-Friday World-April 16,2026
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पिछले डेढ़ महीने से मंडरा रहा संकट अब समाप्त होने की राह पर दिख रहा है। फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। अब रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में एक नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान ओमान के जल क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को बिना किसी हमले के खतरे के पास जाने की अनुमति दे सकता है, बशर्ते दोनों पक्षों के बीच कोई मजबूत शांति समझौता हो जाए।
यह कदम अगर सफल रहा तो सैकड़ों अटके टैंकरों और लगभग 20,000 नाविकों को राहत मिल सकती है। साथ ही तेल और गैस की कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
होर्मुज की स्ट्रेट क्यों इतनी महत्वपूर्ण है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मात्र 34 किलोमीटर चौड़ी संकरी खाड़ी है। इसमें एक तरफ ईरान का जल क्षेत्र है तो दूसरी तरफ ओमान का। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात इसी रास्ते से होता है। संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बाधित कर दिया। जहाजों पर हमले, समुद्री माइन्स बिछाने और कुछ जहाजों से टोल वसूलने की घटनाएं हुईं।
नतीजतन, गल्फ क्षेत्र में सैकड़ों टैंकर फंस गए। शिपिंग ट्रैफिक सामान्य स्तर से बहुत कम हो गया। वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ीं। एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। कई देशों को महंगे वैकल्पिक रूट अपनाने पड़े, जिससे परिवहन लागत बढ़ गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा कि होर्मुज को पूरी तरह खोलना जरूरी है। अमेरिका ने माइन्स साफ करने और ब्लॉकेड लगाने की कार्रवाई शुरू की। ईरान ने भी अपनी स्थिति मजबूत रखी और अपनी मांगों पर अड़ा रहा।
ईरान का नया प्रस्ताव: क्या है खास?
रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को यह ऑफर दिया है कि अगर शांति समझौता हो जाता है तो वह ओमान के जल क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को बिना रुकावट या हमले के खतरे के जाने देगा। यह प्रस्ताव ईरान की रणनीतिक समझ को दर्शाता है।
ईरान जानता है कि पूरी स्ट्रेट पर उसका प्रभाव है, लेकिन ओमान की तरफ का हिस्सा उसके सीधे नियंत्रण से थोड़ा बाहर है। इस ऑफर से ईरान बिना पूरी तरह हार माने कुछ राहत दे सकता है। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण पहलू अभी स्पष्ट नहीं हैं:
- क्या ईरान उस क्षेत्र में बिछाई गई समुद्री माइन्स हटाएगा?
- क्या इजरायल से जुड़े जहाजों को भी यह सुविधा मिलेगी?
- क्या ईरान टोल (ट्रांजिट फीस) की मांग पूरी तरह छोड़ देगा?
ईरान का कहना है कि यह प्रस्ताव तभी लागू होगा जब अमेरिका उसकी मुख्य मांगों को स्वीकार कर ले। इन मांगों में हमलों का अंत, सुरक्षा गारंटी, प्रतिबंधों में ढील और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई शामिल है।
बातचीत का नया दौर और पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत लंबी चली लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। अब दूसरे दौर की संभावना मजबूत है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि युद्ध समाप्ति के करीब है और ईरान डील करना चाहता है।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने दोनों पक्षों से संपर्क बनाए रखा है। सूत्रों के अनुसार, अगला राउंड जल्द हो सकता है। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारी शामिल हैं। मुख्य मुद्दे अभी भी बाकी हैं—ईरान का न्यूक्लियर कार्यक्रम, होर्मुज पर नियंत्रण और क्षेत्रीय सुरक्षा।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज में माइन्स साफ करने का काम कर रही है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर दबाव बढ़ा तो क्षेत्रीय बंदरगाहों पर जवाबी कार्रवाई हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस संकट ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया:
- तेल की कीमतें शुरू में तेजी से बढ़ीं, अब कुछ स्थिरता आई है लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है।
- शिपिंग कंपनियों को रूट बदलने पड़े, लागत बढ़ी और डिलीवरी में देरी हुई।
- गल्फ देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और कतर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।
- भारत समेत एशियाई देशों में तेल आयात महंगा पड़ा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों और मुद्रास्फीति पर असर पड़ा।
अगर ईरान का प्रस्ताव आगे बढ़ा और माइन्स हटाने पर सहमति बनी तो शिपिंग जल्द सामान्य हो सकती है। इससे ऊर्जा बाजार स्थिर होगा और वैश्विक व्यापार को राहत मिलेगी।
आगे का रास्ता क्या है?
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष अब युद्ध से थक चुके हैं। ईरान ने दिखा दिया कि वह होर्मुज को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। अमेरिका भी पूर्ण युद्ध से बचना चाहता है क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
ट्रंप की मजबूत दबाव वाली नीति और ईरान की रणनीतिक धैर्य वाली रणनीति अब डिप्लोमेसी की तरफ मुड़ रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता अगर सफल रही तो होर्मुज संकट का अंत संभव है।
हालांकि, चुनौतियां अभी बाकी हैं। माइन्स को पूरी तरह साफ करना आसान नहीं। इजरायल का मुद्दा अलग से जटिल है। न्यूक्लियर कार्यक्रम पर दोनों पक्षों की लाल लाइनें सख्त हैं। फिर भी, ईरान की यह नई पेशकश से उम्मीद जगी है कि तनाव कम होगा और दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट से बच जाएगी।
होर्मुज का संकट केवल दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का है। ईरान की नई ऑफर अगर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी तो वैश्विक राहत का बड़ा स्रोत बनेगी। अंतिम सफलता बातचीत की मेज पर निर्भर करेगी। फिलहाल, दुनिया सांस रोके इंतजार कर रही है कि क्या युद्ध की छाया पूरी तरह हट पाएगी या नई जटिलताएं सामने आएंगी।
भविष्य की घटनाएं स्थिति को बदल सकती हैं। यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है और किसी भी पक्ष की पक्षपातपूर्ण व्याख्या नहीं करता।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 16,2026