-Friday World-April 8,2026
तेल की कमी और वैश्विक संकट की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल (जैसे XP95, Power95, Speed) के दाम बढ़ा दिए, जबकि आम नागरिकों द्वारा इस्तेमाल होने वाला साधारण पेट्रोल (अब अनिवार्य रूप से E20 – 20% एथेनॉल मिश्रित) के दाम नहीं बढ़ाए। प्रीमियम पेट्रोल में मात्र 10% एथेनॉल की मिलावट बताई जाती है, जबकि साधारण पेट्रोल में 20-30% तक एथेनॉल मिलाया जा रहा है। कई विशेषज्ञ और वाहन मालिकों का आरोप है कि उच्च एथेनॉल ब्लेंडिंग गाड़ियों के इंजन के लिए हानिकारक है – माइलेज घटता है, पुराने इंजनों में जंग लगती है, रबर पार्ट्स खराब होते हैं और रखरखाव का खर्च बढ़ जाता है।
इस नीति पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह एथेनॉल उत्पादकों को फायदा पहुंचाने का तरीका है। खासतौर पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के परिवार से जुड़ी कंपनियों (जैसे Cian Agro Industries, जहां उनके बेटे निखिल गडकरी सक्रिय हैं) पर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट के आरोप लगे हैं। क्या आम आदमी की जेब कट रही है जबकि कुछ खास कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं?
तेल संकट के बीच चुनिंदा मूल्य वृद्धि: फैक्ट क्या है?
मार्च-अप्रैल 2026 में मध्य पूर्व (ईरान-इजराइल) तनाव के कारण वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। भारत जैसे तीसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक देश पर इसका असर पड़ा। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम ₹2 से ₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए। कुछ शहरों में XP100 जैसी हाई-ऑक्टेन प्रीमियम वैरिएंट्स में ₹11 तक की बढ़ोतरी हुई।
सरकार का तर्क साफ है: प्रीमियम पेट्रोल कुल बिक्री का सिर्फ 2-5% है, इसलिए आम आदमी पर असर नहीं पड़ेगा। नियमित पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी गईं (दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹94.77/लीटर)। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे **E20** (20% एथेनॉल वाला साधारण पेट्रोल) को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि प्रीमियम में कम एथेनॉल होता है और वह महंगा हो गया।
1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 अनिवार्य हो गया है – यानी हर पंप पर बेचा जाने वाला पेट्रोल अब 20% एथेनॉल मिश्रित और न्यूनतम 95 RON (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) वाला होगा। सरकार का दावा है कि इससे क्रूड आयात कम होगा, विदेशी मुद्रा बचत होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण घटेगा।
एथेनॉल ब्लेंडिंग का सच: माइलेज घटे, इंजन खराब?
एथेनॉल में पेट्रोल से 30-34% कम ऊर्जा होती है। इसलिए E20 में माइलेज 2-4% तक घट सकता है (ऑटोमेकर्स SIAM के अनुसार)। पुरानी गाड़ियों (2022 से पहले की) में समस्या ज्यादा है:
- एथेनॉल नमी सोखता है, जिससे फ्यूल सिस्टम में जंग लग सकती है।
- रबर सील्स, गास्केट्स और होज़ेस सूज सकते हैं या फट सकते हैं।
- इंजेक्टर क्लॉगिंग, रफ आइडलिंग, स्टार्टिंग प्रॉब्लम और पावर लॉस की शिकायतें बढ़ रही हैं।
- कुछ सर्वे (LocalCircles) में 28% पुरानी गाड़ी मालिकों ने असामान्य वियर एंड टियर रिपोर्ट किया।
सरकार और PIB का जवाब: ये चिंताएं “अनुचित” हैं। ARAI, IIP और IOC के टेस्ट्स में E20 सुरक्षित पाया गया। पुरानी गाड़ियों में कुछ रबर पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं, लेकिन खर्च कम है। हालांकि, कई वाहन मालिक और मैकेनिक असहमत हैं। वे कहते हैं कि असली समस्या E20 को “साधारण” बनाकर थोपना है, जबकि प्रीमियम (कम ब्लेंड) महंगा हो गया।
गडकरी परिवार और एथेनॉल कंपनियां: कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट?
एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने वाले नेता नितिन गडकरी रहे हैं। लेकिन 2025 में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गडकरी के बेटे **निखिल गडकरी** Cian Agro Industries Infrastructure Ltd. चलाते हैं, जबकि दूसरे बेटे **सारंग गडकरी** Manas Agro Industries से जुड़े हैं। ये कंपनियां एथेनॉल और शुगर सेक्टर में सक्रिय हैं।
- Cian Agro की आय Q1 FY24 में ₹17-18 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹510-523 करोड़ हो गई।
- शेयर प्राइस में 2000% से ज्यादा उछाल आया।
- कांग्रेस नेता पवन खेरा ने इसे “कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट” बताया और लोकपाल जांच की मांग की।
गडकरी ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह “शक्तिशाली आयात लॉबी” का काम है जो एथेनॉल से नुकसान में है। उन्होंने दावा किया कि वे अपने बेटों को आइडिया देते हैं लेकिन फ्रॉड नहीं करते। परिवार की कंपनियां एथेनॉल के अलावा अन्य बिजनेस भी करती हैं, और ग्रोथ सिर्फ नीति से नहीं हुई।
यह विवाद राजनीतिक है, लेकिन यह सवाल जरूर उठाता है कि नीति बनाने वाले और उससे फायदा पाने वाले के बीच पारदर्शिता कितनी है। एथेनॉल उद्योग में क्षमता बढ़ी है, लेकिन क्या आम उपभोक्ता और पर्यावरण को असली फायदा हो रहा है?
### सरकार का पक्ष: ऊर्जा सुरक्षा, किसान और पर्यावरण
सरकार के अनुसार E20 प्रोग्राम ने अब तक:
- हजारों करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई।
- लाखों मीट्रिक टन क्रूड की बचत की।
- किसानों को हजारों करोड़ का अतिरिक्त आय दी (मुख्यतः गन्ना और अनाज से एथेनॉल)।
- CO2 उत्सर्जन घटाया।
2025-26 में E20 से ₹40,000 करोड़ किसानों को और ₹43,000 करोड़ विदेशी मुद्रा बचत का अनुमान है। एथेनॉल की कीमत अब पेट्रोल से महंगी हो गई है, फिर भी OMCs ब्लेंडिंग जारी रखे हुए हैं क्योंकि बड़े लक्ष्य हैं।
आलोचना का पक्ष: आम आदमी vs कुछ कंपनियों का फायदा?
- माइलेज और रखरखाव: उपभोक्ता कहते हैं कि पेट्रोल महंगा हो रहा है लेकिन माइलेज कम हो रहा है – असल में महंगा पड़ रहा है।
- चुनिंदा मूल्य वृद्धि: सिर्फ प्रीमियम बढ़ाना E20 को मजबूर करने जैसा लगता है।
- पुरानी गाड़ियां: भारत में लाखों पुरानी गाड़ियां और बाइक्स हैं, जिनके लिए E20 उपयुक्त नहीं बताया जाता।
- लॉबी का प्रभाव: शुगर और एथेनॉल लॉबी मजबूत है। कुछ राज्यों में पानी की कमी वाले इलाकों में गन्ना खेती पर भी सवाल हैं।
- पारदर्शिता: अगर नीति से किसी मंत्री के परिवार की कंपनियां फायदे में हैं, तो जांच जरूरी है।
आगे क्या?
अभी E20 अनिवार्य है, लेकिन E22 या उससे ज्यादा ब्लेंडिंग की चर्चा चल रही है। ऑटो इंडस्ट्री कहती है कि इससे और रीकैलिब्रेशन की जरूरत पड़ेगी। सरकार का कहना है कि आगे का फैसला स्टेकहोल्डर्स से बात करके लिया जाएगा।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह:
- नई गाड़ियां E20 के अनुकूल खरीदें।
- पुरानी गाड़ियों में नियमित सर्विसिंग कराएं, खासकर फ्यूल सिस्टम चेक कराएं।
- माइलेज ट्रैक करें और शिकायत दर्ज करें अगर समस्या हो।
यह मुद्दा सिर्फ पेट्रोल की कीमत का नहीं, बल्कि नीति, पारदर्शिता, उपभोक्ता हित और ऊर्जा सुरक्षा का है। क्या E20 वाकई “क्लीनर फ्यूल” है या सिर्फ कुछ उद्योगों को फायदा पहुंचाने का माध्यम? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल आम ड्राइवर महसूस कर रहे हैं कि उनकी जेब और इंजन दोनों पर बोझ बढ़ रहा है।
सरकार को चाहिए कि E20 के प्रभाव पर स्वतंत्र अध्ययन कराए, पुरानी गाड़ियों के लिए राहत दे और किसी भी कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट की जांच कराए। तभी विश्वास बहाल होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 8,2026