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Friday, 17 April 2026

ट्रम्प के झूठ का पर्दाफाश! ईरान का आक्रामक हमला: "यूरेनियम ट्रांसफर की बात भूल जाओ, ट्रम्प झूठों की फैक्ट्री हैं!"

ट्रम्प के झूठ का पर्दाफाश! ईरान का आक्रामक हमला: "यूरेनियम ट्रांसफर की बात भूल जाओ, ट्रम्प झूठों की फैक्ट्री हैं!"-Friday World-April 18,2026 
तेहरान, 18 अप्रैल 2026 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर से अपनी पुरानी आदत दोहराई है। मात्र एक घंटे में सात बड़े-बड़े झूठे दावे करके उन्होंने ईरान के साथ चल रही बातचीत को अपनी "जीत" बताने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने तीखा जवाब देते हुए कहा — "ट्रम्प झूठों की फैक्ट्री हैं। यूरेनियम ट्रांसफर? यह बात कभी हुई ही नहीं। भूल जाओ!"

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने राज्य टीवी पर स्पष्ट शब्दों में कहा, "ईरान का संवर्धित यूरेनियम कहीं भी स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। अमेरिका को यूरेनियम ट्रांसफर करने की बात कभी भी वार्ता में नहीं उठाई गई।" ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तो और भी आक्रामक रुख अपनाते हुए ट्रम्प पर सीधा हमला बोला — "ट्रम्प ने एक घंटे में सात दावे किए, और सभी झूठे थे। न तो उन्होंने युद्ध जीता और न ही बातचीत में कुछ हासिल करेंगे।"

 ट्रम्प ने क्या-क्या झूठ बोले?
ट्रम्प ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि:
- ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम (जिसे वे "न्यूक्लियर डस्ट" कहते हैं) अमेरिका को सौंपने को तैयार है।
- दोनों देशों के बीच शांति समझौता "बहुत करीब" है।
- ईरान होर्मुज की खाड़ी को खुला रखेगा और अमेरिकी ब्लॉकेड का कोई असर नहीं।
- ईरान हमास और हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को सपोर्ट बंद कर देगा।
- ईरान के न्यूक्लियर साइट्स "पूरी तरह तबाह" हो चुकी हैं।
- बातचीत में कोई अड़चन नहीं है।

ईरान ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। गालिबाफ ने कहा कि ये सात दावे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। ईरान की स्थिति साफ है — संवर्धित यूरेनियम उसकी संप्रभु संपत्ति है और इसे किसी तीसरे देश या अमेरिका को ट्रांसफर करना "रेड लाइन" है।

 क्या चल रहा है?
2025-2026 के बीच अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स (नतांज, फोर्डो, इस्फहान) पर हमले किए थे, जिन्हें ट्रम्प "ऑब्लिटरेटेड" बताते हैं। लेकिन ईरान ने इन हमलों के बावजूद अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम बनाए रखा है। अब ओमान और अन्य मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है, जिसमें मुख्य मुद्दे हैं:
- ईरान का यूरेनियम संवर्धन अधिकार
- प्रतिबंध हटाना
- फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति (लगभग 100 अरब डॉलर+)
- क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स का मुद्दा

ट्रम्प प्रशासन ईरान से पूर्ण यूरेनियम समर्पण और लंबे समय तक संवर्धन रोकने की मांग कर रहा है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता का सवाल मानता है। ईरानी अधिकारी कहते हैं कि यूरेनियम ट्रांसफर की बात कभी भी वार्ता का हिस्सा नहीं रही।

 ईरान का मजबूत संदेश
ईरान ने सिर्फ इनकार ही नहीं किया, बल्कि चेतावनी भी दी है। अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉकेड जारी रखता है तो होर्मुज की खाड़ी "खुली नहीं रहेगी"। दुनिया जानती है कि होर्मुज से गुजरने वाला तेल विश्व अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ईरान का यह बयान अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए साफ चेतावनी है — "हम दबाव में नहीं झुकेंगे।"

ईरानी मीडिया और अधिकारी ट्रम्प को "झूठों की फैक्ट्री" कहकर मजाक उड़ा रहे हैं। एक फारसी कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने ट्रम्प के दावों को "ऊंट का सपना" बताया — यानी पूरी तरह अवास्तविक और हवाई किले।

 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- चीन और रूस ने ईरान के रुख का समर्थन किया है। वे कहते हैं कि अमेरिका अपनी "बुली" नीति से बाज आए।
- यूरोपीय देश चिंतित हैं कि अगर बातचीत टूट गई तो क्षेत्र में नया युद्ध छिड़ सकता है।
- भारत जैसे देश, जो दोनों तरफ से तेल आयात करते हैं, स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। ईरान की फ्रीज संपत्ति में भारत का भी हिस्सा शामिल है।

क्यों मायने रखता है यह विवाद?
ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम लंबे समय से वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा रहा है। ट्रम्प का दावा अगर सच होता तो यह अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक जीत होती, लेकिन ईरान के सख्त इनकार ने सारी तस्वीर बदल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प अपनी घरेलू राजनीति और 2026 के मध्यावधि चुनावों को ध्यान में रखकर अतिरंजित बयान दे रहे हैं।

ईरान की मजबूत स्थिति दिखाती है कि वह दबाव में नहीं आएगा। तेहरान का संदेश साफ है — हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। संवर्धित यूरेनियम हमारी संपत्ति है और इसे हम नहीं सौंपेंगे।

ट्रम्प की "झूठों की फैक्ट्री" अब पूरी दुनिया देख रही है। एक घंटे में सात झूठ — यह रिकॉर्ड तोड़ने वाला है। ईरान ने न सिर्फ पर्दाफाश किया है, बल्कि आक्रामक तरीके से जवाब दिया है। अब देखना यह है कि अगली बातचीत (संभवतः इस्लामाबाद में) में क्या होता है। क्या ट्रम्प अपनी बात पर अड़े रहेंगे या वास्तविकता स्वीकार करेंगे?

ईरान की यह आक्रामकता न सिर्फ ट्रम्प को झटका दे रही है, बल्कि पूरे अमेरिका-इजरायल एक्सिस को भी चुनौती दे रही है। क्षेत्रीय संतुलन में ईरान की भूमिका अब और मजबूत दिख रही है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 18,2026