-Friday World-April 9,2026
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब अमेरिकी राजनीति में भी जोरदार बहस छिड़ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी मर्जी से बड़े सैन्य अभियान या युद्ध नहीं छेड़ सकें, इसके लिए कांग्रेस के सांसद अब उनकी सत्ता पर सख्त अंकुश लगाने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले सप्ताह में संसद में एक महत्वपूर्ण वार पावर्स रेजोल्यूशन (युद्ध शक्ति प्रस्ताव) पेश किया जाएगा, जिसमें ईरान पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या हमले से पहले राष्ट्रपति को कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
यह प्रस्ताव अमेरिकी लोकतंत्र और संवैधानिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर ने साफ कहा है कि देश फिलहाल एक खतरनाक दौर से गुजर रहा है। युद्ध जैसे गंभीर फैसले केवल एक व्यक्ति के हाथ में नहीं छोड़े जा सकते। इन फैसलों की जिम्मेदारी कांग्रेस के पास होनी चाहिए, क्योंकि अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार संसद को ही है।
ट्रम्प के आक्रामक रवैये ने विवाद को भड़काया
राष्ट्रपति ट्रम्प के हालिया बयानों ने इस पूरे मामले को नई ऊंचाई दी है। ट्रम्प ने ईरान को खुली धमकी देते हुए कहा था कि यदि हार्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान की पूरी सभ्यता को नष्ट कर देगा। इस उत्तेजक बयान ने विश्व स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी थी। हालांकि, अंतिम समय में ट्रम्प ने दो सप्ताह के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा कर दी, जिसे ईरान ने भी स्वीकार कर लिया। इस समझौते में हार्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने का प्रावधान शामिल है, और पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है।
लेकिन विपक्षी डेमोक्रेटिक सांसद अब इसे अस्थायी राहत मानते हुए कह रहे हैं कि भविष्य में ट्रम्प अपनी मर्जी से ऐसी खतरनाक नीतियां या सैन्य फैसले न ले सकें, इसके लिए स्थायी कानूनी बाध्यता लगानी होगी। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक लीडर हकीम जेफ्रीज ने ट्रम्प के रवैये को “बेहद लापरवाह और अनुत्तरदायी” बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध की सत्ता को सीमित करने वाला प्रस्ताव कांग्रेस की संवैधानिक जिम्मेदारी को बहाल करने का प्रयास है।
अमेरिकी संविधान और युद्ध की सत्ता का मुद्दा
अमेरिकी संविधान स्पष्ट रूप से युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस को देता है। लेकिन पिछले कई दशकों से राष्ट्रपति “तात्कालिक खतरे” या “छोटे अभियान” के बहाने इस प्रावधान को दरकिनार कर देते हैं। ट्रम्प पर आरोप है कि उन्होंने इसी छूट का फायदा उठाते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसमें हवाई हमले और अन्य अभियान शामिल रहे।
कांग्रेस में अब कई डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन सांसद भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अकेले एक व्यक्ति के हाथ में इतनी बड़ी शक्ति देश को अनावश्यक युद्धों में धकेल सकती है। विशेष रूप से ईरान युद्ध के बढ़ते खर्च, मानवीय हानि और वैश्विक आर्थिक प्रभाव (खासकर तेल की आपूर्ति पर) को देखते हुए यह मांग और मजबूत हो गई है।
कांग्रेस का यह कदम क्यों महत्वपूर्ण?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो ट्रम्प प्रशासन को ईरान या किसी अन्य देश के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान के लिए संसद से पूर्व अनुमति लेनी पड़ेगी। इससे न केवल युद्ध की संभावना कम होगी, बल्कि विदेश नीति में कांग्रेस की भूमिका भी मजबूत होगी।
ट्रम्प समर्थक रिपब्लिकन सांसदों का तर्क है कि राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर तेजी से फैसले लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। लेकिन डेमोक्रेट्स और कुछ स्वतंत्र आवाजें कह रही हैं कि युद्ध-शांति जैसे फैसले एक व्यक्ति नहीं, बल्कि चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में होने चाहिए।
ईरान संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह तनाव फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान-इजराइल संघर्ष के बाद और गहराया, जब अमेरिका ने भी सैन्य हस्तक्षेप किया। ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाया। हार्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित हुआ, जिससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं।
दो सप्ताह का सीजफायर अब एक नाजुक समझौता माना जा रहा है। दोनों पक्ष दावा कर रहे हैं कि बातचीत आगे बढ़ेगी, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समझौता टूटा तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र की असली परीक्षा
अमेरिकी कांग्रेस में ट्रम्प पर लगाम लगाने का यह प्रयास सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि संवैधानिक संतुलन की बहाली का मुद्दा है। क्या कांग्रेस अपनी शक्ति वापस पा सकेगी? क्या रिपब्लिकन बहुमत इस प्रस्ताव को पास होने देगा? आने वाले दिनों में होने वाला वोट न केवल अमेरिका की विदेश नीति, बल्कि पूरे विश्व की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
ट्रम्प के आक्रामक रवैये ने दुनिया को याद दिलाया कि व्यक्तिगत फैसले कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। अब कांग्रेस को यह साबित करना होगा कि अमेरिकी लोकतंत्र अभी भी मजबूत है और युद्ध-शांति जैसे बड़े फैसले एक व्यक्ति के बजाय चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 9,2026