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शिवपुरी (मध्य प्रदेश), 18 अप्रैल 2026 — सत्ता के घमंड ने एक बार फिर सड़क पर अपना रौब दिखाया है। पिछोर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी महिंद्रा थार गाड़ी से तेज रफ्तार में तीन बाइक सवार युवकों और दो पैदल चल रही महिलाओं को कुचल दिया। हादसे में पांचों घायल हो गए, लेकिन आरोपी ने न तो माफी मांगी और न ही मदद की। उल्टा, वायरल वीडियो में वह घमंड भरे लहजे में कहता सुनाई दिया — “मैं सायरन और हॉर्न बजा रहा था, तुम लोग सड़क से हटे क्यों नहीं?”
यह घटना 16 अप्रैल 2026 को सुबह करीब 7:30 बजे शिवपुरी जिले के करैरा थाना क्षेत्र में टीला रोड पर हुई। दिनेश लोधी जिम जा रहे थे। उनकी थार ने पहले एक मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मारी, जिसमें सवार तीन दोस्त — संजय परिहार, आशीष परिहार और अंशुल परिहार — सड़क पर गिर गए। फिर आगे चल रही दो महिलाएं — सीता वर्मा और पूजा सोनी — भी चपेट में आ गईं। सभी को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने चोटों का इलाज कराया जा रहा है।
थार गाड़ी की हैरान करने वाली हालत
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में दिनेश लोधी की थार गाड़ी की स्थिति चौंकाने वाली है। गाड़ी पर:
- नंबर प्लेट बिल्कुल नहीं लगी हुई थी।
- सायरन और हॉर्न लगे हुए थे, जो आम नागरिकों के वाहनों में अवैध माने जाते हैं।
- लाइटें भी बदलकर लगाई गई थीं।
- गाड़ी के आगे-पीछे मोटे अक्षरों में “प्रीतम लोधी, विधायक” और “MLA” लिखा हुआ था।
यह गाड़ी इसी अवैध तरीके से सड़कों पर घूम रही थी, और न पुलिस ने रोका, न आरटीओ ने नोटिस दिया। आम आदमी अगर ऐसी गाड़ी चलाए तो तुरंत चालान और जब्ती का सामना करना पड़ता, लेकिन यहां सत्ता का सहारा सब कुछ कवर कर रहा था।
घमंड भरा बयान और पीड़ितों पर आरोप
हादसे के तुरंत बाद दिनेश लोधी ने मौके पर पहुंचे लोगों से कहा, “मैं सायरन बजा रहा था, हॉर्न दे रहा था, फिर भी तुम लोग क्यों नहीं हटे?” उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड करने वालों को भी धमकाया। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी ने उन्हें धमकाने की भी कोशिश की।
पीड़ित संजय परिहार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वे तीनों दोस्त धनरा गांव की ओर काम पर जा रहे थे, जबकि दो महिलाएं सड़क पर पैदल चल रही थीं। थार की तेज रफ्तार ने उन्हें बचने का मौका भी नहीं दिया।
पुलिस ने दिनेश लोधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 (लापरवाही से वाहन चलाना जो जीवन को खतरे में डालता है) और 125(A) (जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य) के तहत मामला दर्ज किया है। वाहन जब्त कर लिया गया है, लेकिन आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हुआ है।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने
यह पहला मामला नहीं है। दिनेश लोधी पर पहले भी लापरवाही से वाहन चलाने और आपराधिक धमकी देने के आरोप लग चुके हैं। 2023 में ग्वालियर में उनके खिलाफ आपराधिक धमकी का केस दर्ज हुआ था। जनवरी 2024 में एक और मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था, जिसमें उन्होंने एक दोपहिया वाहन को टक्कर मारी थी।
विधायक पिता प्रीतम सिंह लोधी का भी आपराधिक रिकॉर्ड काफी विवादास्पद रहा है। कई पुराने मामलों में उनका नाम जुड़ा रहा है, जिससे परिवार की छवि पहले से ही सवालों के घेरे में है।
सत्ता का घमंड या कानून की मजबूरी?
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है। यह VIP संस्कृति, सत्ता के दुरुपयोग और आम आदमी के अधिकारों की उपेक्षा का जीता-जागता उदाहरण है। मध्य प्रदेश जैसे राज्य में जहां सड़क दुर्घटनाएं पहले से ही बड़ी समस्या हैं, ऐसे मामलों में राजनीतिक प्रभाव कैसे काम करता है, यह देखकर आम जनता आक्रोशित है।
विधायक प्रीतम लोधी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “कानून अपना काम करेगा, सबके लिए कानून समान है।” लेकिन पीड़ित परिवार पूछ रहे हैं — अगर कानून सबके लिए समान है, तो नंबर प्लेट रहित, सायरन लगी गाड़ी क्यों बिना रोक-टोक घूम रही थी? क्यों पुलिस और आरटीओ ने पहले ही कार्रवाई नहीं की?
समाज में उठते सवाल
- क्या सत्ता में होने का मतलब है कि नियमों से ऊपर होना?
- आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा कौन करेगा जब VIP परिवारों के वाहन बिना नंबर प्लेट और अवैध फिटिंग्स के दौड़ते रहें?
- क्या पुलिस और प्रशासन सिर्फ सत्ता के इशारे पर काम करती है?
यह मामला न सिर्फ शिवपुरी बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर #VIPCulture, #TharAccidentMP और #PichhoreMLA जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और परिवार के पुराने मामलों की भी जांच हो।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे सिर्फ न्याय चाहते हैं। घायलों का इलाज चल रहा है, लेकिन आर्थिक और मानसिक परेशानी का बोझ उनके ऊपर है। कई लोगों ने सवाल किया है कि क्या आरोपी परिवार घायलों का मुआवजा और इलाज का खर्च खुद उठाएगा या फिर इस मामले को भी दबाने की कोशिश होगी?
अंत में...
यह घटना हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र में सत्ता जनता की सेवा के लिए है, न कि दबंगई और घमंड के लिए। दिनेश लोधी का यह रवैया न सिर्फ पीड़ित परिवारों के घाव पर नमक छिड़क रहा है, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है।
अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन कितनी निष्पक्षता से कार्रवाई करता है। क्या कानून अपनी पूरी ताकत से काम करेगा, या फिर सत्ता का सहारा एक बार फिर सब कुछ दबा देगा? आम जनता की नजरें इस मामले पर टिकी हुई हैं। न्याय मिलना चाहिए — बिना किसी राजनीतिक दबाव के।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 18,2026