-Friday World-April 19,2026
दो हफ्तों के नाजुक युद्धविराम के बीच ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को फिर से संभाल लिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में अमेरिकी सेना और खुफिया अधिकारियों के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ईरान के पास अब भी अपने हमलावर ड्रोनों का लगभग 40 प्रतिशत और मिसाइल लॉन्चरों का 60 प्रतिशत से ज्यादा बचा हुआ है। इसके अलावा, बैलिस्टिक मिसाइलों का स्टॉक भी पूर्व-युद्ध स्तर का करीब 70 प्रतिशत तक सुरक्षित माना जा रहा है। ईरानी सेना ने भूमिगत बंकरों और गुफाओं से 100 से ज्यादा लॉन्चर सिस्टम निकालकर अपनी ताकत को और मजबूत कर लिया है। यह तैयारी न केवल भविष्य के किसी भी टकराव के लिए है, बल्कि विश्व की सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को चुनौती देने की क्षमता भी बनाए रखती है।
यह युद्धविराम 8 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था, जो अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे संघर्ष के बाद ब्रोकर किया गया। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस समझौते पर मुहर लगी, लेकिन दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिकी नौसेना द्वारा उसके बंदरगाहों पर लगाया गया ब्लॉकेड युद्धविराम का उल्लंघन है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का आरोप लगा रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौते का सम्मान नहीं करता तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर देगा।
ईरान की प्रतिक्रिया सख्त और स्पष्ट है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा, "अमेरिका को खतरनाक अंजाम भुगतने पड़ेंगे। हम पूरी तरह से तैयार हैं। अगर वे जरा सी भी गलती करते हैं तो हम पूरी ताकत से जवाब देंगे।" गालिबाफ ने आगे जोड़ा कि ईरानी सशस्त्र बल अमेरिकी जमीनी सैनिकों के आने का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें "आग के हवाले" करने को तैयार हैं। उन्होंने अमेरिका को "इजरायल फर्स्ट" नीति से पीछे हटने की सलाह भी दी।
युद्धविराम के दौरान ईरान की रणनीतिक तैयारी
युद्धविराम की अवधि ईरान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रही है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के दौरान ईरान ने अपने कई मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन खो दिए थे, लेकिन भूमिगत सुविधाओं और बंकरों में छिपाए गए हथियार अब फिर से सक्रिय हो रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि युद्धविराम शुरू होने के समय ईरान के पास मिसाइल लॉन्चरों का केवल आधा हिस्सा ही operational था, लेकिन अब 100 से ज्यादा अतिरिक्त सिस्टम निकालकर यह संख्या 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
ईरान की सैन्य रणनीति हमेशा से असममित युद्ध पर आधारित रही है। बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें, स्वयं-विस्फोटक ड्रोन (शहीद-136 जैसे) और समुद्री हमले की क्षमता उसके मुख्य हथियार हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। अगर ईरान इसे फिर से बंद करने या खतरे में डालने की स्थिति में पहुंच जाता है, तो वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पहले ही चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज होर्मुज की ओर बढ़ने की कोशिश करेगा तो उसे निशाना बनाया जाएगा।
इस दौरान ईरान ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को भी मजबूत किया है और छिपे हुए स्टॉक को फिर से संगठित कर रहा है। अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि ईरान के पास अभी भी हजारों मिसाइलें और ड्रोन बचे हुए हैं, जो क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों और इजरायली हितों के लिए खतरा बने रहेंगे।
ट्रंप की धमकियां और ईरान का दृढ़ संकल्प
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कई बार ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान "थोड़ा चालाक" बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका कुछ नहीं खो रहा है। ट्रंप का दावा है कि होर्मुज पर नियंत्रण और बंदरगाहों पर ब्लॉकेड से ईरान रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान उठा रहा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान की सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा।
लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं दिख रहा। गालिबाफ ने साफ कहा कि अमेरिकी धमकियां ईरानी राष्ट्र पर कोई असर नहीं डालेंगी। "अगर वे लड़ना चाहते हैं तो हम लड़ेंगे, अगर तर्क से बात करना चाहते हैं तो हम तर्क से जवाब देंगे। हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे।" ईरान का मानना है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बावजूद उसकी सैन्य मशीनरी अभी भी काफी हद तक बरकरार है।
पाकिस्तान में शांति वार्ता की संभावना
युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए पाकिस्तान में एक और दौर की बातचीत की संभावना जताई जा रही है। पाकिस्तान ने पहले भी दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की थी और इस्लामाबाद में हुई बैठकें काफी चर्चित रहीं। हालांकि, पिछली वार्ताओं में कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। पाकिस्तानी अधिकारी अब दूसरे दौर की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।
ईरान की मांग है कि अमेरिका अपना नौसैनिक ब्लॉकेड हटाए और इजरायल लेबनान में हमले बंद करे। वहीं अमेरिका ईरान से परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और क्षेत्रीय स्थिरता की गारंटी चाहता है। गालिबाफ ने कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौते से अभी काफी दूर हैं। मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका दोनों देशों द्वारा सराही गई है, लेकिन विश्वास की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक चिंताएं
यह पूरा संकट मध्य पूर्व की स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर कोई भी अड़चन वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दे सकती है, खासकर तेल आयातक देशों जैसे भारत, चीन, जापान और यूरोपीय राष्ट्रों को। भारत के लिए ईरान न केवल तेल का स्रोत है, बल्कि क्षेत्रीय भू-राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ईरान की मजबूत तैयारी दिखाती है कि वह आसानी से हार मानने वाला नहीं है। उसकी भूगोलिक स्थिति, भूमिगत सुविधाएं और असममित युद्ध की क्षमता उसे लंबे संघर्ष के लिए तैयार रखती है। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल की उन्नत तकनीक और हवाई हमले की क्षमता भी कम नहीं है।
आगे क्या?
युद्धविराम की समय सीमा जल्द समाप्त होने वाली है। अगर पाकिस्तान में होने वाली वार्ता सफल होती है तो क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगेगी, वरना तनाव और बढ़ सकता है। ईरान का संदेश साफ है – हम तैयार हैं और किसी भी गलती का जवाब पूरी ताकत से देंगे।
दुनिया इस नाजुक मोड़ पर नजर रखे हुए है। होर्मुज का भविष्य, तेल की कीमतें और मध्य पूर्व की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष समझौते की राह चुनते हैं या फिर युद्ध के अगले चरण में कदम रखते हैं। ईरान की बची हुई शक्ति और उसकी दृढ़ता इस पूरे संघर्ष में एक नया आयाम जोड़ रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 19,2026