-Friday World-April 11,2026
1970 के दशक में ईरान की साक्षरता दर मात्र 47% के आसपास थी। शिक्षा मुख्य रूप से शहरों तक सीमित थी, ग्रामीण इलाकों और महिलाओं में यह दर और भी कम थी। फिर आई इस्लामिक क्रांति। अयातुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में नया शासन स्थापित हुआ। कई लोगों ने सोचा कि अब ईरान पिछड़ जाएगा, लेकिन हुआ ठीक उलटा। आज ईरान की वयस्क साक्षरता दर 89% से 93% तक पहुंच चुकी है, जबकि युवा (15-24 वर्ष) साक्षरता दर 98-99% है। महिलाओं में युवा साक्षरता लगभग 99% है। यह बदलाव शिक्षा क्रांति का नतीजा है, जिसमें लाखों स्कूल, यूनिवर्सिटी और साक्षरता अभियान चलाए गए।
सबसे आश्चर्यजनक बात महिलाओं की भागीदारी है। आज ईरान की यूनिवर्सिटी में 55% से ज्यादा छात्राएं हैं। कई क्षेत्रों में यह आंकड़ा 60-70% तक पहुंच जाता है। मेडिकल साइंस और बेसिक साइंस में महिलाएं 70% से अधिक हैं। डॉक्टरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 50% के आसपास है – जनरल प्रैक्टिशनर्स और रेजिडेंट्स में तो 50% से ज्यादा। स्पेशलिस्ट्स में भी करीब 40% महिलाएं हैं। वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स में भी महिलाओं की मौजूदगी मजबूत है। STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) क्षेत्र में ईरानी महिलाएं कई देशों से आगे हैं।
यह प्रगति सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं। ईरान ने प्रतिबंधों और चुनौतियों के बावजूद स्वदेशी तकनीक विकसित की है। हाल ही में अमेरिकी-इजरायली हमलों में **क़ुम प्रांत के ताज-खातून** के पास 7-स्पैन रेलवे ब्रिज बमबारी से क्षतिग्रस्त हो गया। दुनिया सोच रही थी कि ईरान की रेल व्यवस्था ठप हो जाएगी। लेकिन ईरानी इंजीनियरों ने मात्र 40 घंटे में उसे फिर से चालू कर दिया! रात-दिन काम, क्रेनें, वेल्डिंग की चिंगारियां – यह अदम्य इंजीनियरिंग का जीवंत उदाहरण है।
ईरान मिसाइल तकनीक में भी विश्व स्तर पर मजबूत है। उनके हाइपरसोनिक मिसाइल (जैसे फताह) तेज गति और मैन्यूवरिंग क्षमता के कारण कई एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे देते हैं। ईरानी मिसाइलें ऐसी हैं कि अमेरिका और इजरायल के कुछ एडवांस्ड इंटरसेप्टर भी उन्हें आसानी से पकड़ नहीं पाते। राडार टेक्नोलॉजी में ईरान खुद को दुनिया के टॉप देशों में गिनता है। उन्होंने पैसिव इंफ्रारेड सेंसर्स और एडवांस्ड राडार विकसित किए हैं, जो स्टेल्थ विमानों (जैसे F-35) की हीट सिग्नेचर को भी पकड़ लेते हैं। अमेरिकी RQ-170 ड्रोन को ईरान ने पहले पकड़ा था और उससे सीखकर अपना ड्रोन प्रोग्राम मजबूत किया।
शाहेद-136 जैसे कम लागत वाले लॉयटरिंग मुनिशन (कामिकाजे ड्रोन) ईरान की विशेषता बन गए। ये सस्ते, आसान उत्पादन वाले और प्रभावी हैं। इन्हें स्वार्म अटैक में इस्तेमाल किया जाता है, जो दुश्मन की महंगी एयर डिफेंस को थका देते हैं। ईरान ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों का पूरा इकोसिस्टम खुद बनाता है। साथ ही बम, एंटी-टैंक मिसाइल और अन्य हथियार भी स्वदेशी हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी ईरान आगे है। वे अपनी दवाएं, वैक्सीन और फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स बड़े पैमाने पर उत्पादित करते हैं। कोविड जैसी महामारी में भी उन्होंने अपनी वैक्सीन विकसित की। डॉक्टर, सर्जन और मेडिकल रिसर्चर्स की एक बड़ी फोर्स है, जिसमें महिलाएं प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
जो लोग मुसलमानों को “पिछड़ा” या “पंचरछाप” कहते हैं, उन्हें ईरान की यह कहानी समझनी चाहिए। यहां मुसलमान इंजीनियर ब्रिज 40 घंटे में खड़ा कर देते हैं। वैज्ञानिक मिसाइल बनाते हैं जो एडवांस्ड डिफेंस को भेद लेती हैं। महिलाएं यूनिवर्सिटी में पुरुषों से आगे निकलकर डॉक्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियर बन रही हैं। ईरान प्रतिबंधों के बावजूद स्वावलंबी बन गया – तेल, गैस, कृषि, नैनो टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस और बायोमेडिकल में प्रगति कर रहा है।
यह प्रगति इस्लामिक मूल्यों और राष्ट्रीय इच्छाशक्ति का नतीजा है। शिक्षा को प्राथमिकता दी गई, महिलाओं को अवसर दिए गए और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया। एशिया के कई देशों या यूरोप के कुछ हिस्सों में भी इतनी तेज प्रगति और महिला भागीदारी का यह मॉडल दुर्लभ है। ईरान दिखाता है कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी राष्ट्र ऊंचा उठ सकता है।
ईरानी युवा, खासकर महिलाएं, आज दुनिया को बता रही हैं – हम पढ़ते हैं, हम बनाते हैं, हम लड़ते हैं और हम आगे बढ़ते हैं। मिसाइल हो या राडार, ड्रोन हो या दवा, ब्रिज हो या वैक्सीन – ईरान की कहानी “अदम्य इंजीनियरिंग और ज्ञान” की कहानी है।
जो लोग मुसलमानों को सिर्फ एक नजरिए से देखते हैं, उन्हें ईरान की इस यात्रा को समझना चाहिए। 1970 से अब तक का सफर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, मेहनत और विश्वास का है। ईरान टूटने के बजाय हर बार मजबूत होकर उठता है। यह है असली प्रगति का सबूत। 🇮🇷
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 11,2026