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Wednesday, 8 April 2026

ट्रंप का सीजफायर: अमेरिका में इस्तीफे की मांग क्यों तेज हुई? डेमोक्रेट्स का आरोप – ‘पूर्ण सरेंडर’ और ‘पागलपन की नीति’

ट्रंप का सीजफायर: अमेरिका में इस्तीफे की मांग क्यों तेज हुई? डेमोक्रेट्स का आरोप – ‘पूर्ण सरेंडर’ और ‘पागलपन की नीति’
-Friday World-April 8,2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अप्रैल 2026 को ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया। इससे पहले ट्रंप ने ईरान पर भारी हमलों की धमकी दी थी, जिसमें सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की बात भी शामिल थी। लेकिन सीजफायर घोषणा होते ही अमेरिका में डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सीनेटर क्रिस मर्फी ने इसे ट्रंप का “पूर्ण सरेंडर” बताया, जबकि कांग्रेसवुमन ग्वेन मूरे ने सभी सांसदों से अपील की कि ट्रंप की “पागलपन वाली नीति” को तुरंत खत्म किया जाए। कई डेमोक्रेट्स ने अब ट्रंप के इस्तीफे या 25वें संशोधन के तहत उन्हें हटाने की मांग तेज कर दी है।

यह विवाद अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हो रहा है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर शुरू हुआ था। ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह खोलने का वादा किया है, लेकिन ईरानी पक्ष ने इसे अपनी जीत बताया और कुछ शर्तें रखीं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि यह समझौता अमेरिका की रणनीतिक हार है, जिसने ईरान को क्षेत्रीय नियंत्रण दे दिया।

 सीजफायर की पृष्ठभूमि: धमकी से समझौते तक

पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका-ईरान संबंध तेजी से बिगड़े। ट्रंप ने ईरान पर हमलों की चेतावनी दी थी, जिसमें ब्रिज, पावर प्लांट्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करने की बात कही गई। उन्होंने इसे होर्मुज स्ट्रेट (जिससे दुनिया का बड़ा तेल निर्यात होता है) को फिर से खोलने के लिए जरूरी बताया। लेकिन आखिरी घड़ी में ट्रंप ने दो हफ्ते के लिए बमबारी रोकने का ऐलान कर दिया।

ट्रंप ने कहा कि यह सीजफायर ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” रूप से खोलने की शर्त पर आधारित है। उन्होंने इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताया। लेकिन विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इसे उल्टा पलट दिया। सीनेटर क्रिस मर्फी ने सीएनएन पर कहा कि अगर ईरानी बयान का सिर्फ आधा हिस्सा भी सही है, तो ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण सौंप दिया है। उन्होंने इसे “दुनिया के लिए विनाशकारी” और “इतिहास बदल देने वाली ईरान की जीत” करार दिया।
मर्फी ने आगे कहा, “ट्रंप हर रोज झूठ बोलते हैं, लेकिन अगर ईरानी दावों का एक हिस्सा भी सच है, तो यह अमेरिका की हार है।” उन्होंने रिपब्लिकन नेताओं से अपील की कि कांग्रेस को तुरंत बुलाया जाए और इस “युद्ध” को रोका जाए। कुछ रिपोर्ट्स में मर्फी ने 25वें संशोधन (जिसके तहत राष्ट्रपति को अयोग्य ठहराया जा सकता है) का जिक्र भी किया और ट्रंप के मानसिक संतुलन पर सवाल उठाए।

ग्वेन मूरे की अपील: ‘ट्रंप को किसी भी तरह हटाओ’

विस्कॉन्सिन की डेमोक्रेटिक कांग्रेसवुमन ग्वेन मूरे ने सीजफायर के बाद और तेज हमला बोला। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि ट्रंप की “पागलपन वाली नीति” को खत्म करने के लिए एकजुट हों। मूरे ने कहा कि ट्रंप राष्ट्रपति पद के लिए पूरी तरह अयोग्य हैं और उन्हें किसी भी संभव तरीके से पद से हटाया जाना चाहिए।
मूरे और अन्य डेमोक्रेट्स (जैसे सेथ मौलटन, एड मार्की आदि) का आरोप है कि ट्रंप ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के युद्ध शुरू किया, जिससे अमेरिकी सैनिकों की जान गई, सिविलियन मौतें हुईं, गैस की कीमतें बढ़ीं और अमेरिका की विश्वसनीयता को भारी नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि 39 दिनों के “अराजकता और नरसंहार” के बाद सिर्फ एक अस्थायी ठहराव मिला है, जो कोई उपलब्धि नहीं बल्कि कमजोरी का सबूत है।

कई डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस की स्प्रिंग रिसेस बुलाकर सेशन शुरू करने और ट्रंप के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कुछ ने तो इस्तीफे की सीधी मांग कर दी।

