाहों पर भरोसा न करें। केवल पेट्रोलियम मंत्रालय, PIB या आधिकारिक वेबसाइट/ट्विटर हैंडल से जानकारी लें।
- अनावश्यक पैनिक बाइंग से बचें। इससे आर्टिफिशियल कमी पैदा होती है।
- ईंधन बचत के उपाय अपनाएं – कार풪लिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सही टायर प्रेशर आदि।
: चुनाव समाप्त होने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम ₹10 या उससे ज्यादा बढ़ने वाली खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि कीमतें स्थिर रहेंगी और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कटौती और निर्यात शुल्क बढ़ाकर संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।
ऐसी अफवाहें केवल घबराहट फैलाती हैं। सतर्क रहें, आधिकारिक अपडेट फॉलो करें। वैश्विक तेल बाजार अस्थिर है, लेकिन भारत सरकार उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 30,2026