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Saturday, 18 April 2026

ट्रंप का पाकिस्तान प्रेम: पहले लताड़ते थे, अब इस्लामाबाद में ईरान डील साइन करने खुद जाने को तैयार!

ट्रंप का पाकिस्तान प्रेम: पहले लताड़ते थे, अब इस्लामाबाद में ईरान डील साइन करने खुद जाने को तैयार!-Friday World-April 18,2026 
वाशिंगटन/इस्लामाबाद, 18 अप्रैल 2026— अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान के प्रति रवैया पूरी तरह पलट गया है। अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) में पाकिस्तान को “झूठ बोलने वाला”, “आतंकवादियों को पनाह देने वाला” और “अमेरिका को धोखा देने वाला” देश बताकर लताड़ते नहीं थकने वाले ट्रंप अब दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान का भरपूर गुणगान कर रहे हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान उन्हें “बहुत पसंद” करता है और अगर अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता इस्लामाबाद में फाइनल होता है तो वे खुद पाकिस्तान जा सकते हैं।

ट्रंप के शब्दों में, “पाकिस्तान बहुत शानदार है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर दोनों बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। अगर डील इस्लामाबाद में साइन होती है तो मैं जा सकता हूं। वे मुझे चाहते हैं।”

 पहले कार्यकाल vs दूसरे कार्यकाल — ट्रंप का उलटा पलटा
2018-2019 के दौरान ट्रंप ने पाकिस्तान पर तीखे हमले किए थे। उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया था कि वह अफगानिस्तान में आतंकवादियों को पनाह देता है और अमेरिका को “धोखा” दे रहा है। ट्रंप ने उस समय पाकिस्तान को सैन्य सहायता रोकने और आर्थिक दबाव बढ़ाने की धमकी भी दी थी। लेकिन 2026 में ईरान के साथ करीब 7 सप्ताह चले संघर्ष (जिसमें इजरायल और अमेरिका शामिल थे) के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है।

ईरान-यूएस युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। अप्रैल 2026 में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच मैराथन बातचीत हुई, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, जared कुश्नर और स्टीव विटकोफ की टीम शामिल थी। 21 घंटे तक चली इन बातचीतों में कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका, लेकिन पाकिस्तान को दोनों पक्षों ने मध्यस्थ के रूप में सराहा।

ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि ईरान समझौते के “करीब” है और उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा, “फील्ड मार्शल (आसिम मुनीर) शानदार हैं। प्रधानमंत्री भी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।”

 इस्लामाबाद में दूसरा दौर संभव
ट्रंप के बयान से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका-ईरान के बीच दूसरा दौर की बातचीत भी इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तानी अधिकारी पहले ही दूसरे दौर की तैयारी कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर डील इस्लामाबाद में फाइनल होती है तो वे खुद साइनिंग सेरेमनी में शामिल हो सकते हैं।

यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने पहले कभी पाकिस्तान को इतनी खुलकर तारीफ नहीं की थी। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान संकट में पाकिस्तान की मध्यस्थता ने ट्रंप प्रशासन को नई कूटनीतिक राह दिखाई है। पाकिस्तान न सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच पुल का काम कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

 ईरान के साथ क्या चल रहा है?
- अप्रैल 2026 में अमेरिका-इजरायल की कार्रवाइयों के बाद ईरान के साथ संघर्ष शुरू हुआ।
- पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद टॉक्स (11-12 अप्रैल) हुए, जो 21 घंटे चले लेकिन कोई डील नहीं हुई।
- अमेरिका ईरान से न्यूक्लियर प्रोग्राम सीमित करने, संवर्धित यूरेनियम सौंपने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हमास) पर नियंत्रण की मांग कर रहा है।
- ईरान इन मांगों को “अधिकतमवादी” बता रहा है और स्थायी समाधान की बात कर रहा है।
- ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान “लगभग सब कुछ” मान चुका है, जबकि ईरानी पक्ष अभी भी सतर्क है।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज की खाड़ी पर ब्लॉकेड जारी रह सकता है अगर डील नहीं होती।

 पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत?
पाकिस्तान के लिए यह मौका बड़ा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर दोनों ने ईरान और अमेरिका के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को संदेश भेजे हैं और दूसरे दौर की मेजबानी की तैयारी कर रहा है।

ट्रंप के बयान से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि में सुधार का संकेत मिल रहा है। पहले आतंकवाद और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अब कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है।

 भारत के लिए क्या मायने रखता है?
भारत के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार साबित हो सकती है। एक ओर पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका भारत के लिए चिंता का विषय है, दूसरी ओर अगर अमेरिका-ईरान डील होती है तो क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है। भारत ईरान से चाबहार पोर्ट और तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए स्थिरता उसके हित में है।

 आगे क्या?
- दूसरे दौर की बातचीत इस्लामाबाद या जेनेवा में हो सकती है।
- ट्रंप का पाकिस्तान जाना डिप्लोमेटिक इतिहास में यादगार पल साबित हो सकता है।
- अगर डील होती है तो मध्य पूर्व में नया संतुलन बन सकता है, वरना तनाव और बढ़ सकता है।

ट्रंप का यह बयान न सिर्फ पाकिस्तान के प्रति उनके नजरिए में बदलाव दिखाता है, बल्कि ईरान संकट को सुलझाने में पाकिस्तान की अहमियत को भी रेखांकित करता है। अब देखना यह है कि इस्लामाबाद में दूसरा दौर कब होता है और ट्रंप वाकई पाकिस्तान जाते हैं या नहीं।

पाकिस्तान की इस मध्यस्थ भूमिका ने दक्षिण एशिया की कूटनीति को नई दिशा दी है। ट्रंप का “माइट गो टू पाकिस्तान” बयान आने वाले दिनों में और चर्चा का विषय बनेगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 18,2026