डेमोक्रेट्स के मुख्य आरोप

1. पूर्ण सरेंडर: मर्फी का कहना है कि ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण दे दिया, जो पहले भी खुला था। युद्ध शुरू करने का कोई फायदा नहीं हुआ।

2. युद्ध अपराधों की धमकी: ट्रंप ने पावर प्लांट्स और ब्रिजेस को नष्ट करने की बात कही, जिसे मर्फी ने “मास वॉर क्राइम” बताया। इससे हजारों निर्दोष ईरानियों की मौत हो सकती थी।

3. अयोग्यता: ट्रंप की नीतियां “पागलपन” वाली हैं। उन्होंने बिना सोचे-समझे युद्ध शुरू किया, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ है।

4. आर्थिक नुकसान: युद्ध से तेल की कीमतें बढ़ीं, ग्लोबल शिपिंग प्रभावित हुई और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ा।

5. कांग्रेस की अनदेखी: युद्ध कांग्रेस की मंजूरी के बिना शुरू किया गया, जो संवैधानिक उल्लंघन है।

डेमोक्रेट्स का तर्क है कि ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति असल में अमेरिका को कमजोर कर रही है। उन्होंने पूछा – अगर होर्मुज पहले भी खुला था, तो युद्ध क्यों शुरू किया? अब सिर्फ दो हफ्ते का ठहराव मिला है, लेकिन ईरान को रणनीतिक लाभ हो गया।

 रिपब्लिकन पक्ष और ट्रंप का बचाव

रिपब्लिकन और ट्रंप समर्थक इसे कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उनकी सख्ती के कारण ईरान पीछे हटा और होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुलने वाला है। कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने उम्मीद जताई कि यह सीजफायर स्थायी शांति की दिशा में कदम साबित होगा।

ट्रंप ने स्काई न्यूज से फोन पर बात करते हुए कहा कि यह समझौता ईरान पर दबाव का नतीजा है। उन्होंने दावा किया कि आगे बातचीत होगी और ईरान की 10-पॉइंट प्लान पर चर्चा हो सकती है। लेकिन विपक्ष इसे ट्रंप की पीछे हटने की मजबूरी बता रहा है।

क्यों तेज हुई इस्तीफे की मांग?

यह मांग अचानक नहीं है। डेमोक्रेट्स लंबे समय से ट्रंप की विदेश नीति, घरेलू फैसलों और बयानबाजी पर हमलावर रहे हैं। ईरान सीजफायर ने उन्हें एक नया मुद्दा दे दिया। मुख्य कारण:

- रणनीतिक हार का आरोप: डेमोक्रेट्स कहते हैं कि ट्रंप ने maximalist (अधिकतम) मांगें रखीं लेकिन अंत में समझौता कर लिया, जो कमजोरी दिखाता है।

- मानवीय और नैतिक मुद्दा: सिविलियन मौतों और युद्ध अपराधों की धमकियों ने आलोचना बढ़ाई।

- घरेलू राजनीति: 2026 के मिडटर्म इलेक्शन नजदीक हैं। डेमोक्रेट्स इसे ट्रंप को कमजोर करने का मौका मान रहे हैं।

- कांग्रेस vs राष्ट्रपति: डेमोक्रेट्स कांग्रेस की भूमिका मजबूत करने और युद्ध शक्तियों पर नियंत्रण चाहते हैं।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह डेमोक्रेट्स की पारंपरिक “ट्रंप विरोध” रणनीति का हिस्सा है, जबकि दूसरों का मानना है कि सीजफायर में वाकई कुछ कमियां हैं, खासकर यदि ईरान होर्मुज पर अपना प्रभाव बनाए रखे।

आगे क्या?

अभी सीजफायर सिर्फ दो हफ्ते का है। बातचीत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो सकती है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी समझौता नहीं हुआ, तो तनाव फिर बढ़ सकता है। अमेरिका में कांग्रेस का सेशन शुरू होने पर बहस और तेज होगी। डेमोक्रेट्स 25वें संशोधन या महाभियोग जैसे कदमों की चर्चा कर रहे हैं, हालांकि रिपब्लिकन बहुमत के कारण इनके सफल होने की संभावना कम है।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिकी राजनीति कितनी ध्रुवीकृत है। एक सीजफायर, जो शांति का संदेश होना चाहिए था, वहां इस्तीफे और हटाने की मांगों में बदल गया। ट्रंप के समर्थक इसे “मीडिया और डेमोक्रेट्स का साजिश” बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे “ट्रंप की असफलता” का प्रमाण मान रहा है।

अंत में, ईरान सीजफायर अमेरिका की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू राजनीति के बीच गहरे अंतर्संबंध को उजागर करता है। अब देखना होगा कि अगले दो हफ्ते में क्या होता है – स्थायी शांति या नया संघर्ष?

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 8,2026