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Friday, 17 April 2026

प्रियंका गांधी का लोकसभा में तीखा हमला: “ये महिला आरक्षण नहीं, पूरे देश में असम मॉडल लागू करने की साजिश है”

प्रियंका गांधी का लोकसभा में तीखा हमला: “ये महिला आरक्षण नहीं, पूरे देश में असम मॉडल लागू करने की साजिश है”-Friday World-April 17,2026 
नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026: लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद **प्रियंका गांधी वाड्रा** ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में “असम मॉडल” लागू करना चाहती है, जहां विपक्षी दलों की सीटों को काट-पीटकर राजनीतिक फायदा उठाया गया था।

प्रियंका गांधी ने साफ शब्दों में कहा,  
“जिस तरह असम में इन्होंने मनचाही सीटों का काटा-पीटा, विपक्षी दलों के नेताओं की सीटों का विभाजन किया और अपने राजनीतिक फायदे के लिए नई सीमाएं बनाई, उसी तरह ये पूरे देश में करना चाहते हैं।”

 जाति जनगणना पर जोर, 2011 की जनगणना पर सवाल

प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को “अधूरा और राजनीतिक चाल” बताते हुए कहा कि बिना **जाति जनगणना** के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन इसलिए करना चाहती है क्योंकि उसमें OBC वर्ग की संख्या दर्ज नहीं है।

उन्होंने कहा,  
“जब तक जाति जनगणना नहीं होती, सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता। ये अनिवार्य है। ये सरकार 2011 की जनगणना पर इसलिए बढ़ना चाहती है क्योंकि इसमें OBC वर्ग की संख्या नहीं है।”

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर असल में **राजनीतिक मानचित्र** बदलना चाहती है, ताकि उत्तर भारत में अपनी सीटें बढ़ा सके और दक्षिण भारत तथा विपक्षी दलों की ताकत कम कर सके।

असम मॉडल का जिक्र क्यों महत्वपूर्ण?

प्रियंका गांधी ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हाल ही में हुई सीमा पुनर्निर्धारण (Delimitation) में विपक्षी दलों के कई मजबूत क्षेत्रों को तोड़ दिया गया और नई सीटें ऐसी बनाई गईं जो सत्ताधारी दल के लिए फायदेमंद थीं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही फॉर्मूला पूरे देश में लागू किया गया तो लोकतंत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा और क्षेत्रीय असंतोष बढ़ेगा।

 महिला आरक्षण पर प्रियंका का स्टैंड

प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है, लेकिन यह आरक्षण **निष्पक्ष और पारदर्शी** तरीके से होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि:

- पहले जाति जनगणना होनी चाहिए।
- OBC, SC, ST महिलाओं को भी आरक्षण के अंदर सब-कोटा मिलना चाहिए।
- परिसीमन केवल आबादी के आधार पर नहीं, बल्कि विकास सूचकांक और आर्थिक योगदान को भी ध्यान में रखकर होना चाहिए।

विपक्ष की एकजुटता

प्रियंका गांधी के भाषण के दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने जोरदार समर्थन किया। कई सदस्यों ने “जाति जनगणना करो” के नारे लगाए। कांग्रेस के अलावा दक्षिण भारतीय दलों (DMK, TMC, TDP आदि) ने भी बिल का विरोध किया और कहा कि परिसीमन से दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत कम होगी।

 सरकार की स्थिति

सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह और अन्य नेताओं ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। लेकिन विपक्ष के तीखे हमलों के बाद बिल को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और वह गिर गया।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी का भाषण विपक्ष को नया मुद्दा दे गया है। जाति जनगणना, OBC आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा अब चुनावी एजेंडे में प्रमुख हो सकता है। कई विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर सरकार केवल आबादी के आधार पर परिसीमन करती है तो दक्षिण भारत और छोटे राज्यों में गहरा असंतोष फैल सकता है।

प्रियंका गांधी के भाषण ने महिला आरक्षण बहस को नया आयाम दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि कांग्रेस महिला आरक्षण चाहती है, लेकिन वह “महिला आरक्षण का मुखौटा” लगाकर राजनीतिक सत्ता का गणित बदलने की कोशिश नहीं होने देगी।

आज का संसदीय सत्र एक बार फिर साबित करता है कि बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए सिर्फ बहुमत काफी नहीं है – व्यापक सहमति और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण भी जरूरी है।

अब सवाल यह है कि सरकार अगले कदम क्या उठाएगी – क्या वह जाति जनगणना पर सहमत होगी या फिर पुराने बिल को नए रूप में लेकर आएगी? देश की महिलाएं और विपक्ष दोनों इस जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 17,2026