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Friday, 17 April 2026

भारत IMF की रैंकिंग में फिसला: 6वें स्थान पर पहुंचा, लेकिन तेज विकास की राह पर मजबूत कदम

भारत IMF की रैंकिंग में फिसला: 6वें स्थान पर पहुंचा, लेकिन तेज विकास की राह पर मजबूत कदम
-Friday World-April 17,2026 
नई दिल्ली, अप्रैल 2026: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा विश्व आर्थिक आउटलुक (World Economic Outlook, अप्रैल 2026) ने भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में एक बार फिर बदलाव दर्ज किया है। भारत अब **छठे स्थान** पर पहुंच गया है। इससे पहले भारत पांचवें स्थान पर था और कुछ समय पहले जापान को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की चर्चाएं जोरों पर थीं। 

यह गिरावट मुख्य रूप से डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और कुछ तकनीकी कारणों (जैसे GDP बेस ईयर रिवीजन) के चलते हुई है। हालांकि, भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। IMF के अनुसार, 2026 में भारत का नाममात्र GDP (nominal GDP) लगभग **4.15 ट्रिलियन डॉलर** रहने का अनुमान है, जबकि जापान का 4.38 ट्रिलियन डॉलर और ब्रिटेन का 4.26 ट्रिलियन डॉलर है।

 रैंकिंग में बदलाव की पूरी तस्वीर

IMF के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 2026 की अनुमानित रैंकिंग इस प्रकार है:

1. संयुक्त राज्य अमेरिका — लगभग 32 ट्रिलियन डॉलर से अधिक  
2. चीन — लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर के आसपास  
3. जर्मनी — 5.45 ट्रिलियन डॉलर  
4. जापान — 4.38 ट्रिलियन डॉलर  
5. यूनाइटेड किंगडम — 4.26 ट्रिलियन डॉलर  
6. भारत — 4.15 ट्रिलियन डॉलर  

भारत 2025 में पांचवें स्थान पर था, लेकिन 2026 के अनुमानों में ब्रिटेन और जापान से पीछे रह गया। कुछ महीने पहले भारत ने जापान को पछाड़कर चौथे स्थान पर पहुंचने की खबरें आई थीं, लेकिन मुद्रा विनिमय दर और आंकड़ों के संशोधन ने इस रैंकिंग को प्रभावित किया।

गिरावट की मुख्य वजहें

1. रुपये की कमजोरी: नाममात्र GDP की गणना डॉलर में की जाती है। यदि रुपये का मूल्य डॉलर के मुकाबले गिरता है, तो भारत की अर्थव्यवस्था का आकार डॉलर में छोटा दिखाई देता है, भले ही घरेलू स्तर पर विकास मजबूत हो। पिछले कुछ वर्षों में रुपये में आई उतार-चढ़ाव ने इस प्रभाव को बढ़ाया है।

2. GDP बेस ईयर रिवीजन: भारत सरकार ने हाल ही में GDP की गणना का आधार वर्ष 2011-12 से 2022-23 कर दिया। यह बदलाव अधिक सटीक आंकड़े देने का प्रयास है, लेकिन इससे कुछ आंकड़ों में अस्थायी गिरावट आई है।

3. अन्य देशों का प्रदर्शन: ब्रिटेन और जापान की अर्थव्यवस्थाएं भी स्थिर रहीं, जिससे सापेक्षिक रैंकिंग प्रभावित हुई।

 सकारात्मक पक्ष: भारत अभी भी तेज गति से बढ़ रहा है

रैंकिंग में गिरावट के बावजूद IMF का अनुमान है कि भारत 2026 में भी **6.5%** के आसपास रियल GDP विकास दर हासिल करेगा, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ऊंची है। 

- 2027 तक भारत चौथे स्थान पर वापस पहुंच सकता है (लगभग 4.58 ट्रिलियन डॉलर)।
- 2028 तक जापान को पछाड़ने की संभावना है।
- लंबे समय में (2030 तक) भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

यह गिरावट नाममात्र (nominal) GDP की है, जबकि **क्रय शक्ति समता (PPP)** के आधार पर भारत पहले से ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है। डॉलर की मजबूती और मुद्रा विनिमय दर का प्रभाव समय के साथ कम हो सकता है। असली विकास घरेलू स्तर पर हो रहा है – मजबूत उपभोग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और युवा जनसांख्यिकी भारत के पक्ष में काम कर रही हैं।

कुछ विशेषज्ञ चेतावते हैं कि निर्यात, विनिर्माण और विदेशी निवेश को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि रुपये की स्थिरता बनी रहे और रैंकिंग में उतार-चढ़ाव कम हो।

आगे की राह क्या है?

भारत सरकार का फोकस आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और सुधारों पर है। यदि विकास दर 6.5-7% के आसपास बनी रही और रुपये में स्थिरता आई, तो भारत जल्द ही अपनी खोई हुई रैंकिंग वापस पा सकता है। 

यह घटना याद दिलाती है कि वैश्विक रैंकिंग केवल एक पहलू है। असली चुनौती घरेलू स्तर पर रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। 

भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की सबसे आशाजनक कहानियों में से एक है। अस्थायी गिरावट के बावजूद लंबी दौड़ में भारत की मजबूत स्थिति बनी हुई है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 17,2026