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Saturday, 11 April 2026

“युद्ध के लिए अरबों डॉलर, लेकिन गरीबों को रोटी नहीं” – न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी का ट्रंप और अमेरिकी नीतियों पर तीखा हमला"

“युद्ध के लिए अरबों डॉलर, लेकिन गरीबों को रोटी नहीं” – न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी का ट्रंप और अमेरिकी नीतियों पर तीखा हमला"
-Friday World-April 11,2026 
न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार को जंग लड़ने के लिए अरबों-खरबों डॉलर आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन अपने देश के कामगार वर्ग, गरीबों, बेघरों और युवाओं की बेहतरी के लिए पैसा नहीं निकलता। ममदानी ने इसे सरकार की गलत प्राथमिकताओं का सबसे बड़ा सबूत बताया।

एक हालिया इंटरव्यू और सार्वजनिक बयानों में ममदानी ने कहा, “हमेशा युद्ध के लिए पैसा मिल जाता है, लेकिन गरीबों को खिलाने के लिए नहीं।” उन्होंने टुपैक शakur के प्रसिद्ध गीत की लाइन को दोहराते हुए जोर दिया कि अमेरिका रोजाना 900 मिलियन डॉलर (लगभग 900 करोड़ रुपये) से ज्यादा खर्च करके ईरान जैसे देशों में युद्ध चला रहा है, जिसमें हजारों आम नागरिक मारे जा रहे हैं।

ममदानी ने कहा, “हम एक ऐसे संघीय सरकार की बात कर रहे हैं जिसने करोड़ों लोगों को निराशा में धकेलने के लिए दसियों अरब डॉलर जुटा लिए, लेकिन वही पैसा न्यूयॉर्क और पूरे अमेरिका के कामगार वर्ग को ऊपर उठाने के लिए इस्तेमाल करने से इनकार कर रही है।”

 युद्ध का खर्च बनाम घरेलू जरूरतें
ममदानी के अनुसार, ईरान से जुड़े हालिया संघर्ष में अब तक 23 बिलियन डॉलर (लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। उन्होंने पूछा – क्या यह रकम स्वास्थ्य सेवा (मेडिकेयर), शिक्षकों की भर्ती, छात्र ऋण माफी या आवास संकट को हल करने में नहीं लगाई जा सकती थी?

न्यूयॉर्क शहर में एक चौथाई से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे है। शहर में 1 लाख से ज्यादा स्कूली बच्चे लगातार नौवें साल बेघर हैं। ममदानी ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा, सस्ता आवास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को “अव्यावहारिक” बताना सरकार की प्राथमिकताओं की पोल खोलता है।

वे बोले, “जिन चीजों को हम ‘अव्यावहारिक’ बताते हैं, उनकी लागत इस युद्ध की तुलना में बहुत कम है। हम हजारों नागरिकों की जान लेने के लिए दसियों अरब डॉलर खर्च कर रहे हैं, जबकि वही पैसा हमारे लोगों की जिंदगी आसान बनाने में लगाया जा सकता था।”

 ट्रंप प्रशासन पर सीधा हमला
ममदानी ने स्पष्ट रूप से ट्रंप सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विदेश नीति में “शासन परिवर्तन” (regime change) के युद्धों का अमेरिका को कोई फायदा नहीं हुआ है। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और अब ईरान के उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि ऐसे युद्ध न सिर्फ विदेश में तबाही मचाते हैं, बल्कि घरेलू अर्थव्यवस्था को भी कमजोर करते हैं।

ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है, जिससे न्यूयॉर्क के आम नागरिकों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। ममदानी ने इसे “बहुत मुश्किल प्रभाव” बताया और कहा कि युद्ध की वजह से पेट्रोल, रसोई गैस और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, जबकि सरकार घरेलू मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही।

 कामगार वर्ग की आवाज़
ज़ोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट मेयर के रूप में जाने जाते हैं। वे लगातार कामगार वर्ग, अल्पसंख्यक समुदायों और युवाओं की बात करते रहे हैं। उनका यह बयान सिर्फ एक आलोचना नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीति में बढ़ते असंतोष की आवाज है – जहां लोग पूछ रहे हैं कि टैक्सपेयर का पैसा विदेशी युद्धों में क्यों बर्बाद किया जा रहा है, जबकि देश के अंदर स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसे बुनियादी अधिकार अभी भी सपना बने हुए हैं।

ममदानी ने जोर दिया कि सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध पर खर्च होने वाला पैसा घरेलू विकास पर लगाया जाए, तो लाखों परिवारों की जिंदगी बदल सकती है। वे पूछते हैं – क्या हजारों निर्दोष नागरिकों की मौत और अरबों डॉलर की बर्बादी वाकई अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि के लिए जरूरी है?

 वैश्विक संदर्भ और बहस
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। ममदानी ने युद्ध को “नागरिकों की हत्या” करार दिया और कहा कि इसे हर आधार पर विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने टुपैक की लाइन “money for war but not to feed the poor” को दोहराकर युवा पीढ़ी और प्रगतिशील आवाजों से जुड़ने की कोशिश की है।

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ममदानी की यह आलोचना सिर्फ ट्रंप सरकार तक सीमित नहीं है। यह अमेरिकी विदेश नीति की लंबे समय से चली आ रही “मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स” की आलोचना है, जिसमें युद्ध उद्योग को फायदा पहुंचाने के लिए संसाधनों को प्राथमिकता दी जाती है।

क्या कहते हैं आंकड़े?
- अमेरिका का वार्षिक रक्षा बजट 800 बिलियन डॉलर से ऊपर है।
- एक दिन का ईरान युद्ध खर्च: लगभग 900 मिलियन डॉलर।
- न्यूयॉर्क में बेघर स्कूली बच्चों की संख्या: 1 लाख से ज्यादा।
- देश में गरीबी दर: कई शहरों में 20-25% तक।

ममदानी का तर्क है कि अगर युद्ध पर खर्च का सिर्फ एक छोटा हिस्सा भी स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास पर लगाया जाए, तो लाखों अमेरिकियों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

 निष्कर्ष: प्राथमिकताओं का सवाल
ज़ोहरान ममदानी का यह हमला सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है। यह अमेरिका की उन प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाता है जो युद्ध और विनाश को प्राथमिकता देती हैं, जबकि अपने नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करती हैं।

ममदानी कहते हैं – “हमारे पास युद्ध के लिए हमेशा पैसा होता है, लेकिन गरीबों को खिलाने के लिए नहीं।” यह वाक्य आज के अमेरिका की सबसे बड़ी विडंबना को उजागर करता है।

अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन और कांग्रेस इस आलोचना को गंभीरता से लेगी या फिर युद्ध की राह पर आगे बढ़ती रहेगी? न्यूयॉर्क के मेयर की यह आवाज न सिर्फ अमेरिका में, बल्कि पूरे विश्व में प्रगतिशील ताकतों को नई दिशा दे रही है – शांति, न्याय और कामगार वर्ग की भलाई की दिशा में।

यदि सरकार अपनी प्राथमिकताएं नहीं बदलती, तो आने वाले दिनों में ऐसे और मजबूत विरोध देखने को मिल सकते हैं। क्योंकि आम नागरिक अब पूछ रहे हैं – हमारा पैसा कहां जा रहा है? और क्यों हमारे बच्चों का भविष्य युद्धों की भेंट चढ़ाया जा रहा है?

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 11,2026